Haryana में सूरजमुखी की फसल पर कटवा सुंडी का खतरा, बिना सलाह के दवाई का प्रयोग न करें किसान, वरना...
punjabkesari.in Thursday, Apr 09, 2026 - 03:55 PM (IST)
अंबाला (अमन कपूर) : अंबाला के किसान इन दिनों सूरजमुखी में कटवा कीड़ा पैदा होने से मायूस नजर आ रहे है । किसानों से जब इस बारे में बात की तो उनका कहना था कि जब तक पूर्व दिशा से हवा चलेगी, तब तक फसल में अनेकों बीमारियां पैदा होंगी। सूरजमुखी में पैदा हुए कटवा कीड़े के बारे में बोलते हुए किसानों ने कहा कि दो बार सप्रे भी कर चुके है लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि नकली दवाइयां आ रही है जिसके कारण स्प्रे का कोई फायदा नहीं होता । किसानों का कहना है कि ये कीड़ा फूल में घुस जाता है और उसको खा जाता है जिसके कारण पैदावार बहुत कम होती है। कटवा कीड़े के कारण किसान काफी चिंतित नजर आ रहे हैं ।
25 हजार एकड़ भूमि पर करवाया गया सूरजमुखी की फसल का पंजीकरण
हरियाणा में सूरजमुखी उत्पादन के क्षेत्र में अंबाला जिला लगातार अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है और इस वर्ष भी प्रदेश में प्रथम स्थान पर कायम है। “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर दर्ज ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिले के किसानों द्वारा लगभग 25 हजार एकड़ भूमि पर सूरजमुखी की फसल का पंजीकरण कराया गया है। इसी बीच फसल पर संकट के बादल भी मंडराने लगे हैं।
कृषि विभाग के अनुसार इन दिनों सूरजमुखी की फसल पर कटवा सुंडी का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। यह कीट विशेष रूप से रात के समय सक्रिय होता है और छोटे-छोटे पौधों को जड़ के पास से काट देता है। सुबह के समय खेतों में गिरे हुए पौधे इस बात का संकेत होते हैं कि फसल पर कीट का हमला हो चुका है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को दी ये सलाह
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि खेत में नमी अधिक हो और तापमान अनुकूल हो, तो कटवा सुंडी तेजी से फैलती है। ऐसे में किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करें और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाएं। शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रण करने से नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। कृषि विभाग ने किसानों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे बिना सलाह के किसी भी दवाई का प्रयोग न करें। केवल विभाग द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों का ही उपयोग करें और छिड़काव के समय मात्रा और विधि का विशेष ध्यान रखें। गलत दवाई या अधिक मात्रा में छिड़काव करने से फसल को नुकसान पहुंच सकता है और लागत भी बढ़ सकती है।
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