हरियाणा प्रशासनिक गलियारों के ''संकटमोचक'': मनोहर लाल से लेकर नायब सैनी तक कैसे खास बने हुए हैं मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर?
punjabkesari.in Saturday, Oct 17, 2026 - 08:40 AM (IST)
चंडीगढ़ ( चंद्र शेखर धरणी): मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार के दूसरे कार्यकाल में मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर प्रशासन की सबसे अहम कड़ियों में शामिल हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के भरोसेमंद अधिकारियों में शुमार रहे खुल्लर ने नायब सिंह सैनी के साथ भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका बरकरार रखी है। करीब 35 वर्षों का प्रशासनिक अनुभव, नीतिगत मामलों की समझ, मधुर व्यवहार और समस्याओं के समाधान की दिशा में सक्रियता उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं हैं।
हरियाणा के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में खुल्लर की पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में है, जो मंत्रियों, विधायकों और नेताओं की बात सुनने के साथ संबंधित मामलों में समाधान तलाशने का प्रयास करते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में उनकी भूमिका केवल फाइलों के निस्तारण तक सीमित नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं, विभागीय समन्वय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को गति देने से भी जुड़ी है।
मनोहर लाल से नायब सैनी तक कायम रहा भरोसा
राजेश खुल्लर नवंबर 2015 से सितंबर 2020 तक तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रधान सचिव रहे। सितंबर 2020 में वह विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक की जिम्मेदारी संभालने चले गए। 31 अगस्त 2023 को आईएएस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें एक सितंबर 2023 को हरियाणा के मुख्यमंत्री का मुख्य प्रधान सचिव नियुक्त किया गया।
मनोहर लाल के बाद नायब सिंह सैनी के मुख्यमंत्री बनने पर भी उनकी भूमिका बनी रही। अक्टूबर 2024 में सैनी सरकार में उनकी नियुक्ति से संबंधित आदेश जारी किए गए। लंबे समय तक अलग-अलग राजनीतिक नेतृत्व के साथ काम करने का अनुभव उन्हें हरियाणा की प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी प्रक्रियाओं और राजनीतिक परिस्थितियों की गहरी समझ देता है।
नायब सिंह सैनी के दूसरे कार्यकाल में सरकार के सामने जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देने, विभागों के बीच तालमेल मजबूत करने और जनअपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती है। ऐसे में खुल्लर का प्रशासनिक अनुभव और मुख्यमंत्री कार्यालय में उनकी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है।
संवाद और समाधान उनकी कार्यशैली की पहचान
मुख्यमंत्री कार्यालय सरकार और प्रशासन के बीच अहम संपर्क केंद्र है। यहां लिए गए निर्णयों का असर विभागों की कार्यप्रणाली और योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ता है। मुख्य प्रधान सचिव के रूप में खुल्लर विभिन्न प्रशासनिक और नीतिगत विषयों पर समन्वय की जिम्मेदारी निभाते हैं।
उनकी कार्यशैली की खासियत यह मानी जाती है कि वह समस्याओं को सुनने और उनके व्यावहारिक समाधान की दिशा तलाशने पर जोर देते हैं। मधुरभाषी और संतुलित व्यक्तित्व के कारण राजनीतिक प्रतिनिधियों तथा अधिकारियों के साथ संवाद बनाए रखना उनकी प्रमुख विशेषताओं में गिना जाता है। पर्दे के पीछे रहकर काम करना उनकी शैली का हिस्सा है, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय में उनकी भूमिका सरकार की प्रशासनिक कार्यक्षमता से सीधे जुड़ी है।
‘अपनी बेटी अपना धन’ से सामाजिक सरोकारों की झलक
खुल्लर के प्रशासनिक जीवन का एक उल्लेखनीय अध्याय वर्ष 1992 से जुड़ा है। उस समय वह पानीपत में अतिरिक्त उपायुक्त के पद पर कार्यरत थे। हरियाणा में बेटियों के प्रति भेदभाव और कन्या भ्रूण हत्या गंभीर सामाजिक चुनौतियां थीं। इस पृष्ठभूमि में उन्होंने ‘अपनी बेटी अपना धन’ योजना की नीति तैयार करने की दिशा में पहल की। इस योजना का उद्देश्य बेटियों को आर्थिक सुरक्षा देकर उनके प्रति सामाजिक सोच में बदलाव लाना था।
यह पहल उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण के उस पक्ष को सामने लाती है, जिसमें सरकारी नीतियों को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाने पर जोर दिखाई देता है। विभिन्न विभागों और महत्वपूर्ण पदों पर काम करने के दौरान उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ सामाजिक विषयों से भी जुड़ाव बनाए रखा।
प्रशासन के साथ साहित्य से भी नाता
अंबाला में जन्मे राजेश खुल्लर ने एमएससी फिजिक्स की पढ़ाई के बाद संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया। करीब 35 वर्षों के करियर में उन्होंने लगभग 30 अलग-अलग पदों पर काम किया और विश्व बैंक में भी जिम्मेदारी निभाई।
उनके व्यक्तित्व का एक अलग पहलू साहित्यिक रुचि है। व्यस्त प्रशासनिक दिनचर्या के बीच वह लेखन के लिए समय निकालते हैं। उनका उपन्यास ‘वायरल सत्य’ सामाजिक अनुभवों और आत्ममंथन से उपजी इसी रचनात्मकता का उदाहरण है। सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों से दूरी रखते हुए वह मुख्य रूप से व्हाट्सएप का उपयोग करते हैं।
सरकार की गति में अहम भूमिका
नायब सिंह सैनी सरकार के दूसरे कार्यकाल में राजेश खुल्लर की अहमियत उनके पद के साथ-साथ प्रशासनिक अनुभव, संवाद क्षमता और शासन की प्रक्रियाओं पर पकड़ से तय होती है। मनोहर लाल के कार्यकाल में अर्जित भरोसे और वर्तमान मुख्यमंत्री के साथ निरंतरता ने उन्हें हरियाणा के सत्ता-प्रशासन तंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी बनाया है।
मुख्यमंत्री सरकार का नेतृत्व करते हैं, लेकिन नीतियों को जमीन पर उतारने के लिए मजबूत प्रशासनिक समन्वय जरूरी होता है। मुख्य प्रधान सचिव के रूप में खुल्लर की भूमिका इसी समन्वय को प्रभावी बनाने और सरकार की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में अहम है।