फर्जी दस्तावेजों से कर्मचारी ने कंपनी के नाम से बनाई रिपोर्ट, अदालत ने सुनाई दो साल की सजा

punjabkesari.in Thursday, Oct 01, 2026 - 08:36 PM (IST)

गुड़गांव, (ब्यूरो): न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी रश्मीत कौर ने एक कंपनी के पूर्व कर्मचारी उपेंद्र प्रसाद को दूसरी कंपनी के नाम से फर्जी टेस्ट रिपोर्ट तैयार करने और उनका इस्तेमाल व्यावसायिक लेनदेन में करने के आरोप में दोषी ठहराया है। अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 471 (फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना) के तहत दोषी करार दिया है। हालांकि, ठोस सबूतों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने आरोपी को धारा 467, 468 और 201 के आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने उसे धारा 420, 471 के तहत दोषी करार देते हुए दो साल और छह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। 

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मामला 20 सितंबर 2016 का है, जब एक निजी कंपनी के वरिष्ठ मानव संसाधन अधिकारी ने उद्योग विहार थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्लॉट नंबर 318, फेज-दो स्थित कंपनी के द्वारा उनकी कंपनी के फर्जी लेटरहेड और रजिस्टर्ड लोगो का बिना अनुमति इस्तेमाल कर फर्जी टेस्ट रिपोर्ट तैयार कर रही है और उन्हें बडी ऑटो कंपनियों को भेजा जा रहा है। पुलिस जांच के दौरान पुलिस टीम ने कंपनी परिसर में छापेमारी कर एक हजार 468 कंपनी के फर्जी लेटरहेड, कई कंपनियों की मुहरें, दो सीपीयू और एक प्रिंटर बरामद किया था। इस मामले में जांच करते हुए पुलिस ने उपेंद्र प्रसाद को सात दिसंबर 2016 को गिरफ्तार किया गया था। मामले की लंबी सुनवाई और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने पाया कि आरोपी उपेंद्र प्रसाद फर्जी रिपोर्टों का इस्तेमाल करने में संलिप्तता साबित होती है। अदालत ने उपेंद्र प्रसाद को दोषी करार दिया। कोर्ट ने दो साल और छह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

 


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Content Editor

Pawan Kumar Sethi

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