EWS सर्टिफिकेट से संबंधित मेल ने UPSC के अभ्यर्थियों की बढ़ाई चिंता, छात्रों के अनुरोध पर विज ने लिखा मुख्य सचिव को पत्र

punjabkesari.in Monday, Dec 04, 2023 - 06:11 PM (IST)

चंडीगढ़ (चंद्र शेखर धरणी): हरियाणा के ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के कुछ अभ्यार्थियों द्वारा इस वर्ष 2023 में यूपीएससी परीक्षा में भाग लिया गया था, लेकिन हाल ही में उनकी ईमेल पर यूपीएससी द्वारा भेजी गई एक मेल ने उनके लिए एक बड़ी परेशानी और दुविधा खड़ी कर दी है। दरअसल हरियाणा प्रदेश के करीब दो दर्जन ऐसे अभ्यर्थियों ने ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट पर तहसीलदार या एसडीएम द्वारा हस्ताक्षर करवाने की बजाय इसे नायाब तहसीलदार से ईश्यू करवा लिया था। जिसे यूपीएससी ने मानने से इंकार कर दिया है। इसी प्रकार की मेल इन अभ्यर्थियों की ईमेल पर आईं हैं। दरअसल 2019 में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग के नागरिकों को 10 फ़ीसदी आरक्षण का लाभ केंद्र सरकार द्वारा दिया गया था। जिसके लिए संबंधित अधिकारियों से एक सर्टिफिकेट ईश्यू किया जाता है। इस परेशानी से जूझ रहे कुछ अभ्यर्थी प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज से मिले थे। अनिल विज ने चीफ सेकेट्री को पत्र लिख इनकी समस्या के समाधान को कहा है।

जिसमें उन्होंने कैबिनेट मंत्री से गुहार लगाते हुए बताया कि यूपीएससी परीक्षा क्लियर करने के लिए तीन स्टेप कलियर करने होते हैं। जिसमें प्रारंभिक परीक्षा -मेंस परीक्षा और व्यक्तिगत साक्षात्कार होता है। पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा जिसमें लगभग 10 लाख अभ्यर्थी भाग लेते हैं। जो मात्र 10 लाख से 10000 रह जाते हैं और इंटरव्यू कॉल केवल 2500 को कि जाती है। प्रारंभिक परीक्षा से पहले यूपीएससी द्वारा साइनिंग डॉक्यूमेंट अथॉरिटी के बारे में जानकारी पूछी जाती है। जिसमें हमने नायब तहसीलदार के बारे में बताया था। उसके बाद दूसरे चरण मेंस परीक्षा के बाद 15 दिन में डीएएफ 1 (डीटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म) भरना होता है। जो हमने भरा भी, लेकिन उस दौरान भी हमें इसकी जानकारी नहीं दी गई। अब एक हमें मेल भेज दी गई है जो कतई उचित नहीं है। यह अभ्यर्थियों का फाल्ट कतई नहीं है।

उन्होंने बताया कि 2017 में हरियाणा-पंजाब हाई कोर्ट में गए इस प्रकार के एक मामले में 2019 में आए फैसले पर नायब तहसीलदार- तहसीलदार और एसडीएम को साइनिंग अथॉरिटी तय किया गया था। हरियाणा सरकार ने भी इसे मान्य किया हुआ है। अभ्यर्थियों ने बताया कि यूपीएससी के फैसले से प्रदेश भर में करीब 23 प्रभावित बच्चे हैं, जिनका फाल्ट न होने के बावजूद वह भविष्य को लेकर भयभीत है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के गृह स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से हमें पूर्ण उम्मीदें हैं कि इसका समाधान वह अवश्य निकलेंगे। उन्होंने कहा कि हमने इस बारे यूपीएससी से यह भी विनती की है कि हमें कुछ समय दें, ताकि हम एसडीएम या तहसीलदार से काउंटर साइन करवा कर अपने कागजात सबमिट करवा दें, लेकिन भेजी गई मेल में यह साफ किया गया है कि कुछ बच्चों के फार्म कैंसिल कर दिए गए हैं या कुछ को ईडब्ल्यूएस से जनरल कैटेगरी में शिफ्ट कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर उनके भविष्य को प्रभावित कर देने वाला फैसला है, जिसे कतई उचित नहीं कहा जा सकता।

दरअसल 2019 में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग वाले नागरिकों को 10 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने 103 में संशोधन अधिनियम 2019 की वैधता को बरकरार रखते हुए 2022 में इसे उचित करार दिया। जिसका लाभ इन अभ्यर्थियों को मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया में पहले नगर पालिका- परिषद या निगम के बाद तहसील से वेरीफाई करने के बाद ऑनलाइन डॉक्यूमेंट अपडेट किए जाते हैं। वह इसके लिए पूरी तरह से पात्र हैं। कागजात अपलोड करते वक्त भी किसी प्रकार की रुकावट नहीं आई। इसलिए इस बारे ऐसा फैसला होना चाहिए कि किसी भी अभ्यर्थी का भविष्य प्रभावित न हो। इन अभ्यर्थियों ने प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल विज से इस मामले में गंभीरता से हस्तक्षेप करने को लेकर भी विनती की है।

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Content Editor

Saurabh Pal

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