Organ Donation: मृत्यु के बाद भी किसी की सांसें बन सकते हैं आप, अंगदान को लेकर सरकार का बड़ा प्लान
punjabkesari.in Wednesday, Aug 19, 2026 - 07:06 PM (IST)
चंडीगढ़(धरणी): किसी व्यक्ति की जिंदगी खत्म होने के बाद भी उसके अंग किसी दूसरे व्यक्ति के लिए जिंदगी की नई शुरुआत बन सकते हैं। यही वह मानवीय सोच है, जिसे देशव्यापी जन अभियान का रूप देने के लिए भारत सरकार ने भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के माध्यम से ‘अंगदान करो, जुग-जुग जियो’ अभियान शुरू किया है। एक साल तक चलने वाले इस अभियान का मकसद केवल अंगदान के लिए लोगों से संकल्प करवाना नहीं, बल्कि समाज में वर्षों से चली आ रही भ्रांतियों को दूर कर अंगदान को सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना से जोड़ना है।
इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि सरकार अब अंगदान को केवल स्वास्थ्य विभाग या अस्पतालों तक सीमित विषय नहीं मान रही, बल्कि इसे परिवार और समाज के स्तर पर चर्चा का विषय बनाने पर जोर दे रही है। परिवारों के बीच अंगदान को लेकर खुली बातचीत, डिजिटल पंजीकरण, अंगदान की प्रतिज्ञा और प्रत्यारोपण की व्यवस्था को मजबूत करना अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं।
दस वर्षों में चार गुना से अधिक बढ़े प्रत्यारोपण
देश में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। वर्ष 2013 में देश में अंग प्रत्यारोपण की संख्या करीब 4,990 थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 20,000 से अधिक हो गई। मृतक दाताओं से होने वाले अंग प्रत्यारोपण में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2013 में जहां मृत दाताओं से 837 अंग प्रत्यारोपण हुए थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या 3,500 से अधिक पहुंच गई।
वर्ष 2023 में राष्ट्रीय डिजिटल प्रतिज्ञा पोर्टल शुरू होने के बाद से आधार-सत्यापित अंगदान प्रतिज्ञाओं की संख्या भी पांच लाख से अधिक हो चुकी है। यह संकेत है कि डिजिटल माध्यमों ने लोगों को अंगदान की प्रतिज्ञा लेने की प्रक्रिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।|}|
हरियाणा में भी बदल रही सोच, 7,940 लोगों ने लिया अंगदान का संकल्प
अंगदान के मामले में हरियाणा की तस्वीर भी धीरे-धीरे बदल रही है। प्रदेश में अब तक 7,940 लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया है। यह आंकड़ा बताता है कि लोगों के बीच जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन जिलावार आंकड़े यह भी बताते हैं कि इस दिशा में अभी लंबी दूरी तय करनी बाकी है।
हरियाणा में जींद 1,076 पंजीकरण के साथ सबसे आगे है। इसके बाद गुरुग्राम में 973 और फरीदाबाद में 791 लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया है। दूसरी ओर नूंह में 48, चरखी दादरी में 21 और पलवल में 21 पंजीकरण हुए हैं।
इन आंकड़ों में दिखाई देने वाला बड़ा अंतर सरकारी और सामाजिक संगठनों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। जिन जिलों में पंजीकरण कम है, वहां जागरूकता अभियान को स्थानीय सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों, पंचायतों और स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से ज्यादा प्रभावी बनाने की जरूरत है।
परिवार की सहमति को बनाना होगा अभियान का केंद्र
अंगदान की प्रतिज्ञा लेने से लेकर वास्तविक अंगदान तक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी परिवार है। इसलिए केवल डिजिटल पंजीकरण पर्याप्त नहीं है। जिस व्यक्ति ने अंगदान का संकल्प लिया है, उसे अपने परिवार के सदस्यों को भी इसकी जानकारी देनी चाहिए।
मृत्यु के बाद निर्णायक क्षणों में परिवार यदि पहले से व्यक्ति की इच्छा से परिचित होगा तो निर्णय लेना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। यही कारण है कि ‘अंगदान करो, जुग-जुग जियो’ अभियान का परिवारों में संवाद बढ़ाने पर जोर बेहद महत्वपूर्ण है।