सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज से करवाई जाए विकास दुबे एनकाऊंटर की जांच: कांग्रेस

7/10/2020 9:59:30 PM

चंडीगढ़ (संजय अरोड़ा): कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने उत्तरप्रदेश के दुर्दांत अपराधी विकास दुबे के एनकाऊंटर पर उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोपों की झड़ी लगाई है। उत्तरप्रदेश में संगठित अपराध, अवैध हथियार, रेप, मर्डर, डकैती एवं महिला अपराध पर आंकड़ें पेश करते हुए रणदीप ने तथ्यों के साथ योगी सरकार पर निशाना साधते हुए सवालिया निशान लगाए हैं। 

सुरजेवाला का कहा कहना है कि अपराध के लगभग हर पायदान पर उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है पूरे देश के अवैध हथियारों के 57 प्रतिशत मामले अकेले उत्तर प्रदेश में हो रहे हैं यानी हर घंटे में 26 मामले। 59,445 महिला अपराध के मामलों के साथ (रोज 12 बलात्कार) भी उत्तरप्रदेश पहले स्थान पर है। विकास दुबे एनकाऊंटर के मामले पर योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज ने कहा कि जिस प्रकार से 3 जुलाई, 2020 को उत्तरप्रदेश पुलिस के एक डी.एस.पी. सहित आठ जवानों की हत्या हुई, उसने पूरे देश के रोंगटे खड़े कर दिए व आदित्यनाथ सरकार में गुंडाराज के बोलबाले को उजागर किया। 

सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि न केवल विकास दुबे एनकाउंटर, परंतु संगठित अपराध के सत्ता-शासन में बैठे गठजोड़ को बेनकाब करने के लिए एक सीमित समय में सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से जांच करवाई जाए। यही राजधर्म के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का इम्तिहान भी है। सुरजेवाला ने कहा कि यह चौंकाने वाला ही है कि इस गोलाबारी और हत्याकांड का आरोपी विकास दुबे बड़े आराम से उत्तर प्रदेश पुलिस को चकमा दे फरार हो गया। फिर हरियाणा के फरीदाबाद से होते हुए 1000 किलोमीटर दूर उज्जैन तक सडक़ मार्ग से पहुंच गया। पर न कोई रोक टोक हुई, न शिनाख्त और न धरपकड़, जबकि हर टेलीविजन और अखबार में विकास दुबे की फोटो दिख व छप रही थी। फिर अपनी मर्जी से चिल्ला चिल्लाकर, शिनाख्त कर उज्जैन के महाकाल मंदिर में गिरफ्तारी दी और आज विकास दुबे की पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने की खबर भी आ गई। 



सुरजेवाला ने सवालिया लहजे में कहा कि विकास दुबे तो संगठित अपराध का एक मोहरा था। उस संगठित अपराध के सरगना असल में हैं कौन? विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद अनेक सवाल सार्वजनिक जेहन में खड़े हो गए हैं, जिनका जवाब आदित्य नाथ सरकार को देना होगा। सुरजेवाला ने योगी सरकार को सवालों के कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यह अहम प्रश्न है कि क्या विकास दुबे सफेदपोशों और शासन में बैठे लोगों का राजदार था? क्या उसे सत्ता-शासन में बैठे व्यक्तियों का संरक्षण था?  विकास दुबे के पास वो क्या राज थे, जो सत्ता-शासन से गठजोड़ को उजागर करते? विकास दुबे का नाम प्रदेश के 25 मोस्ट वांटेड अपराधियों में शामिल क्यों नहीं किया गया था? क्या विकास दुबे का एनकाउंटर अपने आप में कई सवाल नहीं खड़ेकर गया? 

सुरजेवाला ने कहा कि अगर विकास दुबे को भागना ही था, तो फिर उज्जैन में तथाकथित सरेंडर क्यों किया? एनकाउंटर से पहले मीडिया के साथी, जो एसटीएफ की गाडिय़ों के साथ चल रहे थे, उन सबको क्यों रोक दिया गया? पहले कहा गया कि अपराध की संगीनता को देखते हुए विकास दुबे को चार्टर प्लेन में लाएंगे, फिर यह फैसला क्यों बदल दिया गया? पहले विकास दुबे एस.टी.एफ. की सफारी गाड़ी में दिखा, तो फिर उसे महिंद्रा टीयूवी 300 में कब और कैसे शिफ्ट किया गया? विकास दुबे की टाँग में लोहे की रॉड होने के कारण वह लंगड़ाकर चलता था, तो वो यकायक भाग कैसे गया? अगर अपराधी विकास दुबे भाग रहा था, तो फिर गोली पीठ की बजाय छाती में कैसे लगी? 



मौके पर मीडियाकर्मियों को गाड़ी के एक्सीडैंट का कोई स्किड मार्क क्यों नहीं मिला और दिखा? क्या यह सही है कि पहले मीडिया को एक्सीडैंट बताया गया और अस्पताल में गोली चलने की पुष्टि की गई? सुरजेवाला ने कहा कि यह बड़ा सवाल है कि इस रहस्यमयी एनकाउंटर की असलियत क्या है? उन्होंने कहा कि आठ पुलिस के अधिकारियों व जवानों की नृशंस हत्या व शहादत तथा विकास दुबे के एनकाउंटर ने अपनेआप में आदित्यनाथ सरकार में गुंडाराज व अपराधिक बोलबाले को लेकर गहन सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मांग है कि विकास दुबे के सरगनाओं को बेनकाब कर ही आठ शहीद पुलिसकर्मियों को न्याय मिल सकता है तथा संगठित अपराध पर नियंत्रण पाया जा सकता है। 


Shivam

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