18 लाख का बिल बनाने वाले अस्पताल पर पुलिस का शिकंजा, DCP ने मांगी रिपोर्ट

Friday, January 12, 2018 4:21 PM
18 लाख का बिल बनाने वाले अस्पताल पर पुलिस का शिकंजा, DCP ने मांगी रिपोर्ट

फरीदाबाद(अनिल राठी): एशियन हॉस्पिटल में एडमिट 20 वर्षीय श्वेता और उसके 7 महीने के बच्चे की मौत के मामले में पुलिस ने अब शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मृतक श्वेता के पिता की शिकायत पर डीसीपी वीरेंद्र विज ने सिविल सर्जन से अस्पताल की लापरवाही की रिपोर्ट मांगी है ताकि मुकद्दमा दर्ज कर अस्पताल के खिलाफ कार्यवाही की जा सके। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही के बाद पुलिस भी सक्रिय हो गई है।
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22 दिन में 18 लाख रूपए और 116 इनेक्शन लगाने के बावजूद 2 की मौत के मामले में मृतका के परिजनो ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देकर आरोपी अस्पताल के खिलाफ  कानूनी कार्रवाई की मांग की। जिसके बाद जिला प्रशासन ने एसडीएम, सीएमओ, आईएमए समेत कई अन्य डॉक्टरों की कमिटी बना दी है जिसके बाद कमिटी ने अस्पताल जाकर मामले से जुड़े कागजात को कब्जे में ले लिया है। सीएमओ के मुताबिक़ वो मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कर रहे है और कमी पाए जाने पर अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

उल्लेखनीय है कि मृतक के पिता सीताराम ने पुलिस कमिश्नर हनीफ कुरैशी को अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और 18 लाख रुपए के बिल के मामले में शिकायत दी थी। उन्होंने बुखार होने पर अपनी बेटी श्वेता को 13 दिसंबर को एशियन हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। उस वक्त वह सात माह की गर्भवती थी। तीन-चार दिन इलाज करने के बाद डॉक्टरों ने कहा कि बच्चा महिला के पेट में ही मर गया है, जिसकी वजह से ऑपरेशन करना पड़ेगा।

डॉक्टरों ने इलाज शुरू करने के लिए परिवार से साढ़े तीन लाख रुपए जमा कराने को कहा था। मृतक के परिजनों ने डॉक्टर से विनती की थी, कि जब तक वो पैसों का इंतजाम करें उनकी बेटी का इलाज शुरू कर दें। लेकिन अस्पताल ने पैसे जमा होने तक उसका ऑपरेशन नहीं किया। जिसकी वजह से श्वेता के पेट में इंफेक्शन हो गया और उसकी मौत हो गई।

परिवार के सदस्यों ने बताया कि जब तक पैसे जमा कराते रहे तब तक वो बेटी को जिंदा बताते रहे। जिस दिन पैसे देने से इनकार कर दिया उसी दिन उसे मृत घोषित कर दिया। पिता ने कहा कि 1 दिन में 116 इंजेक्शन उनकी बेटी को लगाए गए हैं। साढ़े आठ लाख रुपए की दवाइयां दी गई हैं। इसके अलावा डिलीवरी का चार्ज 35,000 रुपए जबकि 18 यूनिट खून उन्होंने खुद दिया था लेकिन उसका चार्ज भी अस्पताल वालों ने 1,80,000 रुपए के करीब लगाया है। जिसके बाद पीड़ित परिवार ने अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी



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