अस्सी’ एक फिल्म नहीं9 बल्कि एक विचार : गौरव सोलंकी

punjabkesari.in Tuesday, Jan 27, 2026 - 08:30 PM (IST)

गुड़गांव, ब्यूरो : 20 फरवरी को रिलीज़ होने जा रही फिल्म “अस्सी” को लेकर दर्शकों और इंडस्ट्री में खासा उत्सुकता बनी हुई है। अब तक फिल्म की पहचान केवल इसके नाम के ज़रिए ही कराई गई थी, बिना कलाकारों, निर्देशक या निर्माता की किसी जानकारी के। फिल्म का ट्रेलर Border 2 के साथ सिनेमाघरों में रिलीज़ किया गया है। इस फिल्म को लेकर पंजाब केसरी ने ‘अस्सी’ के लेखक गौरव सोलंकी से विशेष बातचीत की। इस बातचीत में गौरव ने फिल्म की सोच, उसके सामाजिक संदर्भ और आने वाले समय में सिनेमा की दिशा को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।

 

फिल्म की कहानी किस तरह की है?

गौरव सोलंकी ने कहा यह एक कोर्टरूम ड्रामा है, लेकिन सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं है। यह एक इन्वेस्टिगेटिव थ्रिलर भी है, हमारे आसपास की कुछ सच्चाइयाँ हैं। एक असॉल्ट के बाद की कहानी है। जो हमारे आसपास हो रहा है, हम सब उससे परेशान होते हैं। यह उसकी कहानी है। 

 

कहीं सुना कि यह फिल्म खत्म होने के बाद शुरू होती है—इसका क्या मतलब है?

गौरव सोलंकी ने कहा यह किसी साथी ने हाल ही में फ़िल्म देखकर कहा था। उन्होंने कहा कि अक्सर फिल्में क्लाइमेक्स पर खत्म हो जाती हैं, लेकिन अस्सी बाहर निकलकर हमारे साथ चलती रही। 

 

क्या यह फिल्म खास तौर पर युवाओं के लिए है?

गौरव सोलंकी ने कहा  यह सभी के लिए है, लेकिन मुझे ख़ुशी होगी अगर नई पीढ़ी, Gen Z तक यह फ़िल्म पहुँचे। आप फ़िल्म देखेंगे तो शायद मैं अपनी बात बेहतर समझा पाऊँगा। जो दुनिया हमने बनाई है, क्या वे आगे इसी को लेकर जाना चाहते हैं, अपनी एक परत में यह उस सवाल की कहानी भी है। 

 

:छोटे शहरों के कंटेंट क्रिएटर्स को आप किस नज़र से देखते हैं?

गौरव सोलंकी ने कहा बहुत प्रतिभाशाली लोग अपने सीमित संसाधनों से बहुत अच्छा कांटेंट बना रहे हैं। आने वाला समय उनका है। वे अपनी ज़मीनी, मौलिक कहानियाँ और किरदार और जिंदगियाँ लेकर आएँ, अपनी ईमानदारी लेकर आएँ तो वे सब भविष्य के लेखक और कलाकार हैं। हिंदी फ़िल्मों को ऐसी मौलिक और ईमानदार आवाज़ों की बहुत ज़रूरत है, ऐसा मुझे लगता है। 

 

राजस्थान के एक छोटे से शहर से यहां तक पहुंचने का आपका सफर कैसा रहा?

गौरव सोलंकी ने कहा यह सफर आसान तो नहीं रहा। छोटे क़स्बे से निकलकर मुंबई जैसे शहर में आना, उसमें अपना कोना तलाशना, अपना काम लोगों तक पहुँचाना वक्त लेता है। शुरुआत में सालों तक सबसे बड़ा संघर्ष यही होता है कि आप जो लिखते हैं, वह बने। जब मैं यहां आया था, यही सोचकर आया था कि मुझे सिर्फ फिल्में लिखनी हैं। रास्ते में संघर्ष भी रहा, आर्थिक चुनौतियां भी रहीं, लेकिन यह स्पष्टता थी कि यही करना है। बहुत धैर्य रखना होता है, लगे रहना होता है। इम्तिहान लेता रहता है, यही इस शहर की कहानी है। 

 

 क्या ‘अस्सी’ कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा की दिशा में एक संकेत है?

गौरव सोलंकी ने कहा  दिल से एक कहानी कहने की कोशिश है। हमारे आसपास जो लोग रहते हैं, उनकी कहानी। या जिनके बारे में हम सुनते हैं लेकिन जानते नहीं, उनकी कहानी। ठीक से नहीं पता, पर शायद इसी को कांटेंट ड्रिवेन सिनेमा कहते होंगे। 

 

दर्शकों को इस फिल्म से क्या उम्मीद रखनी चाहिए?

गौरव सोलंकी ने कहा  एक ईमानदार फ़िल्म की उम्मीद दर्शक रख सकते हैं। हमें यह फ़िल्म लिखना बनाना बेहद ज़रूरी लगा। हम सबके आसपास की, हमारी चिंताओं की, हमारे आक्रोश से निकली कहानी है। अगर आपको अपना घर, मोहल्ला, अपने आसपास के लोग, अपना डर और ग़ुस्सा इस फ़िल्म में दिखेगा, तो हमें अच्छा लगेगा।


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Content Editor

Gaurav Tiwari

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