अल्ट्रा प्ले पर ''शक्ति सामंता @100'' जश्न जनवरी में
punjabkesari.in Wednesday, Jan 14, 2026 - 07:17 PM (IST)
गुड़गांव ब्यूरो : कुछ तो लोग कहेंगे. यह एक ऐसी पंक्ति है जो पीढ़ियों के साथ भी पुरानी नहीं हुई। 'अमर प्रेम' का यह प्रतिष्ठित गीत आज भी उतनी ही गहराई से दिलों को छूता है, जितना पांच दशक पहले करता था। यह गीत न केवल भावनाओं की सच्चाई को बयां करता है, बल्कि शक्ति सामंता के निर्देशन की संगीतात्मक संवेदना और सिनेमाई दृष्टि को भी दर्शाता है। 13 जनवरी को मनाई जा रही उनकी 100वीं जयंती के उपलक्ष्य में, 'अल्ट्रा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट ग्रुप' के हिंदी ओटीटी प्लेटफॉर्म अल्ट्रा प्ले ने ‘शक्ति सामंता@100: सदाबहार सिनेमा का भव्य उत्सव’ की घोषणा की है। यह एक महीने चलने वाला विशेष फिल्म फेस्टिवल होगा, जिसमें जनवरी भर उनकी चुनिंदा क्लासिक फिल्में स्ट्रीम की जाएंगी। उनकी फिल्मोग्राफी से चुनी गई कुछ प्रतिष्ठित फिल्मों को डिजिटल रूप से सावधानीपूर्वक रिस्टोर किया गया है, जो अब अल्ट्रा प्ले पर देखने के लिए तैयार हैं।
इस महीने भर चलने वाले फेस्टिवल में अल्ट्रा की लाइब्रेरी से शक्ति सामंता की सबसे लोकप्रिय फिल्मों को चुना गया है। इनमें 'आराधना', 'अमर प्रेम', 'कटी पतंग', 'एन ईवनिंग इन पेरिस', 'हावड़ा ब्रिज', 'अजनबी', 'अनुराग', 'अमानुष', 'बालिका बधू', 'चाइना टाउन', 'आर पार', 'कश्मीर की कली', 'बरसात की एक रात', 'पाले खान', 'जाने अंजाने', 'गीतांजलि', 'आनंद आश्रम', 'आंखों में तुम हो', 'आवाज़', 'ख्वाब', 'अहंकार' और 'डॉन मुथु स्वामी' शामिल हैं। इनमें से कई फिल्मों को डिजिटल रूप से रिस्टोअर कर उनकी तस्वीर और ध्वनि गुणवत्ता बेहतर बनाई गई है।
शक्ति सामंता का सिनेमा आज भी उतना ही असरदार है, क्योंकि उन्होंने सिर्फ कहानियां नहीं रचीं, बल्कि ऐसे लम्हे गढ़े जो आज भी लोगों की यादों और बातचीत में ज़िंदा हैं। 'अमर प्रेम' का संवाद "पुष्पा, आय हेट टीयर्स" आज भी हर पीढ़ी को याद है। 'आराधना' ने राजेश खन्ना को हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार बना दिया, जबकि 'कटी पतंग' का संगीत आज भी नई पीढ़ियां खोजकर सुनती हैं। 'एन ईवनिंग इन पेरिस' ने विदेश में शूटिंग और ग्लैमर का नया मानदंड स्थापित किया। 'हावड़ा ब्रिज' ने रहस्य और संगीत को जोड़ते हुए नई कहानी शैली गढ़ी, और 'कश्मीर की कली' ने कश्मीर को लोकप्रिय फिल्म शूटिंग स्थल बना दिया। ये फिल्में अपने दौर की धड़कन थीं और आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में गूंज रही हैं।
शताब्दी समारोह पर बोलते हुए अल्ट्रा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट ग्रुप के सीईओ सुशीलकुमार अग्रवाल ने कहा, “शक्ति सामंता का सिनेमा भावना, संगीत और मानवीय जुड़ाव के दुर्लभ संतुलन का प्रतीक रहा है। ‘अमर प्रेम’, ‘आराधना’ और ‘कटी पतंग’ जैसी उनकी फिल्में आज भी उतनी ही असरदार हैं क्योंकि उनकी कहानियां और गीत कालातीत हैं। यह फिल्म फेस्टिवल अल्ट्रा की ओर से उस फिल्मकार को एक सम्मान है, जिसकी रचनाएं आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी दर्शकों को प्रेरित करती हैं। “आज नॉस्टॅल्जिया केवल अतीत को देखने भर का नाम नहीं है, बल्कि उसकी वर्तमान पीढ़ी से प्रासंगिकता ही उसकी असली पहचान है। जब क्लासिक फिल्में आज के युवा दर्शकों के साथ भी जुड़ाव बनाती हैं, तो यह अल्ट्रा के इस विश्वास को और मज़बूत करता है कि अच्छी कहानियां कभी पुरानी नहीं होतीं।” “अल्ट्रा प्ले का उद्देश्य इन फिल्मों को संजो कर, उनकी मूल आत्मा के साथ न्याय करते हुए, उन्हें आज के दर्शकों के लिए एक नए और संवेदनशील रूप में पेश करना है।”