पशुपति से तिरूपति तक लाल गलियारा बनाने का नक्सली सपना टूटा : राजेश कटियार
punjabkesari.in Sunday, Apr 19, 2026 - 02:03 PM (IST)
गुड़गांव ब्यूरो : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के लौह संकल्प ने वामपंथी विचारधारा से पोषित नक्सलियों-माओवादियों के सपनों के ताबूत में आख़िरी कील ठोंक दी है। यह कहना है वरिष्ठ टिप्पणीकार राजेश कटियार का। उन्होने कहा कि कांग्रेस को अपनी ढाल बनाकर वामपंथी विचारधारा से ऑक्सीजन लेने वाले नक्सलियों-माओवादियों ने एक वक्त भारत को खंड-खंड करके पशुपति से तिरूपति तक लाल गलियारा बनाने का ऐलान कर देश के एक तिहाई जिलों को अपने शिकंजे में जकड़ कर रखा था। लेकिन माननीय गृहमंत्री जी ने उस शिकंजे को चकनाचूर कर दिया है। नक्सलियों की तरह अर्बन नक्सलियों के भी इलाज की जरूरत है ताकि यह समस्या लाइलाज न हो जाए।
वामपंथी बहुरूपिये एक तरफ चुनाव के ज़रिए लोकतंत्र में भरोसे का दिखावा करते हुए चुनाव लड़ते थे, वहीं उनका दूसरा चेहरा हिंसा के ज़रिए भारत को खंड-खंड कर तोड़ना चाहता था। लेकिन दुख की बात यह कि कांग्रेस की ऐसे विध्वंसक तत्वों से हमेशा हमदर्दी बनी रही। नक्सलियों के खिलाफ किसी भी सख़्त कार्रवाई के वक़्त सबसे ज़्यादा दर्द कांग्रेस, ख़ासकर गांधी परिवार के पेट में होता था। यह दर्द इस परिवार के सदस्यों के चेहरों पर साफ़ पढ़ा जा सकता है। कांग्रेस नक्सलियों पर अंकुश लगाने के राज्य सरकारों के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के बजाय उन कदमों को हतोत्साहित करने का पाप करती थी। छत्तीसगढ़ में सलवा-जुडूम आंदोलन इसकी मिसाल है। यूपीए के कार्यकाल में ऐसे विध्वंसक तत्वों का मनोबल काफी बढ़ गया था, जिसे मोदी सरकार ने कुचल कर रख दिया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास नई रफ़्तार पकड़ रहा है। भारत की अखंडता के लिए धारा-370 को रद्द करने का मामला हो या फिर नक्सलवाद के ताबूत में आख़िरी कील ठोंकने की बात हो, मोदी सरकार हमेशा सख़्त रही है। देश के भौगोलिक-आर्थिक-सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर मोदी सरकार ने एक से बढ़कर एक ऐसे कदम उठाए हैं, जिनकी मंजिल विकसित भारत है।
नक्सलमुक्त भारत को पूर्ण करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री की जो ऐतिहासिक पहल रही है वह काफी सराहनीय रही है। एक सुनियोजित तरीके से उन्होंने नक्सलवाद को खत्म करने के लिए कई विषयों पर काम किया। उदाहरण के तौर पर नक्सल ऑपरेशन के लिए डीआरजी के पास हथियार नहीं थे जैसे ही केंद्रीय गृह मंत्री को पता चला उन्होंने 20 दिनों में हथियार उपलब्ध करा दिए। दूसरी तरफ नियाद नेल्लार योजना के अंतर्गत इतना सराहनीय कार्य हुआ कि पहले गॉव के लोग सिक्यूरिटी कैंप का विरोध करते थे, वो लोग क्षेत्र में विकास का काम देखकर सिक्यूरिटी कैंप की मांग करने लगे, जिसके कारण नक्सल के गढ़ तक कैंप बनाने में सरकार सफल रही है। आशय साफ था कि नक्सलवाद को खत्म करने के लिए हर कदम पर कार्य किए गए। नक्सल के इकोसिस्टम को खत्म करने के लिए क्या—क्या उपाय किए जा सकते थे वह सारा कार्य किया गया। मानवीय इंटेलिजेंस से लेकर तकनीकी इंटेलिजेंस को मिलाकर परफेक्ट ऑपरेशन्स किये गए। जिसका परिणाम यह हुआ कि जो लोग पशुपति से तिरूपति तक लाल गलियारा बनाने का सपना देख रहे थे वह सपना अब टूट गया।