बेटियां बनेंगी आत्मनिर्भर: हर तीसरा राशन डिपो अब महिलाओं के नाम, एसिड अटैक पीड़ितों और विधवाओं को प्राथमिकता

punjabkesari.in Friday, May 15, 2026 - 08:00 PM (IST)

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी ): आखिरकार अपनी घोषणा के मुताबिक सूबे की नायब सैनी सरकार जल्द ही चार हजार नए राशन डिपो अलाट करने की तैयारी में है, जिसमें से 33 फीसदी महिलाओं को अलॉट होंगे। अहम बात यह है कि इससे जहां महिलाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा वहीं वे आत्मनिर्भरता का अवसर भी प्राप्त करेंगी।  खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री मंत्री राजेश नागर ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने गैस सिलेंडर ब्लैक  (कालाबाजारी) होने की खबरों का खंडन भी किया है, साथ ही कहा कि इस तरह की अफवाह विपक्ष की ओर से फैलाई जा रही हैं, इस  प्रकार के काम में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। 

 मंत्री ने मंगलवार को  बताया कि सूबे में जल्द 4 हजार नए राशन डिपो अलॉट करने का प्रस्ताव है। इस प्रक्रिया को तेजी के साथ में आगे बढ़ाया जा रहा है। डिपुओं से 33 फीसदी आरक्षण के तहत महिलाओं को उनके  हिस्से के डिपो अलाट करने की तैयारी है। जिससे महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का बड़ा अवसर मिलेगा। नायब सिंह सैनी सरकार ने राशन डिपो (उचित मूल्य की दुकानों) के लाइसेंस आवंटन में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इस निर्णय का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। 

हर ब्लॉक में उचित मूल्य की दुकानों के लाइसेंस के लिए रोस्टर प्रणाली के तहत हर तीसरी रिक्ति महिलाओं के लिए आरक्षित होगी। लाइसेंस आवंटन में एसिड अटैक पीड़ितों, महिला स्वयं सहायता समूहों विधवाओं, और एकल माताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। महिला आवेदक का कम से कम 12वीं पास होना और उसे कंप्यूटर का बुनियादी ज्ञान होना अनिवार्य है। आयु 21 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदक संबंधित क्षेत्र (गांव या वार्ड) का निवासी हो और परिवार पहचान पत्र आवश्यक है।

अब नए राशन डिपो के लाइसेंस 300 के बजाय 500 राशन कार्डों पर दिए जाएंगे और अच्छा प्रदर्शन करने वाले डिपो संचालकों को 65 वर्ष की आयु तक काम करने का मौका। लाइसेंस को 5 साल तक बढ़ाया जा सकेगा।  सरकारी कर्मचारी, मौजूदा लाइसेंस धारकों के निकट संबंधी और स्थानीय निकायों के चुने हुए प्रतिनिधि लाइसेंस के लिए पात्र नहीं होंगे।

यहां पर बता दें कि मंत्रिमंडल की बैठक में राशन डिपुओं के आवंटन में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया गया था। डिपो अलाट करने में एसिड अटैक पीड़ितों, महिला स्वयं सहायता समूहों और विधवा महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया और 33 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दी गई थी। ये ‘हरियाणा लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (लाइसेंसिंग एवं नियंत्रण) संशोधन आदेश, 2026’ को मंजूरी दी गई है, जो 2022 के पुराने नियमों में बदलाव करेगा। 


नए नियमों में यह भी कहा गया है कि अगर कोई लाइसेंस धारक बाद में सरकारी नौकरी में आता है या चुनाव जीतता है, तो उसे अपना लाइसेंस छोड़ना होगा, नहीं तो उसे रद्द कर दिया जाएगा। महिलाओं को 33% आरक्षण ‘रोस्टर सिस्टम’ के आधार पर दिया जाएगा, यानी हर तीसरा लाइसेंस महिला को मिलेगा। इस आरक्षण में एसिड अटैक पीड़ित, स्वयं सहायता समूह, विधवा, तलाकशुदा और एकल माताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। ऑनलाइन SARAL पोर्टल के जरिए आवेदन लिए जाएंगे , ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग आवेदन कर सकें और पारदर्शिता बनी रहे। इसके अलावा, अगर किसी को लाइसेंस से जुड़े फैसले पर आपत्ति होती है, तो वह 30 दिन के अंदर मंडलायुक्त के पास अपील कर सकता है। 
 


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Content Writer

Isha

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