हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 5314 पद खाली, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी में हालात सबसे गंभीर
punjabkesari.in Friday, Aug 28, 2026 - 12:03 PM (IST)
चंडीगढ़ (चंद्र शेखर धरणी) : हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी ने प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जून 2026 तक राज्य के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल 5314 पद रिक्त हैं। इनमें 2572 डॉक्टरों तथा 2742 पैरामेडिकल स्टाफ के पद शामिल हैं। विधानसभा में चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री आरती सिंह राव द्वारा दी गई जानकारी से यह स्थिति सामने आई है।
यह जानकारी नूंह के विधायक आफताब अहमद द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दी गई। विधायक ने अप्रैल 2024 से जून 2026 तक प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल अमले के रिक्त पदों का जिलावार ब्यौरा मांगा था। सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों ने मेडिकल कॉलेजों में मानव संसाधन की कमी की गंभीर तस्वीर सामने रखी है।
जींद, महेंद्रगढ़ में हालात गंभीर
जींद और महेंद्रगढ़ में सबसे गंभीर स्थिति जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो जींद मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के 559 स्वीकृत पदों में से महज चार पद भरे हुए हैं, जबकि 555 पद रिक्त हैं। इसी तरह पैरामेडिकल स्टाफ के 623 पदों में से 617 पद खाली हैं। महेंद्रगढ़ में भी स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां डॉक्टरों के 559 पदों में से 492 पद रिक्त हैं, जबकि पैरामेडिकल स्टाफ के सभी 744 पद खाली हैं। इससे साफ है कि नए और विकसित हो रहे मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
भिवानी में भी डॉक्टरों के 477 पद खाली
भिवानी के सरकारी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के 552 स्वीकृत पदों में से 477 पद रिक्त हैं। पैरामेडिकल स्टाफ के 325 पदों में से 325 पद खाली हैं। इस तरह यहां भी चिकित्सकीय और सहायक चिकित्सा सेवाओं के लिए कर्मचारियों की भारी कमी बनी हुई है।
वहीं करनाल में डॉक्टरों के 367 में से 200 और पैरामेडिकल स्टाफ के 400 में से 181 पद रिक्त हैं। सोनीपत में 408 चिकित्सक पदों में से 213 तथा पैरामेडिकल स्टाफ के 276 में से 132 पद खाली हैं। फरीदाबाद में डॉक्टरों के 184 स्वीकृत पदों में से 97 और पैरामेडिकल स्टाफ के 388 में से 242 पद रिक्त हैं। नूंह में चिकित्सकों के 362 पदों में से 197 तथा पैरामेडिकल स्टाफ के 557 में से 104 पद खाली हैं।
पीजीआईएमएस रोहतक में भी सैकड़ों पद रिक्त
प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान पंडित बी.डी. शर्मा पीजीआईएमएस, रोहतक में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। यहां डॉक्टरों के 852 स्वीकृत पदों में से 341 पद खाली हैं। पैरामेडिकल स्टाफ के 1967 पदों में से 397 पद रिक्त हैं। रोहतक जैसे प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा एवं शोध संस्थान में भी इतनी संख्या में पद खाली होना स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित दबाव को दर्शाता है। हालांकि अन्य नए मेडिकल कॉलेजों की तुलना में यहां स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई देती है।
नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट की कमी
नल्हड़ स्थित शहीद हसन खान मेवाती राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में रेडियोलॉजिस्ट की कमी का मामला भी विधानसभा में सामने आया। सरकार ने स्वीकार किया कि संस्थान में रेडियोलॉजिस्ट की कमी है। डायग्नोस्टिक सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए पीपीपी मॉडल के माध्यम से सीटी स्कैन और एमआरआई सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सरकार ने रेडियोलॉजिस्ट समेत रिक्त फैकल्टी पदों पर नियमित भर्ती जल्द शुरू करने की बात कही है। इसके अलावा कार्डियोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और न्यूरोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में फैकल्टी के नए पद सृजित करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन बताया गया है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों को आकर्षित करने की तैयारी
सरकार के सामने केवल रिक्त पद भरने की चुनौती नहीं है, बल्कि विशेषज्ञ चिकित्सकों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आकर्षित करना और लंबे समय तक बनाए रखना भी अहम मुद्दा है। इसी को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों के वेतन में वृद्धि के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और ऑन्कोलॉजी जैसे सुपर-स्पेशियलिटी विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सीधे तौर पर मरीजों को मिलने वाली उन्नत चिकित्सा सुविधाओं से जुड़ी है।
एचएसएससी को भेजी गई रिक्तियों की मांग
सरकार ने विधानसभा में बताया कि राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में ग्रुप-सी के रिक्त पदों को भरने के लिए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) को मांग भेजी जा चुकी है। सरकार के अनुसार यह मांग 21 और 28 जनवरी को भेजी गई थी। अब सबसे बड़ी चुनौती इन रिक्तियों को प्रक्रिया के तहत जल्द भरने की है। 5314 रिक्त पदों का आंकड़ा केवल प्रशासनिक कमी नहीं, बल्कि सरकारी चिकित्सा संस्थानों की कार्यक्षमता और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं से सीधे जुड़ा विषय है। ऐसे में आगामी समय में डॉक्टरों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती पर सरकार की सक्रियता स्वास्थ्य क्षेत्र की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।