590 करोड़ बैंक घोटाला: सी.बी.आई. की प्राथमिक जांच में 5 आई.ए.एस. की भूमिका संदिग्ध!

punjabkesari.in Saturday, May 09, 2026 - 02:53 PM (IST)

चड़ीगढ़ : हरियाणा के चर्चित 590 करोड़ के आई.डी.एफ.सी. बैंक और ए. यू. स्मॉल फाइनैंस बैंक घोटाले में सी.बी. आई. को प्राथमिक जांच में 5 आई.ए.एस. अफसरों की भूमिका संदिग्ध मिली है। सूत्रों की मानें तो रिमांड पर लिए गए बैंक अफसरों व लेखा अधिकारियों ने उक्त आई.ए.एस. अफसरों के बारे में कई अहम सबूत दिए हैं। 

यही नहीं बैंक मैनेजर की एक ऑडियो रिकार्डिंग में भी कई अफसरों का नाम सामने आया है। प्राथमिक जांच के आधार पर ही सी.बी. आई. ने इस मामले में 5 आई.ए.एस. अधिकारियों से पूछताछ के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत सरकार से अनुमति मांगी है। सूत्रों के अनुसार अनुमति से जुड़ी फाइल उच्चाधिकारियों के पास पहुंच चुकी है और जल्द ही सरकार इस पर फैसला ले सकती है।

सरकार में इस मामले को लेकर काफी हलचल है, क्योंकि अब तक की कार्रवाई मुख्य रूप से वित्तीय और विभागीय अधिकारियों तक सीमित थी, लेकिन सी.बी.आई. की ओर से वरिष्ठ आई.ए. एस. अधिकारियों के खिलाफ पूछताछ की अनुमति मांगना जांच को नई दिशा देता माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि सरकार के लिए अनुमति रोकना मुश्किल है क्योंकि सरकार ने ही खुद पूरे मामले की जांच सी.बी.आई. को सौंपी थी।

इसलिए मांगी गई 17-ए की अनुमति

सी.बी.आई. सूत्रों के अनुसार अब तक गिरफ्तार और पूछताछ में शामिल आरोपियों से मिले बयानों में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसी को ऐसे दस्तावेज और फाइल मूवमैंट भी मिले हैं, जिनमें कथित रूप से नियमों से हटकर फैसले लेने या आपत्तियों को नजरअंदाज करने के संकेत मिले हैं। कुछ अधिकारियों की भूमिका सीधे वित्तीय मंजूरियों, भुगतान प्रक्रियाओं और बैंक खातों के संचालन से जुड़ी फाइलों में जांच के दायरे में आई है। इसी आधार पर आई.ए.एस. अफसरों से पूछताछ करना चाहती है। जांच में कुछ ऐसी कथित ऑडियो और डिजिटल रिकॉर्डिंग भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिनमें आरोपियों और अधिकारियों के बीच बातचीत होने का दावा है। सूत्रों के मुताबिक, इन रिकॉर्डिंग्स में फंड ट्रांसफर, बैंक खातों के संचालन और कार्रवाई से बचने जैसे विषयों पर चर्चा होने के संकेत मिले हैं। इन रिकॉर्डिंग्स की फॉरेंसिक जांच करवा रही है और इन्हें पूछताछ के दौरान क्रास-वैरिफाई करना चाहती है। धारा 17-ए के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ उसके आधिकारिक निर्णयों से जुड़े मामलों में जांच या पूछताछ के लिए सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी होती है।

2 को सस्पेंड कर कई आई.ए.एस. को साइड लाइन कर चुकी सरकार 

आरोप है कि सरकारी धन को नियमों के विपरीत निजी बैंकों आई.डी.एफ.सी. बैंक और ए.यू. स्मॉल फाइनेंस बैंक में जमा करवाया गया, जहां से बाद में फर्जीवाड़े और संदिग्ध लेन-देन के जरिए करोड़ों रुपए के नुकसान की आशंका बनी। जांच में सामने आया कि वित्तीय प्रक्रियाओं में कई स्तरों पर नियमों की अनदेखी हुई। इस मामले में अब तक कई अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। सरकार पहले ही 3 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर चुकी है। गत दिनों हरियाणा सरकार ने 2 आई.ए. एस. अफसरों को सस्पैंड करने के साथ ही कई आई.ए.एस. अफसरों को मुख्य पोस्टिंग से किनारे कर दिया था। इनमें डा. साकेत कुमार मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव पद से हटाए गए थे। उनसे विकास एवं पंचायत विभाग, सहकारिता विभाग के कमिश्नर और एच.पी.जी.सी.एल. के एम.डी. का अतिरिक्त कार्यभार भी वापस लिया गया।

वहीं आई.ए.एस. पंकज अग्रवाल को सिंचाई एवं खनन विभाग के प्रधान सचिव पद से हटाकर आर्किटेक्चर विभाग में लगाया गया। वरिष्ठ आई.ए.एस. विनीत गर्ग को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चेयरमैन पद से हटाकर प्रिंटिंग एवं स्टेशनरी विभाग का ए.सी.एस. बनाया गया। डी.के. बेहरा को राज्यपाल के सचिव और श्रम आयुक्त पद से हटाकर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में सचिव लगाया गया। उन्हें भी अहम प्रशासनिक भूमिका से बाहर माना जा रहा है जबकि आई.ए.एस. अधिकारियों आर. के. सिंह और प्रदीप डागर को सस्पैंड किया गया था।


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Content Writer

Manisha rana

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