हरियाणा का एक ‘No Network’ गांव; कॉल करने के लिए 4 KM दूर जाने को मजबूर लोग...850 ग्रामीणों की डिजिटल जिंदगी ठप

punjabkesari.in Friday, Sep 04, 2026 - 01:07 PM (IST)

यमुनानगर (परवेज खान) : हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा नवाजपुर गांव…लेकिन डिजिटल दौर में भी मोबाइल नेटवर्क से पूरी तरह कटा हुआ। करीब 850 की आबादी वाले इस गांव में किसी भी कंपनी का मोबाइल नेटवर्क नहीं है।

हालात ऐसे हैं कि कॉल करने या रिसीव करने के लिए ग्रामीणों को 3 से 4 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। ऑनलाइन पेमेंट करना हो तो दूसरे गांव का रुख करना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई पर भी नेटवर्क की मार पड़ रही है। व्हाट्सऐप पर आने वाला होमवर्क घर बैठे करना मुश्किल है। पंचायत कई बार अधिकारियों और नेताओं के सामने मुद्दा उठा चुकी है, लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ।

ये तस्वीरें उस गांव की हैं, जहां आज भी मोबाइल नेटवर्क पहुंचने का इंतजार खत्म नहीं हुआ। डिजिटल इंडिया के दौर में जहां मोबाइल फोन जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है, वहीं यमुनानगर का नवाजपुर गांव मोबाइल नेटवर्क के लिए तरस रहा है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा नवाजपुर गांव… करीब 850 की आबादी… लेकिन पूरे गांव में किसी भी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क नहीं। 

किसी को जरूरी फोन करना हो या किसी की कॉल रिसीव करनी है ग्रामीणों को गांव से करीब 3 से 4 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। यानी एक फोन कॉल के लिए भी सफर तय करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी परेशानी सिर्फ फोन कॉल की नहीं है। डिजिटल पेमेंट ने जहां शहरों और गांवों में लेन-देन को आसान बनाया है, वहीं नवाजपुर में नेटवर्क नहीं होने के कारण ऑनलाइन भुगतान भी बड़ी मुसीबत बन चुका है।

 ग्रामीणों को डिजिटल पेमेंट करने के लिए दूसरे गांव में जाना पड़ता है। सोचिये जिस गांव में मोबाइल नेटवर्क ही नहीं, वहां ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल सुविधाओं का फायदा आखिर कैसे पहुंचेगा? आज स्कूल का होमवर्क व्हाट्सऐप ग्रुप पर आता है… पढ़ाई से जुड़ी जानकारी मोबाइल पर मिलती है… लेकिन नवाजपुर के बच्चों के लिए घर बैठे ये सब करना मुश्किल है। 

एक छात्रा का कहना है कि घर पर पढ़ाई नहीं कर सकते। और जब पढ़ाई के लिए गांव से बाहर आते हैं तो मां-बाप से संपर्क भी टूट जाता है। मोबाइल नेटवर्क का कोई भरोसा नहीं इसलिए ग्रामीणों ने अपने स्तर पर विकल्प तलाशने की कोशिश की है। पूरे गांव में वाई-फाई लगाए गए हैं। 

नेटवर्क के विकल्प के तौर पर लैंडलाइन फोन भी लगाए गए हैं। लेकिन सवाल ये है कि आखिर कब तक गांव के लोग वैकल्पिक इंतजामों के सहारे रहेंगे? ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच के साथ मिलकर वे कई बार अधिकारियों और नेताओं के सामने ये समस्या उठा चुके हैं।

पंचायत की तरफ से यहां तक कहा गया है कि मोबाइल टावर लगाने के लिए सरकारी या निजी जमीन उपलब्ध कराने को भी वे तैयार हैं। छछरौली SDM जसपाल गिल ने बताया कि यह मामला अभी मेरे संज्ञान में आया है और संबंधित कंपनी से बात कर इस समस्या का समाधान कराया जाएगा।

 850 लोगों की आबादी वाला ये गांव सिर्फ मोबाइल नेटवर्क नहीं…बल्कि डिजिटल सुविधाओं से जुड़ने का अपना हक मांग रहा है। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की इस डिजिटल पुकार पर प्रशासन और मोबाइल कंपनियां कब तक कार्रवाई करती हैं।  

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Content Editor

Krishan Rana

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