45 महीने बाद हाईकोर्ट से पूर्व नौकरानी पूनम बरी,मोबाइल कॉल डिटेल से साजिश साबित नहीं कर सकी पुलिस...जानिए क्या है मामला
punjabkesari.in Friday, Oct 30, 2026 - 01:46 PM (IST)
कुरुक्षेत्र (कपिल शर्मा): चर्चित डॉ. विनिता अरोड़ा हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व नौकरानी पूनम को बरी कर दिया है। करीब 45 महीने जेल में बिताने के बाद पूनम को अदालत से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ पेश किए गए साक्ष्यों को दोष साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना। वहीं, मामले के चार अन्य दोषियों की फांसी की सजा को बिना छूट के 30-30 साल के कारावास में बदल दिया गया है।
मामले के अनुसार, 9 जनवरी 2023 की रात डॉ. विनिता अरोड़ा की उनके घर में लूटपाट के दौरान हत्या कर दी गई थी। वारदात के समय उनके पति डॉ. अतुल अरोड़ा भी घर पर मौजूद थे। आरोपी घर से नकदी और गहने लेकर फरार हो गए थे। पुलिस ने जांच के बाद पूर्व नौकरानी पूनम सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने पूनम और आरोपी विक्रम उर्फ विक्की के बीच संपर्क होने का दावा करते हुए मोबाइल कॉल डिटेल को अहम साक्ष्य बताया था। आरोप था कि पूनम ने विक्की को घर में नकदी और गहने रखे होने की जानकारी दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया कि जिस मोबाइल नंबर को पूनम का बताया जा रहा था, वह उसके जीजा जसबीर सिंह के नाम पर पंजीकृत था। जसबीर सिंह ने अदालत में स्पष्ट किया कि उसने सिम कार्ड पूनम को नहीं दिया था। पुलिस यह भी साबित नहीं कर सकी कि संबंधित नंबर का इस्तेमाल पूनम ही करती थी या वारदात के आसपास उसकी अन्य आरोपियों से बातचीत हुई थी।
साजिश में शामिल होने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले
हाईकोर्ट ने माना कि पूनम का आरोपियों से परिचित होना या उनके घर में काम करना मात्र उसे साजिश में शामिल साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उसके पास से लूट का कोई सामान बरामद नहीं हुआ और न ही उसकी निशानदेही पर कोई बरामदगी हुई। अदालत ने कहा कि केवल संदेह और पुलिस हिरासत में दर्ज कथित स्वीकारोक्ति के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इन्हीं तथ्यों के आधार पर पूनम को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
चार दोषियों को बिना छूट 30 साल की कैद
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शेष चार दोषियों सुनील कुमार, मनीष कुमार, विक्रमजीत उर्फ बिट्टू और विक्रम उर्फ विक्की की मृत्युदंड की सजा को न्यूनतम 30 साल के कारावास में बदल दिया है। उन्हें यह सजा बिना किसी छूट के भुगतनी होगी। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए सख्त सजा को जरूरी माना, हालांकि दोषियों के सुधार की संभावना को भी ध्यान में रखा। पूनम के बरी होने के बाद दोषियों की संख्या पांच से कम रह गई, जिसके चलते डकैती की धारा के तहत सजा में भी तदनुसार बदलाव किया गया।