हरियाणा: विधानसभा सत्र में पंचायती राज का संशोधक बिल पास, महिलाओं के लिए ऐतिहासिक फैसला

punjabkesari.in Friday, Nov 06, 2020 - 10:37 PM (IST)

चंडीगढ़ (धरणी): हरियाणा की महिलाओं के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा है। शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा में एक ऐसी नजीर लिखी गई, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। विधानसभा पटल पर हरियाणा के पंचायती राज एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव लाया गया जिसे माननीय सदस्यों ने पास कर दिया। अब हरियाणा में पंचायती चुनाव में महिलाओं की 50 फीसदी हिस्सेदारी रहेगी। सम-विषम संख्या के आधार पर महिला एवं पुरुष के लिए सीट आरक्षित होंगी। जिस गांव में महिला सरपंच निर्वाचित होगी, अगली योजना में उस गांव में पुरुष सरपंच होगा। 

इस बिल के पास होने पर डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने प्रदेश की महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह बिल प्रदेश की महिलाओं में नए आत्मविश्वास का संचार करेगा और उन्हें सशक्त करेगा। बिल की जानकारी देते हुए उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बताया कि भविष्य में होने वाले पंचायती राज संस्थाओं यानी जिला परिषद, ब्लॉक पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों के चुनावों में यह नियम लागू हो जाएगा। 

उन्होंने बताया कि प्रत्येक गांव को सम-विषम संख्या के आधार पर कोड दिए जाएंगे। पहली बार में सम क्रम वाले गांवों में सरपंच महिला रहेगी और अगली बार विषय क्रम संख्या वाले गांवों में महिला सरपंच बनेगी। इस तरह हर दस वर्ष में से पांच वर्ष हरियाणा के हर गांव में महिला सरपंच होगी। आरक्षित पदों पर भी यह नियम लागू होगा और उनमें भी सम-विषम संख्या के आधार पर पद आरक्षित होंगे। ग्राम पंचायत के पंचों के विषय में भी यही प्रक्रिया रखी जाएगी और 50 फीसदी पंचों के पद महिलाओं के लिए रहेंगे।

डिप्टी सीएम ने बताया कि यह व्यवस्था ग्राम पंचायतों से आगे बढ़कर जिला परिषद और ब्लॉक पंचायत समिति में भी लागू होगी। जिला परिषद और ब्लॉक समिति के सदस्यों और चेयरमैन के पदों के लिए भी ऑड-ईवन का फार्मूला इस्तेमाल किया जाएगा। पंचायती राज एक्ट में इस महत्वपूर्ण बदलाव के बाद हरियाणा के पंचायती राज तंत्र में महिलाओं की 50 फीसदी भागीदारी सुनिश्चित हो जाएगी। इस व्यवस्था के लिए अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित सीटों और अन्य सीटों के लिए अलग-अलग समूह माने जाएंगे और उन समूहों में महिला आरक्षण लागू किया जाएगा।

बीसी-ए वर्ग को पंचायत चुनाव में आठ फीसदी आरक्षण का बिल पास
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बताया कि ग्राम पंचायत के चुनाव में पहली बार बीसीए वर्ग को आठ प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। डिप्टी सीएम ने बताया कि इस नियम के लागू होने से बीसीए वर्ग के लोगों को पंचायती राज संस्थाओं में और अधिक प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। विधानसभा में राज्यमंत्री अनूप धानक, जेजेपी विधायक देवेंद्र बबली व अन्य माननीय सदस्यों ने राइट टू रीकॉल बिल, बीसी-ए वर्ग को पंचायत चुनाव में आठ फीसदी आरक्षण के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का आभार प्रकट किया।

विधानसभा में पास हुआ ‘राइट टू रीकॉल’ बिल
विधानसभा में आज पास हुए ‘राइट टू रीकॉल’ बिल के बारे में डिप्टी सीएम ने बताया कि सरपंच को हटाने के लिए गांव के 33 प्रतिशत मतदाता अविश्वास लिखित में शिकायत संबंधित अधिकारी को देंगे। यह प्रस्ताव खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी तथा सीईओ के पास जाएगा। इसके बाद ग्राम सभा की बैठक बुलाकर 2 घंटे के लिए चर्चा करवाई जाएगी। इस बैठक के तुरंत बाद गुप्त मतदान करवाया जाएगा और अगर 67 प्रतिशत ग्रामीणों ने सरपंच के खिलाफ मतदान किया तो सरपंच पदमुक्त हो जाएगा।

सरपंच चुने जाने के एक साल बाद ही इस नियम के तहत अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकेगा। दुष्यंत चौटाला ने बताया कि अगर अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरपंच के विरोध में निर्धारित दो तिहाई मत नहीं पड़ते हैं तो आने वाले एक साल तक दोबारा अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकेगा। इस तरह ‘राइट टू रीकॉल’ एक साल में सिर्फ एक बार ही लाया जा सकेगा।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Shivam

Related News

Recommended News

static