भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलते हैं अनिल विज के राजनीतिक सितारे

punjabkesari.in Sunday, Jun 06, 2021 - 07:50 PM (IST)

चंडीगढ़ (धरणी): भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से अनिल विज के राजनीतिक सितारे बहुत मिलते हैं। नड्डा के राजनीतिक जीवन को आंकलन करने वाले बताते हैं कि जैसे नड्डा के राजनीतिक जीवन में उतार-चढ़ाव आए वैसे ही विज के आए। हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा कद रखने वाले अनिल विज भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर ही नहीं बल्कि निर्दलीय भी चुनाव जीते हुए हैं। 

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से उनके सितारे बहुत मिलते हैं। प्रदेश में बहुत कम लोग जानते हैं। अनिल विज वह नाम जिसकी चर्चा केवल प्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में होना एक आम बात है। विज एक ऐसे साधारण परिवार से संबंध रखते हैं, जिसका राजनीति से कभी कोई सरोकार हीं नही रहा। उन्होंने 37 साल की उम्र में अपने दम पर राजनीति में पैर रखे। अब 6 बार चुनाव जीत चुके अनिल विज एक धाकड़ नेता बन चुके हैं। वह बैंक की नौकरी को छोड़ पहली बार 27 मई 1990 को अंबाला कैंट उपचुनाव में जीत दर्ज कर विधायक बने। लेकिन राजनीति से पहले भी लोगों की मदद करना, लोगों के दुख दर्द में शामिल होना उनकी आदतों में शुमार था। 

वह एक कर्मचारी होने के बावजूद जनसेवा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहते थे। जो कि आज तक उन्होंने अपनी इस आदत को बरकरार रखा है। कुछ समय पहले कोरोना संक्रमित होने पर वह आईसीयू में भर्ती हुए। लेकिन छुट्टी मिलने के तुरंत बाद समेत ऑक्सीजन सिलेंडर अपने कार्यालय पहुंचे और बहुत से लोगों की समस्याओं का समाधान किया। जिस उपचुनाव से अनिल विज ने अपने राजनीतिक कैरियर का आगाज किया था उस समय प्रदेश में सिरसा की डबवाली विधानसभा क्षेत्र में भी उपचुनाव हुआ था। जहां से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने जनता दल के टिकट पर चुनाव जीता था।

ऐसा नहीं है कि हर बार अनिल विज भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर ही चुनाव जीते हो। बल्कि इतिहास गवाह है कि विज की जनता में बेहद मजबूत पकड़ है। कैंट की जनता किसी भी राजनीतिक पार्टी को नहीं बल्कि केवल अनिल विज के नाम पर मुहर लगाती है। विज द्वारा इस सीट से दो बार निर्दलीय चुनाव जीतना इस बात को साबित करता है। जी हां, बता दें कि पहला चुनाव 1990 में जीतने के बाद अप्रैल 1991 में हरियाणा विधानसभा समय से पूर्व ही भंग कर दी गई थी। जून 1991 में विधानसभा आम चुनाव करवाए गए। जिसमें विज भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर विजयी नहीं हो पाए थे। कुछ वर्ष बाद किसी कारणवश अनिल विज ने भारतीय जनता पार्टी का त्याग कर दिया था। 

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अप्रैल 1996 और फरवरी 2000 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और विधायक बने। वर्ष 2007 में उन्होंने एक राजनीतिक पार्टी विकास परिषद के नाम से भारतीय चुनाव आयोग से पंजीकृत करवाई। जिसका नारा था, काम किया था-काम करेंगे। हालांकि अक्टूबर 2009 में 12वीं विधानसभा के आम चुनावों से ठीक पहले वह फिर से भाजपा में शामिल हो गए और 2009, 2014 और 2019 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीन बार चुनाव जीतकर उन्होंने हैट्रिक लगाई और वह आज हरियाणा के बेहद ताकतवर वरिष्ठ मंत्री है। 

उनके पास गृह, स्वास्थ्य और निकाय जैसे महत्वपूर्ण विभाग हैं। एक बैंक कर्मचारी से छह बार विधायक और हरियाणा के वरिष्ठ मंत्री तक पहुंचने का श्रेय केवल और केवल अनिल विज खुद को जाता है। क्योंकि विज हमेशा स्वार्थ और लालच की राजनीति से दूर रहे और जनता का दुख दर्द हमेशा उनके लिए दुखदाई रहा। विज की कार्यप्रणाली से लगभग सभी परिचित हैं। लेकिन उनकी इस लोकप्रियता का मूल मंत्र आखिर क्या है। कैसे वह अपने विभिन्न विभागों को नियंत्रण में रखते हैं। किस प्रकार से वह प्रदेश और देश की राजनीति में इतने एक्टिवेट रहते हैं। इसके बारे में बहुत कम लोगों को ज्ञात है। इसका मूल कारण है वह पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर हैं। 

प्रदेश के गृह, स्वास्थ्य और निकाय मंत्री स्वयं स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैब, इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग करना पूरी तरह से जानते हैं। न केवल प्रयोग बल्कि इसका सही लाभ कैसे लेना है इसकी भी पूरी तरह से जानकारी वह रखते हैं। इस आयु में पहुंचने के बावजूद भी टेक्नोलॉजी को लेकर पूरी तरह से अनिल विज हाईटेक नजर आते हैं। उनके फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम अकाउंट को देखकर उनकी जागरूकता का अंदाजा लगाया जा सकता है। 

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एक वह दौर था जब युवा पीढ़ी गुल्ली डंडा, कंचे और पतंग जैसे खेलों में भाग लेती थी। लेकिन मौजूदा पीढ़ी इंटरनेट के जाल में फंस कर घरों में कैद होकर रह गई है। लेकिन अधिकतर युवाओं द्वारा इंटरनेट के अनेकों प्लेटफॉर्मो का प्रयोग केवल मनोरंजन के लिए किया जाता है। वहीं सोशल मीडिया का सही और सकारात्मक प्रयोग अगर किया जाए तो उसके बेहतरीन परिणाम हो सकते है,  यह अनिल विज की लोकप्रियता को देखकर सिद्ध होता है। सोशल मीडिया पर ट्विटर अकाउंट होने के कारण वह प्रदेश ही नहीं देश से भी जुड़े किसी भी बड़े मामले पर अपनी बात को बेबाक तरीके से रखते हैं। भले ही विपक्ष द्वारा सरकार, प्रधानमंत्री या प्रदेश के मुख्यमंत्री पर किए गए कटाक्ष का जवाब देना हो या प्रदेश के अधिकारियों को दिशा निर्देश या आदेश देने हों, वह हाईटेक टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते हैं। जिसके कारण ही वह सुर्खियों में रहते हैं।

प्रदेश के मंत्री अनिल विज का मानना है कि सरकारी तंत्र के माध्यम किए जाने वाले पत्राचार की स्पीड काफी धीमी होने के कारण आदेश और दिशा निर्देश की पालना में काफी वक्त लगता है। लेकिन टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर तुरंत प्रभाव से अधिकारियों तक बात पहुंचाई जा सकती है। वही सोशल मीडिया के माध्यम से जनता को भी पता चलता है कि सरकार क्या कर रही है। इससे सरकार द्वारा की गई कार्यवाही में भी पारदर्शिता नजर आती है। कुछ समय पहले अस्वस्थ होने पर वह अस्पताल में भी इसके जरिए अपने विभिन्न विभागों को नियंत्रित करते रहे थे। 

सबसे साधारण दिखने वाले मंत्री अनिल विज हाईटेक संसाधनों के उपयोग में रुचि रखते हैं। वह अपने सभी विभागों पर नियंत्रण रखने के लिए जहां संसाधनों का प्रयोग करते हैं। वही वह मीडिया तक अपनी बात पहुंचाने के लिए केवल लोक संपर्क विभाग पर निर्भर नहीं रहते। वह खुद मीडिया तक अपनी बाइट्स, अपने बयान और प्रेस नोट पहुंचाते हैं। पुराने जमाने में जब हाईटेक जमाना नहीं था तब भी वह अपने हाथ से लिख कर प्रेस नोट मीडिया तक भिजवाते थे यानि मीडिया से वह दूरियां बनाने में विश्वास नहीं रखते। वह 35 साल से राजनीति में है और 6 बार चुनाव जीत चुके हैं। भाजपा सरकार के सबसे सीनियर मंत्री हैं जो कि जनता में बेहद लोकप्रिय हैं। प्रदेश में जब भारतीय जनता पार्टी का अस्तित्व न के बराबर था तब भी यह अपने क्षेत्र से चुनाव जीतते रहे हैं। जनता हमेशा उनकी प्राथमिकता पर रही है।

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कुशल नेतृत्व के मालिक,  बेबाक और सख्त अंदाज, स्टीक दिशा निर्देश और अनुशासन प्रिय अनिल विज दूरदर्शी सोच रखते हैं। उनकी सुदृढ़ कार्यशैली, फैसले लेने की शक्ति और काम करने का अंदाज जो भी देखता है वह उनका मुरीद हुए बिना नहीं रह सकता। प्रदेश के मंत्री अनिल विज जो अपने सख्त रवैया के लिए विख्यात हैं। लेकिन उनकी प्रसिद्धि केवल हवा-हवाई नहीं है। अनिल विज केवल अपने अधिकारियों और स्टाफ पर ही पूरी तरह से निर्भर नहीं रहते। वह अपना काम और अपने विभागों की कार्य शैली पर खुद नजर बनाए रखते हैं। 

अब बात करते उनकी दूरदर्शिता का
कोरोना की पहली वेब के आने पर ही उन्होंने मेडिकल कॉलेज और हेल्थ विभाग के डॉक्टप की एक टीम का गठन कर दिया था। जिसका काम केवल कोरोना महामारी क्या है, क्या-क्या इंतजाम किए गए, कौन सी दवाइयां इस्तेमाल की गई, क्या ट्रीटमेंट इस्तेमाल किया गया और क्या-क्या कदम जैसे लॉकडाउन, मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग आदि की पालना की गई यह सारा डाटा नोट करना था। ताकि कभी भविष्य में 50-100-200 साल के बाद भी इस प्रकार का प्रकोप आए तो पिछला रिकॉर्ड उठाकर सभी जानकारियां हासिल की जा सके। ताकि जिन कठिनाइयों से आज देश-प्रदेश गुजर रहा है। भविष्य की पीढ़ी को इतनी दिक्कतों का सामना ना करना पड़े। यानि यह वह मंत्री हैं जिन्हें केवल अपने 5 साल के कार्यकाल की चिंता नहीं बल्कि देश की अगली नस्लों की भी वह चिंता कर रहे हैं। 

हरियाणा में 746 मरीजों के लिए प्रतिदिन 2984 इंजेक्शनों की जरूरत प्रतिदिन: विज
कोरोना के साथ साथ ब्लैक फंगस ने इन दिनों चिंताएं बढ़ा रखी है। ब्लैक फंगस के इलाज के लिए टेंडर के लिए एक मात्र ही स्थानीय कंपनी ने ही भाग लिया है। भारत में फिलहाल स्पूतनिक को ही मान्यता मिली है, अगर वो आगे नहीं आई तो आने वाले समय में प्रदेश को वैक्सीन मिलना मुश्किल हो सकता है। ब्लैक फंगस को लेकर हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि हमने 15 हजार इंजेक्शन का टेंडर किया था, जिसके लिए एक ही कंपनी ने हिस्सा लिया। नियमों के मुताबिक एक ही कंपनी यदि आती है तो टेंडर दोबारा होता है। लेकिन हालात को देखते हुए हमने नियमों में ढील देते हुए हमने उस टेंडर खोलने की इजाजत दी है। 

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विज के अनुसार ब्लैक फंगस के इंजेक्शनों के लिए ग्लोबल टेंडर में भारत की एक मात्र कम्पनी ने भाग लिया। जिसे 15 हजार इंजेक्शनों की आपूर्ति करने के लिए नियमों में विशेष छूट दी गई है। नियमों के अनुसार अगर किसी टेंडर में एक कम्पनी भाग लेती है तो वह रद्द किए जाते हैं। मगर विशेष परिस्थितियों को देखते हुए यह टेंडर स्वीकृत किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस के एक मरीज को एक दिन में 4 इंजेक्शनों की आवश्यकता रहती है। केंद्र से भी प्रतिदिन 1000 इंजेक्शनों की सप्लाई मिल रही है। हरियाणा में 746 मरीजों के लिए प्रतिदिन 2984 इंजेक्शनों की जरूरत प्रतिदिन है। ब्लैक फंगस के इंजेक्शनों की पूर्ती के लिए जल्द दोबारा टेंडर प्रक्रिया की जाएगी। अनिल विज के अनुसार वाइट व येलो ब्लैक फंगस में भी केवल एम्फट ट्रोसीन बी इंजेक्शन ही कारगार है। अल्टरनेट दवाइयों के ज्यादा अच्छे परिणाम नहीं है। वह नुकसान भी करती है।

कोरोना की तीसरी लहर की बात कही जा रही है। जिसको लेकर माना जा रहा है कि यह बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकती है। ऐसे में प्रदेश के अंदर बच्चों के डॉक्टरों की कमी होने के चलते इस स्थिति से कैसे निपटा जाएगा। इस पर बोलते हुए हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा हम पूरे तरीके से तैयार हैं। जरूरत के मुताबिक डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी। अब किस आधार पर परडिक्शन की जा रही है कि तीसरी लहर सिर्फ बच्चों को नुकसान पहुंचाएगी यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन हम तैयार हैं।

हरियाणा के अस्पतालों में अब सभी सुविधाएं मिलने जा रही हैं। इसको लेकर प्लान तैयार कर लिया गया है। विज ने कहा कि हरियाणा राज्य के अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। डब्लूएचओ के गाइडलाइन्स के अनुसार जनसंख्या के अनुपात के हिसाब, अस्पताल, डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, ऑक्सीजन बेड को तय किया जाएगा। हर बेड को ऑक्सीजन बेड के रूप में तैयार किया जाएगा हमारी टेक्निकल कमेटी तय करेगी कि हर अस्पताल में कितने प्रतिशत बेड आईसीयू ओर वेंटीलेटर होने चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया है कि हमने अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार किया है। जिसके मुताबिक 30 बेड से ऊपर वाले सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट होने चाहिए साथ में उनमें पाइप्ड गैस लाइन भी हो स्वास्थ्य एक्टिविटी को मॉनिटर करने के लिए सभी अस्पतालों को डिजिटल कोलेक्टेड किए जाएंगे ताकि हमारे पास हर एक्टिविटी का ब्यौरा हो।

डॉक्टरों के अपडेट करने के लिए समय समय पर रेगुलर ट्रेंनिंग सेंटर में ट्रेंनिंग दी जाएगी। जो डॉक्टर ट्रेंनिंग नही लेगा उसको भविष्य में इंक्रीमेंट नहीं दिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस बार हम अस्पतालों में खाने के लिए कैटरिंग व्यवस्था भी शुरू करने जा रहे है। क्योंकि बाहर से आने वाले मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अनिल विज ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ ज्यादा दाम वसूलने के लिए उपयुक्त के द्वारा प्रत्येक जिले में कमेटियां बनाने के आदेश दे दिए गए हैं। जिनमे जिलाधीश, सिविल सर्जन के प्रतिनिधियों के साथ आई एम ए व एक सी ए भी रहेंगे, जो सब चीजों को मॉनिटर करेंगे। हर सीएचसी पर एक एम्बुलेंस 24 घण्टे तैनात रखी जाए, ताकि वहां पर इलाज करवाने के लिए आने वाले लोगों का विश्वास बढ़े और आवश्यकता होने पर किसी भी गंभीर मरीज को तत्काल जिला अस्पताल में भेजा जा सके। 

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इसके साथ ही ज्यादा से ज्यादा लाइफ स्पोर्ट सिस्टम के साथ एम्बुलेंस को लैस करने के भी अधिकारियों को निर्देश दिए। विज ने कहा कि अस्पतालों में अधिक बोझ न बढ़े इस बात को ध्यान में रखते हुए लोगों को ऐसी जीवन पद्धति के प्रति जागरूक करने की योजना बनाए। इसके लिए आयुष वेलनेस सेंटरों पर सुविधाएं बढ़ाएं। ताकि लोग कम से कम बीमार पड़ें। लोग निरोगी रहें, इसके लिए आयुर्वेद, योग आदि पर फोकस करते हुए बजट की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए। इस योजना पर बजट खर्च होगा तो लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत भी होंगे और बीमार कम पड़ेंगे।

स्पूतनिक 5 लाख डोज हरियाणा को आगामी 30 दिनों में पहली खेप के रूप में देने को तैयार
अब हरियाणा में जल्दी वैक्सीन संकट हल हो सकता है। माल्टा की एक कंपनी स्पूतनिक वी की 6 करोड़ डोज सप्लाई करने को तैयार है। हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन को माल्टा हेड क्वार्टर स्थित एक कम्पनी जिसका नाम फार्मा रेगुलेटरी सर्विसिज लिमिटिड है ने अपनी रूची खुद व्यक्त की है।

हरियाणा के गृह व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि स्पूतनिक वी की 5 लाख डोज हरियाणा को आगामी 30 दिनों में पहली खेप के रूप में मिलेंगी। गौरतलब है कि हाल ही में 3 वैक्सीन कम्पनियों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अनुमति दी गई थी जिनमें स्पूतनिक भी एक है। स्पूतनिक द्वारा आगे 20 दिनों में 10 लाख डोज तब तक उपलब्ध की जाएंगी, जब तक निर्धारित सप्लाई पूरी नहीं होगी।

अनिल विज ने कहा कि वैक्सीन की डोज लगभग 1120 रुपये की कोस्ट करेगी। हाल ही में कई राज्यों ने ग्लोबल टेंडर्स कोविड 19 वैक्सीन के लिए लगाए थे। कोविड 19 कि 18 से 44 साल तक के लोगों को इंजेक्शन लगाने के लिए आपूर्ति पूरी करने के लिए लगाए गए थे। जिसमें हरियाणा को भी रिस्पॉन्स मिला है।

उन्होंने बताया की टेंडर में कोई भी पार्टिसिपेंट्स नहीं आए। हरियाणा मेडिकल सर्विसिज कॉरपोरेशन को अब माल्टा हेड क्वार्टर स्थित एक कम्पनी जिसका नाम फार्मा रेगुलेटरी सर्विसिज लिमिटिड है ने अपनी दिलचस्पी खुद व्यक्त की है। इनका कहना है कि हम 6 करोड़ तक डॉजिस स्पूतनिक वैक्सीन सप्लाई दे सकते हैं। अनिल विज ने कहा कि अगर सब कुछ ठीक रहता है तो स्पूतनिक द्वारा हरियाणा को 5 लाख डोज आगामी 30 दिनों में पहली खेप के रूप में देने व आगे 20 दिनों में 10 लाख डोज तब तक उपलब्ध करवाने से वैक्सीन की कमी दूर हो जाएगी।


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Content Writer

vinod kumar

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