बैंक घोटाला: CBI की डायरी में 7 IAS के नाम, CM दफ्तर से बैरंग लौटा एक अफसर...5 और अफसरों की उल्टी गिनती शुरू!
punjabkesari.in Friday, Jun 26, 2026 - 04:34 PM (IST)
चंडीगढ़ /नई दिल्ली: हरियाणा के बहुचर्चित ₹645 करोड़ के IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई से राज्य की नौकरशाही में हड़कंप मच गया है। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, बड़े अधिकारियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, CBI की जांच डायरी और संदिग्धों के बयानों में 7 IAS अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से 2 को गिरफ्तार किया जा चुका है और बाकी अधिकारियों की भी जल्द गिरफ्तारी संभव मानी जा रही है।
अब तक की बड़ी गिरफ्तारियां

CBI इस मामले में अब तक दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। जिनमें एक है IAS श्री राम कुमार सिंह (R.K. Singh), जो पंचकुला नगर निगम में कमिश्नर रहते हुए करीब 79.46 करोड़ की सरकारी राशि को नियमों के खिलाफ निजी बैंक में ट्रांसफर करने और फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के नाम पर शेल कंपनियों में डायवर्ट करने के आरोप में इन्हें गिरफ्तार किया गया था।

दूसरा है IAS पंकज अग्रवाल, जिन्होंने वर्ष 2000 बैच के इस वरिष्ठ अधिकारी को स्कूल शिक्षा और कृषि विभाग के खातों से ₹60.54 करोड़ की हेराफेरी के पुख्ता सबूत मिलने के बाद CBI ने हाल ही में गिरफ्तार किया है।
सीएम से मिलने की परमिशन नहीं, 5 अन्य अधिकारी रडार पर
जांच में यह भी सामने आया है कि इस घोटाले के छींटे सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंचने की कोशिश में थे। एक संदिग्ध IAS अधिकारी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात करने का प्रयास किया था, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने की अनुमति (परमिशन) नहीं दी गई। हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाते हुए जांच एजेंसियों को पूरी छूट (फ्री हैंड) दे दी है। सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) की धारा 17A के तहत CBI को आरोपी अधिकारियों के खिलाफ जांच और कड़े एक्शन की मंजूरी पहले ही दे दी है।

कैसे अंजाम दिया गया करोड़ों का घोटाला?
CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की संयुक्त जांच के अनुसार, यह पूरा खेल सरकारी फंड की अवैध डाइवर्जन से जुड़ा है। हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के नियमों को ताक पर रखकर 8 सरकारी विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के पैसों को निजी बैंकों की शाखाओं में जमा कराया गया।

अधिकारियों और बैंक मैनेजरों की मिलीभगत से सरकारी चेक और फंड को बिना किसी वास्तविक निवेश (जैसे FD) के, सीधे फर्जी (शेल) कंपनियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि इस घोटाले की रकम को बाद में रियल एस्टेट और निजी संपत्तियों में इन्वेस्ट किया गया है। इस महाघोटाले में अब तक 17 से अधिक आरोपियों को चार्जशीट किया जा चुका है, जिनमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और बिचौलिए शामिल हैं। CBI अब डायरी में दर्ज बाकी 5 IAS अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी और पूछताछ की तैयारी में है।