17 साल तक बिल्डर ने नहीं दिया प्लॉट पर कब्जा, हरेरा ने 23 लाख मुआवजा देने के दिए आदेश
punjabkesari.in Tuesday, Nov 03, 2026 - 07:51 PM (IST)
गुड़गांव, (ब्यूरो): करीब 17 साल तक प्लॉट का कब्जा नहीं देने पर हरेरा गुरुग्राम ने रामप्रस्थ डेवलपर्स कंपनी को आदेश दिया है कि वह खरीदार को हुए वित्तीय नुकसान पर 23.40 लाख रुपये का मुआवजा दें। इस राशि 11 प्रतिशत का ब्याज भी देना होगा। हरेरा ने माना कि अगर खरीदार अपनी राशि को किसी अन्य जगह पर निवेश करता हो राशि में करीब 23.40 लाख रुपये की बढ़ोतरी होती। यह आदेश हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (गुरुग्राम) के निर्णय अधिकारी राजेंद्र कुमार ने दिया है।
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उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद निवासी अमित गुप्ता ने अथॉरिटी में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने सेक्टर-92, 93 और 95 स्थित रामप्रस्थ सिटी प्रोजेक्ट में 300 वर्ग गज का आवासीय प्लॉट 12 जनवरी 2007 में बुक कराया था। इसके लिए उन्होंने 11 लाख रुपये दिए थे। । कंपनी के आश्वासन के अनुसार उन्हें 12 जनवरी 2010 तक प्लॉट का कब्जा दिया जाना था, लेकिन बिल्डर ने न तो कोई निश्चित प्लॉट आवंटित किया और न ही खरीदार के साथ खरीद समझौता किया।
करीब पांच साल बाद आठ नवंबर 2011 को कंपनी ने एक अंतिम आवंटन पत्र जारी किया, लेकिन इसमें भी प्लॉट का निश्चित नंबर नहीं बताया गया। इसके बाद खरीदार ने हरेरा में शिकायत दर्ज कराई। मामले में हरेरा ने 27 फरवरी 2025 को बिल्डर को 11 लाख रुपये की मूल राशि 11.10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया था। मूल रकम वापसी के आदेश के बाद खरीदार ने मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक नुकसान के लिए अलग से मुआवजे की मांग की थी।
इस पर निर्णय अधिकारी ने रियल एस्टेट अधिनियम की धारा 72 के तहत सुनवाई करते हुए माना कि बिल्डर की देरी के कारण खरीदार संपत्ति की कीमत में हुई बढ़ोतरी का लाभ लेने से वंचित रह गया। सेक्टर-92, 93 और 95 क्षेत्र में संपत्तियों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए 22 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया। यह राशि मूल राशि से अलग होगी। इस दौरान शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी पर एक लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए 40 हजार रुपये देने के आदेश दिए गए हैं।