657 करोड़ बैंक घोटाला: CBI की जांच में शेल कंपनियों, ज्वेलर और प्रॉपर्टी निवेश की नई कड़ियां सामने आने का दावा
punjabkesari.in Friday, Jul 10, 2026 - 08:33 PM (IST)
चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी): 657 करोड़ रुपये के बहुचर्चित बैंक घोटाले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित तौर पर मनी ट्रेल की नई परतों का खुलासा किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी विभागों के खातों से कथित रूप से निकाली गई 329 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहले शेल कंपनियों के खातों में भेजी गई और बाद में यह रकम चंडीगढ़ के एक ज्वेलर तक पहुंची। वहां सोने के कागजी लेन-देन और जीएसटी इनवॉइस के माध्यम से धन को वैध दिखाने के बाद उसे नकदी में बदलकर कथित साजिशकर्ताओं और अन्य लाभार्थियों तक पहुंचाया गया।
सीबीआई के अनुसार, इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसी अब धन के अंतिम गंतव्य, उसके निवेश तथा कथित रूप से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहन पड़ताल कर रही है। इस मामले में तीन आईएएस और एक आईएफएस अधिकारी सहित कई सरकारी अधिकारी तथा बैंक कर्मचारी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि, यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और सभी आरोप सीबीआई की जांच तथा आरोपपत्रों पर आधारित हैं। इनकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
पूर्व बैंक अधिकारी पर नेटवर्क संचालित करने का आरोप
सीबीआई का आरोप है कि पूरे कथित नेटवर्क का संचालन पूर्व आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा प्रबंधक रिभव ऋषि द्वारा किया गया। एजेंसी के अनुसार, उसने बाद में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में कार्यरत रहने के दौरान भी कथित गतिविधियां जारी रखीं। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि दोनों बैंकों के कुछ अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के कुछ अधिकारियों, जिनमें कुछ आईएएस अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं, के साथ कथित मिलीभगत कर हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों के बैंक खातों से धन की हेराफेरी की।
शेल कंपनियों के जरिए पहुंची करोड़ों की रकम
सीबीआई के अनुसार, सरकारी धन को कथित रूप से स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, आरएस ट्रेडर्स, एसआरआर प्लानिंग गुरुज, विस्टामेड सॉल्यूशंस और मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर जैसी शेल कंपनियों के माध्यम से आगे भेजा गया।
जांच एजेंसी का दावा है कि नवंबर 2024 से फरवरी 2026 के बीच सेक्टर-35 स्थित एक ज्वेलरी प्रतिष्ठान के संचालक को कुल 329.57 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इनमें लगभग 138 करोड़ रुपये कैपको फिनटेक सर्विसेज, 131 करोड़ रुपये स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट्स तथा करीब 45 करोड़ रुपये आरएस ट्रेडर्स के माध्यम से भेजे गए।
सोने के बिलों से नकदी बनाने का आरोप
सीबीआई का आरोप है कि ज्वेलरी प्रतिष्ठान द्वारा सोने की खरीद के नाम पर शेल कंपनियों के पक्ष में बिल और जीएसटी इनवॉइस जारी किए गए, जिससे लेन-देन को वैध स्वरूप दिया जा सके। एजेंसी का दावा है कि संबंधित सोना कंपनियों तक पहुंचाने के बजाय खुले बाजार में बेचा जाता था और उससे प्राप्त नकदी कथित तौर पर रिभव ऋषि तथा उसके सहयोगियों तक पहुंचाई जाती थी।
जांच के दौरान कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं, जिनमें प्रतिष्ठान से नियमित रूप से नकदी उठाने तथा बुलियन कारोबारियों से 155 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी एकत्र कर आगे पहुंचाने का उल्लेख किया गया है। तलाशी अभियान में सीबीआई ने 5,589 ग्राम बिना हिसाब का सोना और 54.20 लाख रुपये नकद बरामद करने का भी दावा किया है।
रियल एस्टेट निवेश भी जांच के दायरे में
सीबीआई ने अपनी जांच में चंडीगढ़ के एक रियल एस्टेट कारोबारी और होटल व्यवसायी को भी कथित लाभार्थी बताया है। एजेंसी के अनुसार, उन्हें इस नेटवर्क से 4.57 करोड़ रुपये नकद तथा 33.25 करोड़ रुपये बैंकिंग चैनलों के माध्यम से प्राप्त हुए। आरोप है कि इस धन का उपयोग चंडीगढ़ और मुल्लांपुर में 55 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियां खरीदने अथवा उनके लिए अग्रिम भुगतान करने में किया गया। इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक अन्य संपत्ति भी जांच एजेंसी के दायरे में है।
सीबीआई का कहना है कि मामले की वित्तीय जांच लगातार आगे बढ़ रही है और एजेंसी पूरे कथित नेटवर्क, धन के प्रवाह तथा इससे जुड़े सभी संभावित लाभार्थियों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले की अंतिम सच्चाई न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।