‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ के हरियाणा मॉडल को दूसरे प्रदेशों में लागू करे केंद्र सरकार: सुभाष बराला

punjabkesari.in Friday, Feb 13, 2026 - 08:40 PM (IST)

चंडीगढ़ (संजय अरोड़ा): हरियाणा से राज्यसभा के सदस्य सुभाष बराला ने शुक्रवार को राज्यसभा में कृषि संबंधी मुद्दा उठाते हुए सवाल पूछा और हरियाणा में कृषि के क्षेत्र में लागू की गई ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल योजना के वित्तीय लाभ बताते हुए इसका अध्ययन कर इसे दूसरे राज्यों में भी लागू करने का आग्रह किया। बराला ने तर्क दिया कि इस योजना से खेती का गणित साफ हुआ है। जमीन संबंधी आंकड़े दुरुस्त हुए हैं और इस योजना के लागू होने के बाद उर्वरकों की खपत में कमी आने से भारत सरकार को करीब 715.76 करोड़ रुपए की अनुमानित सब्सिडी बचत प्राप्त हुई है।

उन्होंने बताया कि वे सदन का ध्यान हरियाणा राज्य में लागू एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली तथा उसके ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के साथ किए गए एकीकरण किए जाने की नीति पर आकर्षित करना चाहते हैं। यह डिजिटल पहल उर्वरक वितरण और सब्सिडी प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्पपूर्ण सुधार है। इस एकीकरण के माध्यम से किसान पंजीकरण, भूमि एवं फसल का डिजिटल,  सत्यापन, उर्वरक वितरण तथा सब्सिडी निगरानी को एक ही प्रामणिक मंच से जोड़ा गया है। अब यूरिया, डी.ए.पी. एवं अन्य सब्सिडी युक्त उर्वरक केवल तभी प्रदान किए जाते हैं, जबकि पी.ओ.एस. प्रणाली पर एम.एफ.एम.बी. पोर्टल में दर्ज भूमि एवं फसल वितरण का विधिवत मिलान हो जाता है।

इससे अनाधिकृत खरीदी, अतिरिक्त उपयोग तथा उर्वरक डायवर्जन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। इस व्यवस्था के परिणाम स्वरूप सार्वजनिक धन की उल्लेखनीय बचत हुई है। 8 अक्तूबर 2025 के बाद उर्वरकों की खपत में कमी आने से भारत सरकार को करीब 715.76 करोड़ रुपए की अनुमानित सब्सिडी बचत प्राप्त हुई है जो सब्सिडी अब वास्तविक एवं सत्यापित कृषि उपयोग तक सीमित रही है। बराला ने बताया कि यह मॉडल रीयल टाइम डेटा के आधार पर मांग आकलन, बेहतर लॉजिस्टक योजना तथा समय पर उर्वकर उपलब्धतता सुनिश्चित करता है, जिससे किसानों के हितों की रक्षा होती है। बराला ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि हरियाणा मॉडल का अध्ययन कर इसे अन्य राज्यों में लागू करने पर विचार किया जाए, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर उर्वरक सब्सिडी प्रणाली अधिक पारदर्शी, कुशल एवं टिकाऊ बन सके।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान ने हरियाणा की कृषि नीतियों को सराहा

राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि के क्षेत्र में हरियाणा सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए कहा कि वे हरियाणा की सरकार को धन्यवाद एवं साधुवाद देते हैं कि पराली प्रबंधन में हरियाणा में बहुत ही अच्छा काम हुआ है। सरकार ने पराली प्रबंधन को लेकर अपने अतिरिक्त प्रयास किए हैं। पराली प्रबंधन के लिए हरियाणा सरकार की ओर से किसानों को प्रति एकड़ 1 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

ऐसे ही मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत धान की जगह दूसरी वैकल्पिक फसल बोने पर किसानों को 8 हजार रुपए प्रति एकड़ की राशि दी जाती है। खास बात यह है कि हरियाणा सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की है। साथ ही रेड जोन में आने वाली पंचायतों को 1 लाख एवं येलो जोन में आने वाली पंचायतों को 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि ऐसे ही गौशालाओं को भी पराली प्रबंधन के लिए परिवहन के नजरिए से 500 रुपए से 15 हजार रुपए की राशि दी जाती है। वे हरियाणा सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के लिए ह्दय से आभार व्यक्त करते हैं।

मेरी फसल-मेरी ब्यौरा योजना से खेती की तस्वीर हो गई स्पष्ट

करीब 44 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले हरियाणा में जमीन की तस्वीर साफ नहीं थी और आंकड़े भी दुरुस्त नहीं थे। अब इस धूंधली तस्वीर को उजला करने और आंकड़े दुरुस्त करने के लिए हरियाणा की सरकार ने पहल की। साल 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की पहल के बाद ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा योजना’ लागू की गई। इस योजना के अंतर्गत खेती के अलावा खाली छोड़ी गई जमीन का ब्यौरा भी किसानों से लिया जाता है। इससे हरियाणा में कितनी जमीन पर खेती होती है? कितनी पर बागवानी? कितनी पर सब्जियां, कितनी जमीन पर चारा उगाया जा रहा है? कितनी जमीन खाली है? की सटीक जानकारी मिलने लगी है।

दरअसल  हरियाणा में करीब 37 लाख हैक्टेयर यानी करीब 92 लाख एकड़ कृषि योग्य भूमि है। सरकार की ओर से अभी कुछ बरस पहले शुरू की गई मेरी फसल-मेरा ब्यौरा योजना में रबी और खरीफ दोनों सीजन में किसान हर बार करीब 68 से 69 लाख एकड़ फसल का ब्यौरा देते थे। ऐसे में यह सवाल उठता है कि शेष 23 से 24 लाख एकड़ भूमि पर किसान क्या करते थे। यह खाली रहती है, इस पर मछली पालन, पशुपालन या कुछ अन्य होता है। इस सब उलझन भरे आंकड़ों को सही तरीके से सामने लाने के लिए सरकार ने खाली जमीन का ब्यौरा भी मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर देने के आदेश दिए और इसके बाद खेती की तस्वीर अब स्पष्ट हो गई है।


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Content Writer

Isha

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