हरियाणा ने प्रदूषण स्तर में 13 फीसदी कमी लाने का रखा लक्ष्य, सरकार जल्द करेगी ये योजना तैयार
punjabkesari.in Thursday, Feb 12, 2026 - 05:12 PM (IST)
चंडीगढ़: वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए हरियाणा सरकार ने वर्ष 2026 के अंत तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में लगभग 13 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। राज्य का वर्तमान वार्षिक औसत एक्यूआई लगभग 138 है। इसे 12 अंक घटाकर 120 के आसपास लाने की योजना तैयार की गई है।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया है जिसे शीघ्र ही अंतिम रूप देकर वायु गुणवत्ता आयोग के साथ साझा किया जाएगा। मानसून की विदाई के बाद हरियाणा के कई शहर, विशेषकर एनसीआर के अंतर्गत आने वाले 14 जिले गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में आ जाते हैं। हरियाणा का वार्षिक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक औसत 138 के आसपास है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसे 2026 के अंत तक 120 के पास लाने का लक्ष्य रखा है। सर्दी के दौरान इन क्षेत्रों में औसत एक्यूआई 200 से 250 के बीच रहता है जबकि कुछ शहरों में यह 300 के पार भी पहुंच जाता है।
हाल ही में वायु गुणवत्ता आयोग ने राज्यों से वार्षिक एक्शन प्लान मांगा था। इसके तहत हरियाणा ने प्रदूषण में कमी लाने की रणनीति तैयार की है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर सेल के प्रमुख निर्मल कश्यप ने बताया, योजना का ड्रॉफ्ट तैयार कर लिया गया है। मंजूरी के बाद इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक बसें बढ़ेगी राज्य में सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ बनाने के लिए इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में हरियाणा के पास केवल 150 ई-बसें हैं जबकि आवश्यकता लगभग एक हजार बसों की आंकी गई है। सरकार ने इस वर्ष 375 नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदने का लक्ष्य तय किया है और इसकी मंजूरी भी दे दी गई है। इन बसों को चरणबद्ध तरीके से विभिन्न शहरों में संचालित किया जाएगा।
फिलहाल 29 सतत परिवेशी बायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र (सीएएक्यूएमएस) संचालित हैं। इन्हें बढ़ाकर 41 करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त राज्य में 46 मैन्युअल वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र भी कार्यरत हैं। निगरानी तंत्र मजबूत होने से प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और नियंत्रण में अधिक प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, राज्य में 2204 निर्माण स्थलों की पहचान की गई है, जिनमें अधिकांश एनसीआर जिलों में स्थित हैं। इन स्थलों पर धूल को नियंत्रण के लिए निर्माण स्थल को ढंकने, पानी का छिड़काव व एंटी स्मॉग गन लगाने संबंधी उपाय अनिवार्य किए जाएंगे।
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर को रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में गुरुग्राम राज्य का सबसे अधिक प्रदूषित जिला रहा। यहां पीएम 2.5 का स्तर 163 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। इसके अलावा धारूहेड़ा में 150, नारनौल में 126, चरखी दादरी में 121, मानेसर में 112, फरीदाबाद में 98, पानीपत में 93, भिवानी में 88, बहादुरगढ़ में 85, जींद में 82, करनाल में 79, कुरुक्षेत्र में 78, रोहतक में 76, यमुनानगर और पंचकूला में 75, सोनीपत में 70, कैचल में 65 तथा सिरसा में 56 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर स्तर दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। 24 घंटे का औसत 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर निर्धारित है।