मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ''कालीघाट शक्तिपीठ'' में मां की पूजा-अर्चना की

punjabkesari.in Tuesday, Mar 10, 2026 - 09:29 PM (IST)

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी दिल्ली चुनावों में भाजपा की सरकार बनवाने के बाद मिशन पंजाब पूरी तरह से संभाले हुए है।अब भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उनकी विशेष भूमिका पश्चिम बंगाल के चुनावों में भी लगाई है। मिशन बंगाल के दौरान मंगलवार कोलकाता में वह पौराणिक 'कालीघाट शक्तिपीठ' में माँ के दिव्य दर्शन को भी गए।    
 
 सीएम सैनी का कहना है कि बंगाल यात्रा के दौरान कोलकाता स्थित पौराणिक 'कालीघाट शक्तिपीठ' में माँ के दिव्य दर्शन कर जीवन धन्य हुआ। शक्ति और भक्ति की प्रतीक 'माँ' के चरणों में नतमस्तक होकर समूचे विश्व में शान्ति और सद्भाव की प्रार्थना की। माँ काली का आशीर्वाद सभी देशवासियों पर बना रहे एवं सभी का कल्याण हो, ऐसी मंगलकामना है।
      
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व जिस स्तर का भरोसा करता है, उसी का परिणाम है कि उन्हें अब पश्चिम बंगाल के चुनावी अभियान में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह निर्णय केवल संगठनात्मक औपचारिकता नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व के विश्वास और सैनी की राजनीतिक कार्यकुशलता का प्रमाण माना जा रहा है। 

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मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही नायब सिंह सैनी ने हरियाणा में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का प्रयास किया है। उनकी कार्यशैली शांत, संयमित और संगठन केंद्रित मानी जाती है। यही कारण है कि भाजपा नेतृत्व अक्सर उन्हें संगठनात्मक विस्तार और चुनावी रणनीति से जुड़े कार्यों में आगे रखता है। भाजपा के लिए बंगाल जैसे चुनौतीपूर्ण राज्य में किसी नेता को भेजना केवल प्रचार का हिस्सा नहीं, बल्कि वहां संगठन को मजबूत करने की रणनीति का भी हिस्सा होता है। 

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व, जिसमें विशेष रूप से नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी शामिल है, हमेशा ऐसे नेताओं को चुनावी जिम्मेदारी देती है जो संगठन की विचारधारा और कार्यशैली को मजबूती से आगे बढ़ा सकें। इसी कड़ी में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पश्चिम बंगाल भेजा जाना उनके बढ़ते राजनीतिक कद का संकेत माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब विभिन्न राज्यों के अनुभवी नेताओं को दूसरे राज्यों में भी सक्रिय भूमिका दे रही है, ताकि संगठनात्मक अनुभव का लाभ मिल सके। हरियाणा में भाजपा की सरकार पहले मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में और अब नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में लगातार संगठनात्मक मजबूती के साथ आगे बढ़ी है। इसी अनुभव को पार्टी अन्य राज्यों में भी उपयोग में लाना चाहती है।

बंगाल जैसे राज्य में भाजपा का मुकाबला सीधे तौर पर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस से है। यहां चुनावी लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संगठनात्मक क्षमता की भी परीक्षा होती है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व द्वारा नायब सिंह सैनी को जिम्मेदारी देना यह दर्शाता है कि पार्टी उन्हें एक प्रभावी और भरोसेमंद नेता के रूप में देखती है। 

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इन दिनों पंजाब के आगामी चुनावों को लेकर भी पूरी सक्रियता के साथ कार्य कर रहे हैं। पंजाब में भाजपा के लिए चुनावी परिस्थितियां हमेशा चुनौतीपूर्ण रही हैं। राज्य की राजनीति लंबे समय तक क्षेत्रीय दलों के प्रभाव में रही है, जिनमें प्रमुख रूप से भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस शामिल हैं। ऐसे में भाजपा अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए दूसरे राज्यों के अनुभवी नेताओं की सेवाएं ले रही है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नायब सिंह सैनी ने संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रियता बनाए रखी है। हरियाणा और पंजाब की भौगोलिक व सामाजिक निकटता को देखते हुए भी उनका अनुभव भाजपा के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
 
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि हरियाणा से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की दिशा में नायब सिंह सैनी का कद लगातार बढ़ रहा है। पश्चिम बंगाल व पंजाब में उनकी जिम्मेदारी केवल चुनाव प्रचार तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह भाजपा की रणनीति को जमीन पर लागू करने और संगठन को मजबूती देने की एक अहम कड़ी भी साबित हो सकती। 

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Content Editor

Krishan Rana

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