अब निजी कोचिंग संस्थानों का रजिस्ट्रेशन सहित करोड़ों के वाटर सिक्योर प्रोग्राम को मंजूरी, हरियाणा कैबिनेट बैठक में CM सैनी का बड़ा फैसला
punjabkesari.in Thursday, Aug 13, 2026 - 06:26 PM (IST)
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में वीरवार को हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। बैठक में हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र 27 अगस्त, 2026 से शुरू करने पर सहमति बनी। इसके अलावा विश्व बैंक के सहयोग से 5,714.80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ को मंजूरी दी गई। सरकार ने महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने, निजी कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने और रिहायशी प्लॉटों पर नर्सिंग होम की स्थापना को आसान बनाने से जुड़े फैसले भी लिए।
15 सिंचाई क्लस्टरों में 48.94 लाख एकड़ क्षेत्र होगा कवर
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ के तहत प्रदेश के 15 प्राथमिक सिंचाई क्लस्टरों में करीब 48.94 लाख एकड़ भूमि को कवर किया जाएगा। इससे लगभग 45 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम के तहत 104 नहर चैनलों का आधुनिकीकरण एवं नवीनीकरण किया जाएगा। इसके अलावा 248 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 131 नई जल संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से 620 जलमार्गों में सुधार किया जाएगा। सरकार ने लगभग 600 करोड़ रुपये की लागत से 120 नहर आधारित माइक्रो-इरिगेशन परियोजनाओं को भी कार्यक्रम में शामिल किया है। चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग की योजना है, जिस पर करीब 282.13 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
दो लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि सुधारने की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्टिकल ड्रेनेज और सब-सर्फेस ड्रेनेज के माध्यम से करीब दो लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि को सुधारने की योजना बनाई गई है। वहीं लगभग पांच लाख एकड़ क्षेत्र में डायरेक्ट सीडेड राइस को बढ़ावा दिया जाएगा। ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत करीब 1.12 लाख एकड़ क्षेत्र में फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य जल संरक्षण, सिंचाई व्यवस्था के आधुनिकीकरण और कृषि क्षेत्र में पानी के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
महिला स्टार्टअप को सात साल तक 100 फीसदी नेट एसजीएसटी प्रतिपूर्ति
मंत्रिमंडल ने महिलाओं के स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा राज्य स्टार्टअप नीति-2022 में व्यापक पूरक प्रावधानों को मंजूरी दी है। महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को एक वर्ष तक लीज किराये पर 50 प्रतिशत सब्सिडी, अधिकतम 10 लाख रुपये तक, दी जाएगी। ऐसे स्टार्टअप को सात वर्ष तक नेट एसजीएसटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति मिलेगी, जबकि सामान्य स्टार्टअप को सात वर्ष तक एसजीएसटी की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का लाभ मिलेगा। टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग अथवा ट्रांसफर के लिए 10 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान किया गया है। हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, पर्यावरण अनुकूल ग्रामीण उत्पाद, आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य उत्पाद और स्वदेशी खाद्य उत्पादों से जुड़े महिला स्टार्टअप को 50 हजार से एक लाख रुपये तक सूक्ष्म अनुदान दिया जाएगा।
प्रदर्शनी में भागीदारी के लिए सात लाख तक सहायता
देश में आयोजित होने वाले इवेंट और प्रदर्शनियों में भागीदारी के लिए सामान्य स्टार्टअप को पांच लाख रुपये वार्षिक, जबकि महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को सात लाख रुपये वार्षिक तक सहायता दी जाएगी। गुणवत्ता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले स्टार्टअप को लागत की 50 प्रतिशत एकमुश्त प्रतिपूर्ति होगी, जिसकी अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये तय की गई है। सरकारी खरीद में हरियाणा के पात्र स्टार्टअप के लिए विभागीय वार्षिक खरीद का 10 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित किया जाएगा। हरियाणा में कार्यरत कॉरपोरेट कंपनियों को स्थानीय स्टार्टअप के साथ पायलट परियोजनाएं शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक मैचिंग ग्रांट दी जाएगी।
निजी निवेश पर सरकार देगी मैचिंग ग्रांट
निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सीड-फंड मैचिंग प्रावधान के तहत प्रत्येक 25 लाख रुपये के निजी अथवा एंजल निवेश पर 25 लाख रुपये तक सह-निवेश या मैचिंग ग्रांट देने का प्रावधान किया गया है। स्टार्टअप में अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देने के लिए प्रति अप्रेंटिस प्रति माह 7,500 रुपये तक के वजीफे की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति होगी। यह सुविधा एक इकाई में अधिकतम 50 अप्रेंटिस प्रति वर्ष तक सीमित रहेगी। क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा स्टोरेज खर्च पर अब 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति होगी। इसकी अधिकतम सीमा 2.5 लाख रुपये सालाना और अवधि पांच वर्ष तक होगी। चंडीगढ़ में पंजीकृत कार्यालय वाले स्टार्टअप को भी श्रेणी-2 स्टार्टअप माना जाएगा, जिससे वे हरियाणा स्टार्टअप नीति के लाभों के पात्र होंगे।
स्कूलों में बांटी जाएंगी 10 हजार ‘डू-इट-योरसेल्फ’ किट
स्कूल स्तर पर नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों को 10 हजार ‘डू-इट-योरसेल्फ’ किट वितरित की जाएंगी। प्रदेश में विश्वस्तरीय ‘एच-हब’ इन्क्यूबेटर स्थापित किया जाएगा, जिसमें स्टार्टअप, कॉरपोरेट और शिक्षण संस्थानों का सहयोग होगा।
निजी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य
मंत्रिमंडल ने ‘हरियाणा प्राइवेट कोचिंग संस्थान, रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन नियम, 2026’ को भी मंजूरी दी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों को रोकना नहीं, बल्कि उन्हें रेगुलेट करते हुए छात्रों के हितों की रक्षा करना है। नए नियमों के तहत सभी मौजूदा और नए निजी कोचिंग संस्थानों का पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण अनिवार्य होगा। संस्थानों में स्वच्छ पेयजल, बिजली, फायर सेफ्टी और मेडिकल फर्स्ट-एड जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। कोचिंग संस्थानों को अपने संस्थान, विद्यार्थियों की सुरक्षा और अन्य जरूरी जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध करानी होगी।
लीज के रिहायशी प्लॉट पर भी नर्सिंग होम की अनुमति
मंत्रिमंडल ने नर्सिंग होम स्थापित करने की नीति में संशोधन को भी मंजूरी दी। अब डॉक्टर अपने स्वामित्व वाले रिहायशी प्लॉट के साथ-साथ लीज पर लिए गए रिहायशी प्लॉट पर भी नर्सिंग होम स्थापित कर सकेंगे।यह सुविधा उन एलोपैथिक और आयुष डॉक्टरों के लिए होगी, जो संबंधित मेडिकल अथवा आयुष काउंसिल में पंजीकृत, वर्तमान में प्रैक्टिसरत और स्थानीय आईएमए शाखा में पंजीकृत हैं। नर्सिंग होम में मरीजों के दाखिले और इनडोर उपचार की सुविधा के लिए निर्धारित कन्वर्जन शुल्क देना होगा। लीज वाले प्लॉट पर नर्सिंग होम की अनुमति लीज अवधि तक ही मान्य रहेगी।सरकार के अनुसार, इस संशोधन से रिहायशी कॉलोनियों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा और लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।