दाल-राजमा में कीड़े-फंगस की शिकायत से हड़कंप; Haryana के सरकारी स्कूलों में अब होगी औचक जांच...शिक्षा विभाग अलर्ट

punjabkesari.in Sunday, Aug 09, 2026 - 06:35 PM (IST)

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिक्षा विभाग ने निगरानी और सख्त कर दी है। दाल, राजमा और मिर्च-मसालों की कुछ खेपों में कीड़े और फंगस मिलने की शिकायतों के बाद विभाग ने स्कूल स्तर पर खाद्य सामग्री की भौतिक जांच अनिवार्य कर दी है। अब किसी भी सामग्री को बच्चों के भोजन में इस्तेमाल करने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच की जाएगी।

स्कूल मुखिया की होगी पहली जिम्मेदारी
निदेशक मौलिक शिक्षा, हरियाणा ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष नजर रखने को कहा है। हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से स्कूलों को भेजी जाने वाली दाल, राजमा, मिर्च-मसालों और अन्य खाद्य सामग्री को भोजन बनाने से पहले स्कूल मुखिया द्वारा जांचा जाएगा।

यदि किसी पैकेट में कीड़े, फंगस, नमी, दुर्गंध या अन्य किसी प्रकार की गुणवत्ता संबंधी कमी पाई जाती है तो उसे बच्चों के भोजन में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसी सामग्री को तत्काल सप्लायर से बदलवाने के निर्देश दिए गए हैं।

कई जिलों से मिली थी शिकायत
शिक्षा निदेशालय को सूत्रों और कुछ स्कूल मुखियाओं के माध्यम से शिकायतें मिली थीं कि कई जिलों में पहुंचाई गई खाद्य सामग्री निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर रही है। कुछ पैकेटों में कीड़े और फंगस पाए जाने की शिकायत भी सामने आई। इसके बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलों को खाद्य सामग्री की जांच को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

विभाग का मानना है कि पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों को दिया जाने वाला भोजन सीधे उनके स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ा है। इसलिए खाद्य सामग्री की गुणवत्ता में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

भोजन के तय मेन्यू में शामिल हैं पौष्टिक व्यंजन
सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण योजना के तहत निर्धारित मेन्यू के अनुसार बच्चों को दाल, चावल, सब्जी और रोटी सहित विभिन्न पौष्टिक खाद्य पदार्थ परोसे जाते हैं। सप्ताह में एक दिन खीर अथवा अन्य पौष्टिक व्यंजन भी दिए जाते हैं। ऐसे में भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक सामग्री की गुणवत्ता महत्वपूर्ण हो जाती है।

अधिकारियों को निरीक्षण के निर्देश
जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों का समय-समय पर निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को खाद्य सामग्री की सप्लाई से लेकर उसके इस्तेमाल तक पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने को कहा गया है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि खराब या संदिग्ध खाद्य सामग्री किसी भी परिस्थिति में बच्चों को नहीं परोसी जाएगी। गुणवत्ता में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं
शिक्षा विभाग की इस सख्ती का उद्देश्य पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। अब स्कूलों में खाद्य सामग्री की जांच केवल औपचारिकता नहीं रहेगी, बल्कि इस्तेमाल से पहले उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।

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Content Editor

Krishan Rana

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