गवाहों के गैर जमानती वारंट तालीम न कराने पर दो हैडकांस्टेबल को अदालत का नोटिस
punjabkesari.in Wednesday, Sep 02, 2026 - 09:17 PM (IST)
गुड़गांव, (ब्यूरो): आपराधिक मामले में दो गवाहों के गैर जमानती वारंट की तालीम न कराने पर जिला अदालत ने दो हेड कांस्टेबल को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उन पर कार्रवाई क्यों न की जाए। 24 सितंबर तक इस मामले में दोनों हेड कांस्टेबल को अदालत में अपने जवाब दाखिल करने है। यह आदेश ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास मनोज कौर की अदालत ने दिया है।
गुरुग्राम की ताजा खबरों के लिए लिंक https://www.facebook.com/KesariGurugram पर क्लिक करें।
जानकारी के मुताबिक, 2015 में डीएलएफ फेज-दो थाने में दर्ज हुए फर्जी तरीके से नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने के मामले में अदालत सुनवाई कर रही थी। इस मामले में पुलिस ने अभिषेक शर्मा को आरोपी बनाया हुआ है। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि कुछ लोगों ने प्राइसवाटरहाउसकूपर्स इंडिया के नाम का दुरुपयोग कर नौकरी तलाशने वाले युवाओं को फर्जी नौकरी के ऑफर दिए। आरोपियों ने कंपनी के लोगों और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर युवाओं को विश्वास में लिया तथा नौकरी दिलाने के बदले रुपये वसूले। सात अगस्त को मामले में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाह सुमित कुमार और मौर्य व मोहम्मद मजीद को पुलिस की तरफ से अदालत में पेश करना था।
हेड कांस्टेबल शिव कुमार ने अदालत में बताया था कि समय की कमी के चलते वह सुमित कुमार को वारंट की तामील नहीं करा सके। हेड कांस्टेबल रोहताश ने बताया कि वह कानून व्यवस्था को संभालने में व्यस्त हो गए थे इसके चलते मौर्य और मोहम्मद मजीद के वारंट की तामील नहीं हो सकी। इस पर अदालत ने बताया कि दोनों अधिकारियो के पास करीब 22 दिन का समय था इसके बावजूद वह वारंट की तामील नहीं करा सकें। इस पर अदालत ने दोनों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने थाना प्रभारी को भी गवाह गोविंद राम का पता लगाने का निर्देश दिया। उन्हें अगली सुनवाई पर गवाह की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया। ऐसा न करने पर थाना प्रभारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकती है।