हरियाणा में 56,813 कर्मियों का डाटा वैरीफाई, फिर भी नहीं मिली जॉब सिक्योरिटी
punjabkesari.in Friday, May 22, 2026 - 11:13 AM (IST)
चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार द्वारा लागू किए गए जॉब सिक्योरिटी कानून के तहत पात्र कर्मचारियों को अभी तक सिक्योरिटी नहीं मिल पाई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पोर्टल पर 83,923 कर्मचारियों ने लॉग-इन किया, इनमें से 59,368 ने आवेदन किया, जबकि 56,813 कर्मचारियों का डेटा पूरी तरह वैरीफाई भी हो चुका है।
इसके बावजूद 20 मई 2026 तक एक भी कर्मचारी को जॉब सिक्योरिटी का पत्र जारी नहीं किया गया। दरअसल, सरकार ने लगभग पौने दो साल पहले संविदा, आऊटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा देने के उद्देश्य से यह कानून बनाया था। इसके तहत 15 अगस्त 2025 तक 5 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को नौकरी में सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया। सरकार का दावा था कि इससे करीब 1.20 लाख कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। हालांकि, कानून लागू होने के बाद भी अधिकांश कर्मचारियों को अब तक कोई पत्र जारी नहीं हुआ है। कुछ विभागों ने पहले चरण में भौतिक रूप से जॉब सिक्योरिटी पत्र जारी किए थे, लेकिन सरकार ने नया पोर्टल शुरू करते ही पुराने पत्र रद्द कर दिए और सभी कर्मचारियों को दोबारा ऑनलाइन आवेदन करने को कहा है। इस प्रक्रिया में कर्मचारियों को लॉगइन, ओ.टी.पी. और दस्तावेज अपलोड करने जैसी तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिससे पूरी प्रक्रिया लंबी खिंच गई। सरकार की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन कर्मचारियों का डेटा सत्यापित हो चुका है, उन्हें 15 जून 2026 तक जॉब सिक्योरिटी पत्र जारी किए जाएं।
शिकायतों के समाधान के लिए बनी को-ऑर्डीनेशन कमेटी
जॉब सिक्योरिटी कानून और हरियाणा कौशल रोजगार निगम से जुड़े विवादों और शिकायतों के निपटान के लिए सरकार ने को-ऑर्डीनेशन शिकायत निवारण समिति का गठन किया है। कमेटी का अध्यक्ष, एच. आर. विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के नामित अधिकारी होगा। वहीं, सदस्य के रूप में मानव संसाधन विभाग के संबंधित अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा वित्त विभाग के प्रतिनिधि, सी.आर.आई.डी. विभाग के आई.टी. विशेषज्ञ और प्रतिनिधि भी बतौर सदस्य शामिल होंगे तथा कौशल रोजगार निगम को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
समिति के ये होंगे मुख्य कार्य
जॉब सिक्योरिटी कानून, कांट्रैक्चुअल मैनपावर, जॉब पोर्टल और सेवा सत्यापन से जुड़े मामलों की जांच। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना। मुकद्दमेबाजी से पहले विवादों का प्रशासनिक समाधान। अदालतों में लंबित मामलों की पहचान और समाधान सुझाना। बैठक और शिकायत निवारण व्यवस्था । समिति सप्ताह में कम से कम 2 बार बैठक करेगी। सामान्य मामलों का निपटारा 15 दिनों में किया जाएगा। बता दें कि जिन कर्मचारियों का डेटा वैरीफाई हो चुका है, वे लंबे समय से पत्र जारी होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार और विभागीय अधिकारियों की धीमी प्रक्रिया के कारण उन्हें बार-बार आवेदन और दस्तावेज सत्यापन के बावजूद राहत नहीं मिल रही। अब सरकार द्वारा गठित को-ऑर्डीनेशन कमेटी से उम्मीद है कि जॉब सिक्योरिटी कानून का लाभ पात्र कर्मचारियों तक जल्द पहुंचेगा और लंबित शिकायतों का समाधान होगा।
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