बंकर में सोते हुए सैनिक की मौत भी ड्यूटी मानी जाएगी, पंजाब-हरियाणा Highcourt का फैसला
punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 11:58 AM (IST)
चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तैनाती के दौरान बंकर में सोते समय हुई सैनिक की मृत्यु को भी 'ड्यूटी के दौरान हुई मृत्यु' माना जाएगा। अदालत ने कहा कि यदि सैनिक अधिसूचित आप्रेशनल क्षेत्र में तैनात है और उसकी मृत्यु सैन्य सेवा से जुड़ी परिस्थितियों में होती है तो उसके आश्रितों को उच्च श्रेणी की लिबरलाइज्ड फैमिली पैंशन का अधिकार होगा।
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की अपील को खारिज करते हुए आम्र्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (ए.एफ.टी.) चंडीगढ़ के 16 मार्च 2023 के आदेश को बरकरार रखा। ए.एफ.टी. ने दिवंगत सैन्य अधिकारी मेजर सुशील कुमार सैनी निवासी रेवाड़ी की पत्नी अनुराधा सैनी को लिबरलाइज्ड फैमिली पेंशन देने का आदेश दिया था। केंद्र सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि अधिकारी की मृत्यु नींद के दौरान हुई थी, इसलिए इसे आप्रेशनल गतिविधि के दौरान हुई मौत नहीं माना जा सकता और अधिकतम 'स्पैशल फैमिली पैंशन' ही दी जा सकती है। हालांकि हाईकोर्ट ने इन तकों को अस्वीकार करते हुए कहा कि संबंधित। अधिकारी भारत-पाक सीमा पर 'आप्रेशन रक्षक' के तहत अधिसूचित आप्रेशनल क्षेत्र में तैनात थे और कोर्ट आफ इंक्वायरी की रिपोर्ट में भी उनकी मृत्यु को सैन्य सेवा से संबंधित बताया गया है।
सीमा क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश की सूचना थी, आप्रेशनल तनाव व हाई बी.पी. के कारण पड़ा दिल का दौरा रिकार्ड के अनुसार घटना वाले दिन सीमा क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश की सूचना मिली थी, जिसके बाद मेजर सैनी ने आवश्यक निर्देश दिए और पूरी स्थिति की निगरानी की। आप्रेशनल तनाव और पहले से मौजूद उच्च रक्तचाप की समस्या के कारण उन्हें रात में दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। खंडपीठ ने सरकारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों को श्रेणी ई (आई) के अंतर्गत रखा गया है, जिसमें सरकार द्वारा अधिसूचित सैन्य अभियानों के दौरान होने वाली मौतें शामिल हैं।
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