दुष्यंत के मुख्यमंत्री पद के निशाने को साधने के लिए सारथी की भूमिका में दिग्विजय सिंह चौटाला

punjabkesari.in Tuesday, Dec 06, 2022 - 09:37 PM (IST)

चंडीगढ़(चंद्रशेखर धरणी): भिवानी में 9 दिसम्बर को रैली के माध्यम से कांग्रेस में गुटबाज़ी का लाभ उठा मिशन 2024 में जबरदस्त उपस्थिति दर्ज करवाने के मूड़ में जेजेपी नजर आ रही है। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के मुख्यमंत्री पद के निशाने को साधने के लिए सारथी की भूमिका में दिग्विजयसिंह चौटाला नजर आ रहे हैं। प्रदेश ही नहीं बल्कि केंद्र की राजनीति में भी बेहद मजबूत पकड़ रखने वाले हरियाणा के बेहद मजबूत सियासी परिवार के वारिस दुष्यंत चौटाला की छोटी सी उम्र की पार्टी ने पिछले 2019 के आम चुनावों में अपने सभी विरोधी दलों को धूल चटाने का काम किया। सबसे छोटी उम्र में 16वी लोकसभा में सबसे कम उम्र का सदस्य बनने का सौभाग्य प्राप्त करते हुए दुष्यंत चौटाला का नाम सबसे युवा सांसद के रूप में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। हरियाणा की बड़ी आबादी जाट वर्ग में बेहद मजबूत पकड़ रखने तथा किसानों के मसीहा माने जाने वाले जननायक चौधरी देवीलाल जो प्रदेश की जनता में बेहद लोकप्रिय थे और जिन्हें हरियाणा की जनता प्यार और सम्मान से ताऊ के नाम से बुलाती थी, उनकी विरासत के नए वारिस के रूप में दुष्यंत चौटाला ने एक बेहद मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाई।

 

11 महीने पहले जन्मी जननायक जनता पार्टी ने 2019 के विधानसभा चुनाव में 90 में से 10 सीटें जीतकर दोनों मुख्य दलों कांग्रेस और भाजपा को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया कि बिना उनके साथ आए सरकार चलाना संभव ही नहीं था। चाबी के निशान वाली जजपा के हाथ में ही सत्ता की चाबी थी। दोनों राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्रेस बहुमत से दूर थे और दुष्यंत चौटाला किंग मेकर के रूप में आसमान में चमक रहे थे। प्रदेश के कद्दावर सियासी परिवार के वारिस दुष्यंत चौटाला ने राजनीतिक सरगर्मियों को देखते हुए और प्रदेश की जनता के हित में भारतीय जनता पार्टी के साथ जाने का फैसला लिया। चुनाव पूर्व किए गए वायदों को पूरा करने की शर्त पर दोनों दलों के बीच समझौता फरमान चढ़ा और दुष्यंत चौटाला को उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान किया गया। जींद उपचुनाव में पहली बार चुनावी मैदान में उतरी जजपा की परफॉर्मेंस को देख कई बड़े दलों और नेताओं की गलतफहमी दूर हुई। क्योंकि बेशक भारतीय जनता पार्टी ने उस चुनाव में जीत दर्ज की हो, लेकिन बेहद मजबूत संगठनात्मक संरचना और मैनेजमेंट के दम पर जजपा सत्ता में भागीदार बनी थी।

 

चंद महीनों की पार्टी जजपा ने 2019 के चुनावों में कई मजबूत दलों को धूल चटाई थी। लेकिन अब पार्टी इससे कहीं अधिक परिपक्व हो चुकी है और सरकार में रहने के कारण बेहद मजबूत संगठन पार्टी ने तैयार कर लिया है। गोहाना रैली से इस पार्टी का बीज पड़ा था। अब भिवानी में पार्टी के स्थापना दिवस पर होने वाली "जन सम्मान रैली" प्रदेश की राजनीति को एक नया मोड़ देने वाली साबित हो सकती है। क्योंकि समय-समय पर पार्टी के नेताओं द्वारा मंचों पर केवल उपमुख्यमंत्री की कुर्सी तक सीमित नहीं रहने के बयानों और उस पर कार्यकर्ताओं की तालियों की गड़गड़ाहट बहुत कुछ ब्या करती रही है। इस रैली को लेकर पार्टी के विभिन्न नेताओं- मंत्रियों- पदाधिकारियों की तमाम जिलों में जाकर गतिविधियों को देख यह तो साफ है कि 2024 के आम चुनावों की नीव इस ऐतिहासिक रैली से रखे जाना तय है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा साफतौर पर अपने पदाधिकारियों को यह कहे जाना कि अगर भीड़ कम लाए तो पद मुक्त कर दिया जाएगा, यह साफ कर रहा है कि पार्टी इस रैली के माध्यम से ना केवल विपक्षियों को बल्कि उनकी सरकार में सहयोगी भाजपा को एक बड़ा संदेश देने का मन बना चुकी है। पार्टी के नेता इस रैली के माध्यम से प्रदेश की राजनीति की दशा और दिशा बदलने के मूड में है। प्रदेश की सबसे बड़ी राजनीतिक रैली का दावा कर रहे जजपा के नेताओं का साफ मानना है कि कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के खत्म होते जा रहे अस्तित्व को देखते हुए यह एक महत्वपूर्ण रैली साबित होगी।

 

बता दें कि 2019 के विधानसभा चुनावों में जननायक जनता पार्टी ने 10 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी के साथ मिल सरकार बनाने का फैसला इस शर्त पर किया था कि उनके चुनाव पूर्व किए गए वायदों को हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए। लगातार इस क्रम पर चलते हुए पार्टी अपने कई चुनावी वायदों को पूरा करवाने में सफलता हासिल कर चुकी है। मुख्य वायदा बुजुर्ग पेंशन 2024 से पहले-पहले 5100 देने को लेकर पार्टी अडिग है। हाल ही में हुए पंचायती राज चुनावों में बड़ी संख्या में पार्टी के पदाधिकारियों की जीत के बाद जननायक जनता पार्टी और अधिक उत्साह से इस रैली की तैयारियों में लगी हुई है।लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में बड़े नेता आमंत्रण को लेकर दौरों पर हैं। जगह जगह इन नेताओं के हो रहे भव्य स्वागत और जमा हो रही भीड़ को देखते हुए होने वाली इस रैली में लाखों की भीड़ की उम्मीद लगाई जा रही है। किसान आंदोलन और कोविड के कारण जननायक जनता पार्टी 2 साल तक स्थापना दिवस नहीं बना पाई थी। इस नजरिए से भी एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन करके जजपा अपने कार्यकर्ताओं में फिर से एक नए उत्साह और जोश का सृजन करना चाहती है। इस रैली को अगर 2024 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल कहा जाए तो भी गलत नहीं होगा। तमाम राजनीतिक दलों सहित सूबे की जनता की नजरें इस रैली पर टिकी हुई है। कई मोड़ो पर भाजपा और जजपा के बीच आए आपसी मतभेदों को देखते हुए जननायक जनता पार्टी एक बड़ा संदेश भाजपा को भी इस रैली के माध्यम से देने के प्रयास में है। जजपा अब भाजपा की जूनियर सहयोगी या छोटा भाई बनकर उप मुख्यमंत्री तक ही सीमित रहने को लेकर तैयार नहीं नजर आ रही। जननायक जनता पार्टी के पंखों का विस्तार करने की तैयारी अब यह नेता करते नजर आ रहे हैं। 9 तारीख को होने वाली इस मेगा रैली को ना केवल 2024 के विधानसभा बल्कि लोकसभा चुनावों का भी ट्रेलर माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक रैली के बाद पार्टी के ग्राफ में भी एक बड़ी बढ़ोतरी नजर आ सकती है। अगर रैली वास्तव में इनके नेताओं के अनुसार कामयाब रही तो यह भी संभव हो सकता है कि आगामी चुनावों में एक बहुत बड़ा वोट बैंक कांग्रेस से फिसलकर जजपा की ओर आ जाए। लगातार चौ0 देवीलाल की विचारधारा को आगे बढ़ाने वाली जननायक जनता पार्टी आगामी चुनावों में एक बेहद मजबूत स्थिति में खड़ी नजर आ सकती है। राजनीति के बेहद मंजे हुए खिलाड़ी के रूप में हमेशा अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने वाले दुष्यंत चौटाला को बेशक सियासत विरासत में मिली हो, लेकिन उनके रंग-ढंग और अपनी भाषा शैली पर मजबूत पकड़ के चलते छोटी सी उम्र वाले दुष्यंत एक लंबी छलांग को तैयार खड़े नजर आ रहे हैं।

 

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Content Writer

Gourav Chouhan

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