कुरुक्षेत्र के इंजीनियर ने छोड़ी 12 हजार की नौकरी, अब विदेशों में बेच रहे ''रद्दी'' से बनी ट्रे... खड़ा किया 80 लाख का साम्राज्य

punjabkesari.in Monday, Apr 27, 2026 - 11:11 AM (IST)

कुरुक्षेत्र(रणदीप): कुरुक्षेत्र के गौरव काजल ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे नेक और विजन स्पष्ट हो, तो कचरे को भी कंचन बनाया जा सकता है। एक समय महज ₹12,000 की नौकरी करने वाले इस इंजीनियर ने आज 'बालाजी फाइबर प्रोडक्ट' के जरिए ₹80 लाख सालाना का टर्नओवर हासिल कर लिया है> गौरव काजल ने न केवल अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री का सही इस्तेमाल किया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ एक सफल बिजनेस मॉडल भी खड़ा किया।उन्होंने अपना स्टार्टअप 'बालाजी फाइबर प्रोडक्ट' के नाम से शुरू किया।

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कचरे के ढेर में दिखी सफलता की राह
इंजीनियरिंग के बाद दिल्ली-NCR में नौकरी के दौरान गौरव ने प्रदूषण और कचरे के बड़े ढेरों को देखा। यहीं से उनके मन में वेस्ट मैनेजमेंट का विचार आया। उन्होंने रद्दी कागज का इस्तेमाल कर बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग ट्रे बनाने का स्टार्टअप शुरू किया, जो प्लास्टिक और थर्माकोल का एक बेहतरीन विकल्प है।
 

प्लास्टिक का 'बायोडिग्रेडेबल' विकल्प
गौरव काजल बताते है कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और कचरे के ढेरों को देखकर उन्हें वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में कुछ करने का विचार आया। उन्होंने 100% वेस्ट कागज (रद्दी) का उपयोग करके बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग ट्रे बनाने की शुरुआत की। यह पैकेजिंग ट्रे थर्माकोल और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का एक सशक्त विकल्प है।
इस्तेमाल के बाद इन ट्रे को आसानी से दोबारा रीसायकल किया जा सकता है या ये मिट्टी में मिल जाती हैं। घरों और ऑफिसों से निकलने वाले रद्दी कागज को ये डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए इकट्ठा करते हैं, जिससे कचरा कम होता है।

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12,000 की सैलरी से 80 लाख के टर्नओवर तक
गौरव ने साबित कर दिया कि सही विजन के साथ छोटा स्टार्टअप भी बड़ा बन सकता है। उन्होंने एनसीआर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद एक कंपनी में ₹12000 महीने के वेतन पर नौकरी की थी और वहां पर उन्होंने दिल्ली का पॉल्यूशन देखा और कचरे का बड़ा ढेर देखा जिसे उन्होंने कचरे के प्रबंधन के लिए कुछ नया करने की सोची थी।
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'मेक इन इंडिया' की मिसाल
​12,000 महीने की नौकरी से शुरू हुआ सफर आज ₹80 लाख सालाना टर्नओवर तक पहुँच गया है।उनके उत्पाद केवल हरियाणा या भारत के राज्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विदेशों में भी एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं। अपने स्टार्टअप के जरिए वे अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर प्रदान कर रहे हैं। गौरव काजल की यह पहल 'मेक इन इंडिया' और 'स्वच्छ भारत अभियान' दोनों को मजबूती प्रदान करती है। उन्होंने कचरे को संपदा में बदलकर न केवल अपना भविष्य संवारा, बल्कि पृथ्वी को प्लास्टिक मुक्त बनाने में भी अपना योगदान दिया।


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Content Writer

Isha

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