हरियाणा पंचायती राज में बड़ा संकट: 7 सितंबर से पेनडाउन हड़ताल पर जाएँगे इंजीनियर, रुकेंगे ग्रामीण विकास के काम
punjabkesari.in Friday, Sep 04, 2026 - 08:48 PM (IST)
चंडीगढ़(धरणी): हरियाणा पंचायती राज विभाग के इंजीनियरिंग विंग में प्रस्तावित रैशनलाइजेशन और पुनर्गठन के विरोध ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है। इंजीनियरिंग विंग एसोसिएशन ने 7 सितंबर 2026 को प्रदेशभर में पेनडाउन हड़ताल का ऐलान किया है। इसके बाद 8 और 10 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए जाएंगे। एसोसिएशन ने साफ संकेत दिया है कि यदि प्रस्तावित बदलावों पर उनकी आपत्तियों और मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।
इस पूरे मामले को हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने भी उठाया है। विधायक रघुबीर कादयान और सिरसा के विधायक गोकुल सेतिया ने सदन में पंचायती राज विभाग की इंजीनियरिंग विंग में प्रस्तावित रैशनलाइजेशन पर सवाल उठाते हुए तकनीकी अधिकारियों की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव से पैदा होने वाली संभावित कठिनाइयों की ओर सरकार का ध्यान खींचा।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पंचायती राज विभाग में रैशनलाइजेशन कमीशन की अगली बैठक 10 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है। ऐसे में इंजीनियरिंग विंग के आंदोलन और कमीशन की बैठक की तारीख आमने-सामने आने से सरकार के लिए भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।
जेई और एसडीओ को एक्सईएन के नियंत्रण से हटाने की योजना पर सवाल
विधानसभा में विधायकों ने कहा कि पंचायती राज विभाग में जेई और एसडीओ को कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) के तकनीकी एवं प्रशासनिक नियंत्रण से हटाकर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) के अधीन करने की योजना बनाई जा रही है।
विधायकों का कहना है कि इंजीनियरिंग विंग के तकनीकी अधिकारियों की कार्यप्रणाली और नियंत्रण व्यवस्था में इस प्रकार का बदलाव आने वाले समय में विभागीय कामकाज के लिए कई व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है। पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले निर्माण एवं विकास कार्यों में तकनीकी निगरानी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में तकनीकी अधिकारियों की रिपोर्टिंग और नियंत्रण व्यवस्था में बदलाव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
एक्सईएन से डीडीओ पावर हटाने का प्रस्ताव
रैशनलाइजेशन कमीशन के तहत पंचायती राज विभाग के तकनीकी ढांचे में कई बदलाव प्रस्तावित बताए जा रहे हैं। इनमें कार्यकारी अभियंता यानी एक्सईएन से डीडीओ पावर हटाने का प्रस्ताव भी शामिल है।
इसके अलावा अधीक्षक अभियंताओं और मुख्य अभियंता के पदों में बदलाव तथा कनिष्ठ अभियंताओं के पदों में कटौती का भी प्रस्ताव बताया जा रहा है। इंजीनियरिंग विंग का कहना है कि इन प्रस्तावों को लागू करने से विभाग की तकनीकी क्षमता और कार्यों की निगरानी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
वरिष्ठ इंजीनियरों के सुझावों की अनदेखी का आरोप
इंजीनियरिंग विंग एसोसिएशन के राज्य प्रधान महेन्द्र सिंह यादव ने कहा कि प्रस्तावित रैशनलाइजेशन को लेकर प्रदेशभर के इंजीनियरों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि रैशनलाइजेशन कमीशन द्वारा इंजीनियरिंग विंग के उच्च अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों से लिए गए सुझावों की अपेक्षित रूप से अनदेखी की जा रही है।
एसोसिएशन का कहना है कि पुनर्गठन से पहले विभाग की तकनीकी आवश्यकताओं, ग्रामीण विकास कार्यों की प्रकृति और अधिकारियों की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखा जाना जरूरी है। इंजीनियरों ने फिलहाल काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध शुरू किया है।
7 सितंबर को पेनडाउन, फिर जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन
एसोसिएशन ने आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम घोषित किया है। इसके तहत 7 सितंबर को प्रदेशभर के इंजीनियर पेनडाउन हड़ताल पर रहेंगे। इसके बाद 8 और 10 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए जाएंगे।
एसोसिएशन का कहना है कि इन विरोध प्रदर्शनों का उद्देश्य सरकार और रैशनलाइजेशन कमीशन तक अपनी बात पहुंचाना है। यदि इसके बावजूद प्रस्तावित रैशनलाइजेशन एवं पुनर्गठन में आवश्यक बदलाव नहीं किए गए तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल का संकेत
इंजीनियरिंग विंग एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वह चरणबद्ध आंदोलन के बाद भी अपनी मांगों पर कायम रहेगी। यदि सरकार और कमीशन की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होती तो अनिश्चितकालीन हड़ताल का विकल्प अपनाने की चेतावनी दी गई है।
इससे पंचायती राज विभाग के ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे विकास एवं निर्माण कार्यों पर भी असर पड़ने की आशंका पैदा हो सकती है। हालांकि, एसोसिएशन फिलहाल शांतिपूर्ण आंदोलन के माध्यम से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने पर जोर दे रही है।
10 सितंबर की बैठक पर टिकी निगाहें
पंचायती राज विभाग में रैशनलाइजेशन कमीशन की 10 सितंबर को प्रस्तावित बैठक अब पूरे मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक तरफ इंजीनियरिंग विंग ने उसी दिन जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा है, वहीं दूसरी तरफ कमीशन की बैठक में विभाग के प्रस्तावित पुनर्गठन पर आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।
विधानसभा में मामला उठने, इंजीनियरों के सांकेतिक विरोध और अब पेनडाउन हड़ताल की घोषणा के बाद सरकार तथा रैशनलाइजेशन कमीशन के अगले कदम पर निगाहें टिक गई हैं। आने वाले दिनों में सरकार और इंजीनियरिंग विंग के बीच संवाद के जरिए इस विवाद का समाधान निकलता है या आंदोलन और आगे बढ़ता है, यह 10 सितंबर की बैठक के बाद काफी हद तक स्पष्ट हो सकता है।
तकनीकी ढांचे में बदलाव बना अहम मुद्दा
पंचायती राज विभाग के इंजीनियरिंग विंग के पुनर्गठन का मामला अब केवल विभागीय प्रशासनिक बदलाव तक सीमित नहीं रह गया है। विधानसभा में मामला उठने के बाद यह राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
विभाग में तकनीकी अधिकारियों की तैनाती, नियंत्रण और पदों की संख्या में प्रस्तावित बदलाव सीधे तौर पर ग्रामीण विकास कार्यों की तकनीकी निगरानी से जुड़े हैं। ऐसे में सरकार के सामने एक ओर प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर इंजीनियरिंग विंग की आपत्तियों और तकनीकी जरूरतों के बीच संतुलन कायम करने का सवाल भी है।