हरियाणा में नदियां उफान पर, कुरुक्षेत्र के 4 गांवों में बाढ़ का खतरा; कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
punjabkesari.in Saturday, Jul 11, 2026 - 05:14 PM (IST)
कुरुक्षेत्र (कपिल शर्मा) : हरियाणा में मैदानी क्षेत्रों में मानसून की रफ्तार भले ही धीमी पड़ी हो, लेकिन पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर अब प्रदेश में साफ दिखाई देने लगा है। कई नदियां उफान पर हैं, जिससे अनेक जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। कुरुक्षेत्र में मारकंडा नदी के बढ़े जलस्तर से चार गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए, जबकि अंबाला में टांगरी नदी के बढ़ते पानी के बीच श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के बाद परिजनों को चिता की सुरक्षा के लिए पहरा देना पड़ा।
कुरुक्षेत्र के शाहाबाद क्षेत्र में शनिवार सुबह मारकंडा नदी में करीब 14,294 क्यूसेक पानी पहुंचने से कठवा, कलसाना, तंगोर और मोहनपुर गांव प्रभावित हुए। सबसे अधिक असर कठवा गांव में देखने को मिला, जहां मुख्य संपर्क सड़क पानी में डूब जाने से आवागमन बाधित हो गया। कई स्थानों पर स्कूल बसों के पहिए तक पानी में डूब गए और आसपास के खेत भी जलमग्न हो गए। हालांकि लगभग तीन घंटे बाद नदी का जलस्तर घटकर 11,711 क्यूसेक रह गया, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली।
अंबाला कैंट के बब्याल क्षेत्र में टांगरी नदी किनारे बने श्मशान घाट में एक ऑटो चालक का अंतिम संस्कार किया गया था। इसी दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने लगा। पानी को चिता की ओर बढ़ता देख परिजन तुरंत वापस पहुंचे और चिता को सुरक्षित रखने के लिए पहरा देने लगे। राहत की बात यह रही कि जलस्तर समय रहते कम हो गया और चिता तक पानी नहीं पहुंचा।
उधर, पंचकूला में घग्गर, कौशल्या और टांगरी नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी है। 28 अगस्त 2026 तक नदी-नालों के किनारे जाने पर प्रतिबंध रहेगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हथिनीकुंड बैराज पर भी यमुना का जलप्रवाह बढ़ा हुआ दर्ज किया गया। शनिवार सुबह 10 बजे बैराज पर लगभग 33 हजार क्यूसेक पानी पहुंचा। अतिरिक्त पानी यमुना के रास्ते दिल्ली की ओर छोड़ा गया, जबकि पश्चिमी यमुना नहर के माध्यम से हरियाणा और दिल्ली को निर्धारित जलापूर्ति जारी रही।
मौसम विभाग ने पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल और करनाल में बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार मानसून की गतिविधियों में कमी के बावजूद वातावरण में नमी बनी रहने से लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के अधिकतम तापमान में औसतन 2.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि न्यूनतम तापमान में मामूली गिरावट रही।