विपक्षी विधायकों से दुर्व्यवहार मामला: कुलदीप शर्मा ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी, दोषी पुलिसकर्मियों पर मांगी कार्रवाई
punjabkesari.in Saturday, Aug 29, 2026 - 05:14 PM (IST)
चंडीगढ़( चंद्र शेखर धरणी): हरियाणा विधानसभा परिसर के बाहर विपक्षी विधायकों के साथ चंडीगढ़ पुलिस के कथित दुर्व्यवहार का मामला अब केवल राजनीतिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि विधानसभा के अधिकारों, विधायकों के विशेषाधिकार और लोकतांत्रिक मर्यादाओं से जुड़ा गंभीर प्रश्न बनता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम पर हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए विधानसभा अध्यक्ष से मामले का स्वतः संज्ञान लेने और दोषी पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा ने एक लिखित बयान जारी कर कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के पद के प्रति उनके मन में अत्यंत गहरा सम्मान है, क्योंकि अध्यक्ष सदन के सदस्यों के अधिकारों के संरक्षक होते हैं। उनके अनुसार अध्यक्ष की जिम्मेदारी केवल सदन के भीतर कार्यवाही को सुचारु रूप से संचालित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सदन के बाहर भी यदि किसी विधायक के अधिकारों का उल्लंघन होता है तो उस पर अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
स्पीकर सदस्यों के अधिकारों के भी संरक्षक : कुलदीप शर्मा
कुलदीप शर्मा ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष सदन के अध्यक्ष होने के साथ-साथ उसके सदस्यों के अधिकारों और विशेषाधिकारों के संरक्षक भी हैं। यदि किसी सदस्य के अधिकारों का उल्लंघन होता है तो वह विशेषाधिकार हनन का विषय बन सकता है। ऐसी स्थिति में अध्यक्ष द्वारा स्वतः संज्ञान लिया जाना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
पूर्व स्पीकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब विधानसभा सत्र के दौरान सदन के बाहर कांग्रेस विधायकों और पुलिस के बीच टकराव का मामला राजनीतिक रूप से तूल पकड़ चुका है। विपक्ष की ओर से पुलिस पर बल प्रयोग और विधायकों को विधानसभा की ओर जाने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं।
कुलदीप शर्मा ने कहा कि विधानसभा परिसर के बाहर जिस प्रकार नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और बल प्रयोग किया गया, वह हरियाणा की विधायी व्यवस्था के इतिहास में शर्मनाक अध्याय के रूप में देखा जा सकता है।
80 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री के साथ व्यवहार पर सवाल
पूर्व स्पीकर ने विशेष रूप से भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ हुए कथित व्यवहार पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 80 वर्षीय, दो बार मुख्यमंत्री रह चुके और वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष के रूप में विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ नेता के साथ पुलिस का इस प्रकार का व्यवहार गंभीर सवाल खड़े करता है।
कुलदीप शर्मा के अनुसार कुछ दृश्यों में कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स भी पुलिस की धक्का-मुक्की और बल प्रयोग के कारण घायल दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि यदि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार हुआ है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
किसके निर्देश पर हुई कार्रवाई, जांच जरूरी
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठाया है कि चंडीगढ़ पुलिस के अधिकारी किसके निर्देश पर कार्रवाई कर रहे थे। उनका कहना है कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि क्या पुलिस को निर्वाचित विधायकों को विधानसभा सत्र में जाने से रोकने या उन्हें कथित रूप से गलत तरीके से रोककर रखने के निर्देश दिए गए थे।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन कोई असामान्य बात नहीं है। राजनीतिक दल और उनके जनप्रतिनिधि अपनी मांगों तथा असहमति को विभिन्न लोकतांत्रिक तरीकों से व्यक्त करते रहे हैं। काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन करना या विधानसभा के बाहर तख्तियां लेकर विरोध जताना अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता।ऐसे में पुलिस की कार्रवाई की परिस्थितियों, उसके आदेश और उसके पीछे मौजूद प्रशासनिक निर्णय की जांच होना आवश्यक है।
विधानसभा में विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की पैरवी
कुलदीप शर्मा ने कांग्रेस विधायकों को इस मामले को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखने की सलाह दी है। उन्होंने सुझाव दिया कि चंडीगढ़ पुलिस और कथित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ हरियाणा विधानसभा में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जाना चाहिए।
उनका मानना है कि यदि किसी विधायक को विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने के लिए सदन की ओर जाने से रोका गया और उसके साथ बल प्रयोग किया गया, तो इस पूरे घटनाक्रम को विधानसभा के विशेषाधिकारों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर विधानसभा की संस्थागत गरिमा और सदस्यों के अधिकारों से जुड़ सकता है।
BNS के तहत कानूनी कार्रवाई का सुझाव
पूर्व स्पीकर ने कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाने की भी सलाह दी है। उन्होंने कहा कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ BNS की धारा 126 और 221 के तहत गलत तरीके से रोकने के आरोपों की जांच कराई जा सकती है। इसके साथ ही यदि किसी विधायक के साथ मारपीट अथवा अनावश्यक बल प्रयोग हुआ है तो उस पहलू की भी कानून के अनुसार जांच होनी चाहिए।
हालांकि किसी अधिकारी की आपराधिक जिम्मेदारी जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जा सकती है। यही कारण है कि कुलदीप शर्मा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पर विशेष जोर दिया है।
राज्यपाल, लोकसभा अध्यक्ष और राष्ट्रपति तक मामला ले जाने की सलाह
कुलदीप शर्मा ने सुझाव दिया है कि प्रभावित विधायक और कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल इस मामले को संवैधानिक पदाधिकारियों के सामने भी उठाएं। इसके तहत लोकसभा अध्यक्ष, हरियाणा के राज्यपाल, चंडीगढ़ के प्रशासक और भारत के राष्ट्रपति के समक्ष शिकायत और विरोध दर्ज कराने की बात कही गई है।
उनका मानना है कि यदि निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर कोई गंभीर विवाद उत्पन्न होता है तो संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष तथ्य रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
वर्तमान स्पीकर के सम्मान की भी अपील
अपने बयान में कुलदीप शर्मा ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और संस्थागत संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के पद को पूरा सम्मान दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार इस पूरे मामले में व्यक्ति और पद के बीच अंतर रखा जाना चाहिए तथा विधानसभा अध्यक्ष की संवैधानिक भूमिका को मजबूती प्रदान की जानी चाहिए।
उन्होंने मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष से अपील की कि वे मामले की जांच के आदेश दें और यदि जांच में चंडीगढ़ पुलिस के किसी अधिकारी की गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में विधानसभा और उसके सदस्यों के अधिकारों का उल्लंघन न हो।
विपक्ष के अधिकार और प्रशासन की जवाबदेही बने केंद्रीय मुद्दा
कुलदीप शर्मा के बयान ने पूरे घटनाक्रम को एक नए राजनीतिक और संवैधानिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है। सवाल अब केवल इस बात का नहीं है कि विधानसभा के बाहर प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ, बल्कि यह भी है कि निर्वाचित विधायकों के साथ प्रशासनिक एजेंसियों का व्यवहार किस सीमा तक उचित हो सकता है।
लोकतंत्र में विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है और प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी। दोनों के बीच संतुलन लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी जरूरत है। यदि विरोध के दौरान कानून का उल्लंघन हुआ था तो पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन यदि निर्वाचित विधायकों को उनके विधायी दायित्व निभाने से अनुचित रूप से रोका गया या अनावश्यक बल प्रयोग हुआ, तो उसकी भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा का बयान इसी जवाबदेही की मांग को मजबूती देता है। अब नजर इस बात पर है कि विधानसभा अध्यक्ष इस पूरे घटनाक्रम का स्वतः संज्ञान लेते हैं या नहीं और यदि जांच होती है तो उसके निष्कर्षों के आधार पर क्या कार्रवाई सामने आती है। राजनीतिक विवाद से आगे बढ़कर यह मामला हरियाणा विधानसभा की गरिमा, विधायकों के विशेषाधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा की परीक्षा बन गया है।