किरकिरी के बाद जागा GMDA-PWD-NHAI, अंडरपास में जलभराव रोकने का होगा समाधान
punjabkesari.in Wednesday, Aug 05, 2026 - 09:23 PM (IST)
गुड़गांव, (ब्यूरो): हर मानसून में जलभराव के कारण चर्चा में रहने वाले बजघेड़ा अंडरपास की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में तीन सरकारी एजेंसियां सांझा रणनीति के साथ मैदान में उतरी हैं। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए ), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई ) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी ) ने संयुक्त कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत अंडरपास तक बारिश का पानी पहुंचने से रोकने और वहां जमा पानी की निकासी को तेज करने के लिए कई इंजीनियरिंग उपाय किए जाएंगे।
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हाल ही में हुई बारिश के दौरान बजघेड़ा अंडरपास के पास सड़क पर फिर जलभराव होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यातायात भी प्रभावित हुआ था। इसके बाद जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पी.सी. मीणा ने इस समस्या का स्वतः संज्ञान लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित विभागों के साथ मिलकर ऐसा समाधान तैयार किया जाए, जिससे हर बारिश में दोहराई जाने वाली इस समस्या पर स्थायी रूप से अंकुश लगाया जा सके।
सीईओ के निर्देश के बाद जीएमडीए , एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी(बी एंड आर) के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से बजघेड़ा अंडरपास और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया। मौके पर जलभराव के कारणों का अध्ययन करने के बाद तीनों एजेंसियों ने जिम्मेदारियां तय करते हुए विस्तृत कार्ययोजना बनाई। योजना का उद्देश्य केवल बारिश के दौरान पानी निकालना नहीं, बल्कि अंडरपास तक पहुंचने वाले पानी की मात्रा को ही कम करना और निकासी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। योजना के अनुसार, एनएचएआई , जिसके अधिकार क्षेत्र में बजघेड़ा अंडरपास आता है, अंडरपास की एप्रोच रोड पर टेबल टॉप तैयार करेगा। इन संरचनाओं का उद्देश्य तेज बारिश के दौरान बहकर आने वाले पानी के प्रवाह को नियंत्रित करना है ताकि बड़ी मात्रा में पानी सीधे अंडरपास में न पहुंचे। इसके साथ ही एनएचएआई मौजूदा सम्प वेल और पंपिंग सिस्टम की तकनीकी जांच भी करेगा। जहां भी उपकरणों की क्षमता कम मिलेगी या मरम्मत की जरूरत होगी, वहां सुधार का काम किया जाएगा, जिससे बारिश के दौरान पानी की निकासी अधिक तेजी से हो सके।
दूसरी ओर, पीडब्ल्यूडी(बी एंड आर) अंडरपास की ओर बहकर आने वाले वर्षा जल को बीच में ही रोकने के लिए सरफेस ड्रेन बनाएगा। इन नालों को जीएमडीए के लेग-1 मास्टर ड्रेन से जोड़ा जाएगा। इससे बारिश का पानी सीधे शहर के मुख्य ड्रेनेज नेटवर्क में पहुंच जाएगा और अंडरपास में पानी जमा होने की संभावना काफी कम हो जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरी योजना की सबसे बड़ी विशेषता तीनों एजेंसियों के बीच समन्वय है। अब तक अलग-अलग विभाग अपने-अपने स्तर पर काम करते रहे, लेकिन इस बार सभी एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्यों की निगरानी करेंगी और समयबद्ध तरीके से इन्हें पूरा कराने पर फोकस रहेगा। इससे परियोजना के क्रियान्वयन में देरी और समन्वय की कमी जैसी समस्याओं से भी बचा जा सकेगा।
बजघेड़ा अंडरपास शहर के उन संवेदनशील स्थानों में शामिल है, जहां मानसून के दौरान जलभराव की समस्या बार-बार सामने आती रही है। इस कारण नजफगढ़ -गुरुग्राम मार्ग का उपयोग करने वाले वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार यातायात धीमा पड़ जाता है और लंबा जाम भी लग जाता है। ऐसे में तीनों एजेंसियों की संयुक्त पहल से स्थानीय लोगों और दैनिक यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। जीएमडीए का कहना है कि यह पहल केवल बजघेड़ा अंडरपास तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में प्राधिकरण ने शहर के स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज नेटवर्क को मजबूत करने, मास्टर ड्रेनों की क्षमता बढ़ाने, नए ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में लगातार काम किया है। बजघेड़ा अंडरपास के लिए तैयार की गई यह संयुक्त कार्ययोजना भी उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मानसून के दौरान जलभराव की घटनाओं को कम करना और शहर की जलनिकासी व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाना है।