हरियाणा का बीबीपुर मॉडल  देश को दे रहा महिला सशक्तिकरण के द्वारा ग्रामीण विकास की दिशा

punjabkesari.in Saturday, Apr 23, 2022 - 04:23 PM (IST)

जींद: आज पंचायती राज दिवस पर हरियाणा के एक ऐसे मॉडल की बात की बात करेंगे जिसकी तारीफ़ पिछले 12 वर्षों के दौरान देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के द्वारा ही नहीं वरन बाहरी देशों में ही हुई है । 

हरियाणा के जींद ज़िले के बीबीपुर गॉंव के सरपंच सुनील जागलान ने अपने मिशन पॉशिबल गॉव बने शहर से सुंदर के तहत प्रदेश ही नहीं वरन पूरे देश को नई पंचायती राज व्यवस्थाएँ दी जबकि उनकी नई शुरूवातों के लिए प्रशासन व शासन ने काफ़ी प्रताड़ित भी होना पड़ा  ।  कम्प्यूटर साइंस से स्नातक सुनील जागलान ने वर्ष 2010 में सबसे पहले देश की पहली डिजिटल पंचायत होने का गौरव बीबीपुर पंचायत को दिलाया जिसके तहत गॉंव की ऑफिसियल वेबसाईट बनाई गई लेकिन प्रशासन ने उस समय इस पर इंक्वॉयरी व कारण बताओ नोटिस भी जारी किए लेकिन फिर यह मॉडल आज पूरे देश में लागू हो चुका है । 

बीबीपुर गॉंव का सरपंच रहते हुए सुनील जागलान ने देश की पहली महिला ग्राम का आयोजन कर देश भर में सुर्ख़ियाँ बटोरी उसके बाद वर्ष 2012 से केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा देश भर की पंचायतों को महिला ग्राम सभी करने का आदेश पारित किया गया । ग़ौरतलब है कि इससे पहले उतर भारत में महिलाओं की ग्राम सभा मे भागेदारी न के बराबर होती थी । आगे इसी व्यवस्था को आगे को आगे बढ़ाते हुए बेटी बचाओ अभियान शुरू किया जो एक बड़ी योजना बनकर देश भर में लागू हुआ ।  इसके साथ  लाडो पुस्तकालय वर्ष 2013 में ही तैयार गया जिसमें लडकीयॉं गॉव में ही रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी  कर सके लेकिन जिनके लिए उनको लगातार प्रशासन द्वारा नोटिस जारी होते रहे कि कि यह पंचायती राज क़ानून में नहीं है जिसके लिए काफ़ी बार इंक्वॉयरी हुई और अब देश के हर हिस्से में इन लाईब्रेरी के मॉडल को अपनाया गया । 
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बीबीपुर मॉडल द्वारा ग्राम सचिवालय की अवधारणा को वर्ष 2012 में विकसित  किया गया  जिसे सरकारों ने अपना कर लागू भी किया ।  जागलान द्वारा कोरोना कॉल स्वयं गुरुग्राम के नयागांव में ऑफ़िसल ई ग्राम सभा करवाकर यह मॉडल  सरकार को दिया गया जिसे सरकार ने लागू किया और कोविड दौरान भी गॉंव के कार्यों में गति आ सकी ।  इसके साथ बेटियों के नाम नेमप्लेट अभियान को वर्ष 2015 में लागू  किया जिसे कई राज्य सरकारों के साथ पंचायतों ने भी लागू किया और महिलाओं के प्रोपर्टी राईट्स के हक़ को एक आधारभूत शुरूवात मिली । 

सुनील जागलान के महिला सशक्तिकरण के द्वारा ग्रामीण विकास मॉडल को भारत सरकार द्वारा दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया तथा तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जी को भी यह मॉडल भाया और उन्होंने इसे 100 गाँवों में लागू किया तथा सुनील जागलान को इसके लिए 50 लाख रूपए का अनुदान भी मिला । 

इसके साथ ही उन्होंने गॉंव के नाम से लेकर रास्तों व पार्क के नाम महिलाओं के सम्मान में रखे जिससे महिला सशक्तिकरण की नई अलख जगी जिसे बाद में काफ़ी पंचायतो ने लागू किया ।  सुनील जागलान के मॉडल देश की दहलीज़ लॉंग कर सार्क देशों के गॉंवो मे पहुँच रहा है जहॉं नेपाल सरकार ने भी इनके मॉडल के लिए इनको सम्मानित किया । 

ग़ौरतलब है कि बीबीपुर मॉडल को संयोजक सुनील जागलान अभी उतर प्रदेश , हिमाचल उत्तराखंड , गोवा , महाराष्ट्र, राजस्थान , तेलंगाना के काफ़ी गॉंवों में भी इस मॉडल के द्वारा कार्य करवा रहे हैं जिसके लिए राज्य सरकारें भी इनको कार्य करने का न्यौता दे रही है ।


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Content Writer

Isha

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