Haryana : अरावली में प्रस्तावित जंगल सफारी पर विवाद, प्रदेश सरकार करेगी अब कानूनी लड़ाई, बनाई यह नई रणनीति
punjabkesari.in Thursday, Feb 19, 2026 - 08:36 PM (IST)
चंडीगढ़ : महत्वाकांक्षी जंगल सफारी प्राजैक्ट पर लगी रोक के बाद हरियाणा सरकार अब कानूनी दांव खेलने की तैयारी में है। प्रदेश सरकार जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित परियोजना से अरावली वन क्षेत्र को कोई नुकसान नहीं होगा और पर्यावरण संरक्षण के सभी मानकों का पालन किया जाएगा।
इस दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने स्पष्ट किया कि विशेषज्ञों से परामर्श के बाद याचिका तैयार की जा रही है और अगले सप्ताह इसे दायर कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अरावली संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है और उसी आधार पर प्रोजेक्ट को अंतिम रूप दिया गया है।
10 हजार एकड़ में प्रस्तावित है विश्वस्तरीय पार्क
प्रदेश सरकार ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में अरावली से सटे 10 गांवों की जमीन पर करीब 10 हजार एकड़ क्षेत्र में जंगल सफारी पार्क विकसित करने की योजना बनाई है। पहले चरण में लगभग 2500 एकड़ में कार्य शुरू किया जाना था। सरकार का दावा है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं की आपत्ति, अदालत की रोक
अरावली संरक्षण के लिए कार्यरत पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस परियोजना का विरोध करते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचाया था। 12 फरवरी को सुनवाई के दौरान अदालत ने परियोजना पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि जब तक विशेषज्ञ अरावली की स्पष्ट परिभाषा तय नहीं करते, तब तक अरावली क्षेत्र में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
अब कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
सरकार का कहना है कि पुनर्विचार याचिका में सभी पर्यावरणीय और कानूनी पहलुओं को विस्तार से रखा जाएगा। मंत्री ने उम्मीद जताई कि अदालत तथ्यों पर गौर कर राज्य को आगे बढ़ने की अनुमति देगी। जंगल सफारी को लेकर प्रदेश में सियासी और पर्यावरणीय बहस तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भविष्य तय करेगी।
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