उद्योगपतियों को सीधे न्योता देगी हरियाणा सरकार, जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑन-द-स्पॉट मंजूरी का मिलेगा भरोसा
punjabkesari.in Thursday, Aug 20, 2026 - 08:37 AM (IST)
चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने अब अपनी रणनीति को जमीनी स्तर पर उतारना शुरू कर दिया है। सरकार की नई औद्योगिक नीतियों के बाद अब अगला बड़ा फोकस निवेशकों तक सीधे पहुंच बनाने और प्रदेश में बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट लाने पर है। इसी रणनीति के तहत अप्रैल 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ से पहले देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में रोड शो और निवेशक बैठकें आयोजित की जाएंगी।
इस पूरी कवायद की निगरानी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मुख्यमंत्री के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के स्तर पर की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को केवल नीतियों की जानकारी देने के बजाय उन्हें हरियाणा में निवेश के लिए तैयार प्रोजेक्ट, सुविधाएं, भूमि, बुनियादी ढांचा और समयबद्ध मंजूरी की व्यवस्था का भरोसा दिया जाए।
10.55 लाख करोड़ निवेश से 15 लाख रोजगार का लक्ष्य
हरियाणा सरकार ने हाल ही में मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति और हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति-2026 लागू की हैं। इन दोनों नीतियों को प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली प्रमुख पहल माना जा रहा है।
मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति के तहत प्रदेश में करीब 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने और 10 लाख नए रोजगार पैदा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति के माध्यम से करीब 55 हजार करोड़ रुपये का निवेश और 5 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य है।
सरकार की व्यापक औद्योगिक रणनीति का लक्ष्य इन पहलों के माध्यम से कुल मिलाकर 10.55 लाख करोड़ रुपये के निवेश और 15 लाख रोजगार के अवसर तैयार करना है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार अब इसी लक्ष्य को निवेशकों के सामने प्रमुखता से रखने जा रही है।
नीतियों को कागज से जमीन पर उतारना प्राथमिकता
मुख्यमंत्री के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सरकार की औद्योगिक नीतियों को विभागीय स्तर पर लागू कराने के साथ-साथ विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।
दूसरी ओर उद्योग विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के स्तर पर नई औद्योगिक नीतियों के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों और सुविधाओं की विस्तृत योजनाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति में 37 आर्थिक और 23 सुविधाओं से जुड़े बदलाव किए गए हैं। अब इन प्रावधानों को लागू करने के लिए विस्तृत योजनाएं तैयार की जाएंगी।
उद्योगपतियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की प्रक्रिया को 20 अगस्त तक मंजूरी मिलने की संभावना है। इसके बाद सितंबर के पहले सप्ताह में संबंधित पोर्टल शुरू करने की तैयारी है। सरकार की कोशिश है कि निवेशकों को आवेदन, स्वीकृति और प्रोत्साहन की प्रक्रिया में अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
मुंबई से शुरू होगा निवेश जुटाने का बड़ा अभियान
‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ की तैयारी का पहला बड़ा चरण मुंबई से शुरू होगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 23 से 25 अगस्त तक मुंबई में निवेशकों और उद्योग जगत के प्रमुख लोगों से मुलाकात करेंगे।
23 अगस्त की शाम मुख्यमंत्री रोड शो में उद्योगपतियों को हरियाणा की औद्योगिक संभावनाओं और नई नीतियों की जानकारी देंगे। इसके बाद करीब 200 उद्योगपतियों और कारोबारियों के साथ डिनर का कार्यक्रम रहेगा। 24 अगस्त की सुबह निवेशकों के साथ ब्रेकफास्ट बैठक होगी, जिसमें करीब 25 प्रमुख लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसी दिन दोपहर में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्लानरी सेशन होगा। इसमें करीब 250 उद्योगपति और कारोबारी भाग लेंगे। इस दौरान हरियाणा की औद्योगिक नीतियों, निवेश संभावनाओं और सरकार की सुविधाओं को विस्तार से प्रस्तुत किया जाएगा।
24 अगस्त की शाम मुख्यमंत्री उद्योग जगत के प्रमुख नेताओं के साथ वन-टू-वन बैठकें करेंगे। इसमें करीब 10 प्रमुख उद्योगपतियों के शामिल होने की संभावना है।
25 अगस्त को हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारी निवेशकों के साथ वन-टू-वन बिजनेस मीटिंग करेंगे। करीब 25 से 30 प्रमुख उद्योगपतियों के साथ इन बैठकों में हरियाणा की नीतियों और उपलब्ध निवेश अवसरों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
मुंबई के बाद बेंगलुरु और हैदराबाद पर नजर
मुंबई के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में बेंगलुरु और हैदराबाद में भी रोड शो प्रस्तावित हैं। इन शहरों का चयन आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, स्टार्टअप, फार्मा और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में मौजूद बड़ी कंपनियों को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार की कोशिश है कि हरियाणा की पारंपरिक औद्योगिक ताकत के साथ नए क्षेत्रों में भी बड़े निवेश लाए जाएं। इसके लिए मुख्यमंत्री के साथ वरिष्ठ अधिकारियों की टीम संभावित निवेशकों और औद्योगिक समूहों से सीधा संवाद करेगी।
विदेशों से निवेश लाने की भी तैयारी
राज्य सरकार केवल घरेलू निवेश तक सीमित नहीं रहना चाहती। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कुछ देशों का दौरा भी कर सकते हैं। इसके लिए ऐसे देशों की पहचान की जा रही है, जहां से हरियाणा में बड़े पैमाने पर निवेश आने की संभावना है।
इस पूरी रणनीति में उद्योग विभाग की भूमिका अहम होगी। डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में विभाग यह आकलन करेगा कि किन सेक्टरों में विदेशी कंपनियों को हरियाणा में निवेश के लिए आकर्षित किया जा सकता है और उनके लिए कौन-कौन से प्रोत्साहन प्रभावी रहेंगे।
स्टार्टअप में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य
हरियाणा की स्टार्टअप नीति में भी महिला उद्यमियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ सब्सिडी और आर्थिक सहायता में भी बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया है।
सरकार की रणनीति स्पष्ट है कि निवेश केवल बड़े औद्योगिक समूहों तक सीमित न रहे, बल्कि स्टार्टअप, एमएसएमई और स्थानीय उद्यमियों तक भी पहुंचे।