हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: छोटे शहरों में अवैध कॉलोनियों पर कसेगा शिकंजा, लागू हुई नई टाउन प्लानिंग नीति
punjabkesari.in Wednesday, Aug 05, 2026 - 10:13 AM (IST)
चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी़): हरियाणा सरकार ने छोटे शहरों में अनियोजित शहरीकरण और अवैध कॉलोनियों की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदेश की 76 नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के लिए पहली बार अलग टाउन प्लानिंग नीति लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब इन क्षेत्रों में कॉलोनियां केवल सरकारी लाइसेंस और निर्धारित शहरी मानकों के अनुरूप ही विकसित की जा सकेंगी।
अब तक नगर परिषद और नगर पालिका क्षेत्रों में नियोजित कॉलोनियों के लिए स्पष्ट लाइसेंस व्यवस्था नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियां विकसित होती रही हैं। लोग प्लॉट खरीदकर मकान तो बना लेते थे, लेकिन बाद में सड़क, पेयजल, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए वर्षों तक परेशान होना पड़ता था। नई नीति का उद्देश्य इसी व्यवस्था को बदलना है।
पहली बार छोटे शहरों के लिए अलग प्लानिंग व्यवस्था
अब तक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की लाइसेंस प्रणाली मुख्य रूप से नियंत्रित क्षेत्रों और मास्टर प्लान वाले इलाकों तक सीमित थी। नई नीति के लागू होने से अब नगर परिषद और नगर पालिका क्षेत्रों की जमीन भी नियोजित विकास के दायरे में आ जाएगी। इससे छोटे शहरों में भी सुनियोजित आवासीय कॉलोनियों का विकास संभव होगा।
सिर्फ प्लॉट नहीं, पूरी कॉलोनी विकसित करनी होगी
नई नीति में डेवलपर्स की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। अब केवल जमीन काटकर प्लॉट बेचने की अनुमति नहीं होगी। कॉलोनी विकसित करने के लिए कम से कम पांच एकड़ भूमि होना अनिवार्य होगा। परियोजना तक 33 फुट चौड़ी सड़क का संपर्क और कॉलोनी के भीतर 10 मीटर चौड़ी सड़कें बनानी होंगी। कुल प्लॉटों में कम से कम 50 प्रतिशत प्लॉट 150 वर्गमीटर या उससे कम आकार के होंगे, ताकि मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को भी किफायती आवास मिल सके।
मूलभूत सुविधाएं पहले, मंजूरी बाद में
नई व्यवस्था में कॉलोनी की मंजूरी को आधारभूत सुविधाओं से सीधे जोड़ दिया गया है। डेवलपर को पेयजल, सीवरेज, वर्षा जल निकासी और अन्य आवश्यक शहरी सुविधाओं की पूरी व्यवस्था करनी होगी। जहां सरकारी जलापूर्ति उपलब्ध होगी, वहां उससे कनेक्शन लिया जाएगा, अन्यथा वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। इसके साथ ही सीवरेज नेटवर्क और आवश्यक क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करना भी अनिवार्य रहेगा।
लाइसेंस शुल्क और विकास शुल्क भी निर्धारित
सरकार ने नई नीति में लाइसेंस प्रक्रिया के साथ शुल्क का ढांचा भी स्पष्ट कर दिया है। डेवलपर को 10 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से स्क्रूटनी फीस जमा करनी होगी। इसके अलावा परिवर्तन शुल्क (कन्वर्जन चार्ज) का 50 प्रतिशत तथा बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) का 25 प्रतिशत विकास शुल्क के रूप में देना होगा। नगर परिषद और नगर पालिकाओं के लिए लाइसेंस शुल्क भी टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की निर्धारित दरों के 25 प्रतिशत के आधार पर तय किया गया है।
अवैध कॉलोनियों पर लगेगी रोक
सरकार का मानना है कि नई नीति से निजी डेवलपर्स को वैध तरीके से कॉलोनियां विकसित करने का स्पष्ट रास्ता मिलेगा। साथ ही स्थानीय निकायों को स्वीकृत लेआउट, निर्धारित मानकों और मूलभूत सुविधाओं के साथ विकास सुनिश्चित कराने का अधिकार भी मिलेगा। इससे भविष्य में अवैध कॉलोनियों की संख्या घटने और छोटे शहरों में सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
अब क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
नई नीति लागू होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती इसके प्रभावी क्रियान्वयन की होगी। यदि बिना लाइसेंस कॉलोनियां विकसित करने वालों पर सख्ती की गई और स्वीकृत परियोजनाओं में तय मानकों का पालन सुनिश्चित कराया गया, तो छोटे शहरों में वर्षों से चली आ रही अनियोजित बसावट, खराब सड़कें, पेयजल और सीवरेज जैसी समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
"नई टाउन प्लानिंग नीति का उद्देश्य नगर परिषद और नगर पालिका क्षेत्रों में अनियोजित शहरी विकास पर प्रभावी अंकुश लगाना है। अब कॉलोनी विकास को स्पष्ट नियमों, बुनियादी सुविधाओं और जवाबदेही से जोड़ा गया है। इससे किफायती आवास को बढ़ावा मिलेगा, अवैध कॉलोनियों की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और छोटे शहरों में नियोजित एवं टिकाऊ शहरी विकास का नया ढांचा तैयार होगा।"
— विपुल गोयल, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री