चंडीगढ़ की कानून-किताब में हरियाणा का हिस्से सिर्फ सात कानून, आरक्षण से लेकर अग्निशमन तक अहम प्रभाव

punjabkesari.in Wednesday, Aug 12, 2026 - 02:26 PM (IST)

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : चंडीगढ़ में लागू पंजाब और हरियाणा के कानूनों की तस्वीर में पंजाब का स्पष्ट दबदबा दिखाई देता है। केंद्र सरकार के अनुसार, चंडीगढ़ में दोनों राज्यों के कुल 245 कानून लागू हैं, जिनमें 238 पंजाब के और केवल 7 हरियाणा के हैं। संख्या के लिहाज से पंजाब के कानूनों की हिस्सेदारी करीब 97 प्रतिशत है, जबकि हरियाणा के कानून लगभग तीन प्रतिशत हैं। हालांकि संख्या कम होने के बावजूद हरियाणा से जुड़े सात कानूनों का प्रभाव आरक्षण, आवास, विवाह पंजीकरण, आवश्यक सेवाओं और अग्निशमन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक है।

हरियाणा के सात कानूनों का चंडीगढ़ पर सीधा असर

हरियाणा के जिन सात कानूनों को चंडीगढ़ में लागू किया गया है, उनमें हरियाणा आवास बोर्ड कानून, भिक्षावृत्ति रोकथाम कानून, आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण कानून, कृषि ऋणग्रस्तता राहत कानून, विवाह पंजीकरण कानून, पिछड़ा वर्ग आरक्षण कानून तथा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं कानून शामिल हैं।इनमें हरियाणा पिछड़ा वर्ग आरक्षण कानून विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसके तहत चंडीगढ़ में सरकारी सेवाओं और उच्च शिक्षण संस्थानों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण से संबंधित व्यवस्था लागू होती है। इसी तरह अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा कानून शहर में अग्नि सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करता है।

पंजाब के कानूनों का डेढ़ सदी पुराना ढांचा

चंडीगढ़ की कानून व्यवस्था में पंजाब के कानूनों की मौजूदगी ऐतिहासिक रूप से काफी पुरानी है। पंजाब के लागू कानूनों में 1872 का पंजाब लॉज एक्ट भी शामिल है। इसके अलावा 1887 का पंजाब टेनेंसी एक्ट, पंजाब लैंड रेवेन्यू एक्ट, 1914 का पंजाब एक्साइज एक्ट और 1918 का पंजाब कोर्ट्स एक्ट जैसे कानून भी इस ढांचे का हिस्सा हैं। यह व्यवस्था केवल पुराने कानूनों तक सीमित नहीं है। पंजाब के अपेक्षाकृत नए कानून भी चंडीगढ़ में लागू किए गए हैं। इनमें पंजाब पुलिस एक्ट, 2007, पंजाब राइट टू बिजनेस एक्ट, 2020 और पंजाब आबादी देह (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) एक्ट, 2021 शामिल हैं। इस तरह चंडीगढ़ में औपनिवेशिक दौर के कानूनों से लेकर हाल के वर्षों में बने कानूनों तक का मिश्रित कानूनी ढांचा प्रभावी है।

पिछले पांच साल में भी हरियाणा के कानूनों की मौजूदगी

चंडीगढ़ में पंजाब के कानूनों का विस्तार अधिक रहा है, लेकिन पिछले पांच वर्षों में कानूनों को लागू करने की प्रक्रिया में हरियाणा के कानूनों की भी भूमिका बनी रही है। इसी अवधि में हरियाणा का आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण कानून और पिछड़ा वर्ग आरक्षण कानून चंडीगढ़ में लागू किए गए।इसके अलावा पंजाब के दुकानों एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, ठेका श्रम, औद्योगिक विवाद, संपत्ति लेन-देन, मानव तस्करी और आबादी देह से संबंधित कानूनों को भी चंडीगढ़ तक विस्तार दिया गया। इससे साफ है कि चंडीगढ़ में कानून लागू करने की प्रक्रिया केवल ऐतिहासिक विरासत पर निर्भर नहीं है, बल्कि समय-समय पर जरूरत के अनुसार नए कानून भी लागू किए जाते हैं।

केंद्र की नीति स्पष्ट, समान कानून व्यवस्था नहीं

संसद में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के जवाब से इस व्यवस्था को लेकर केंद्र का रुख भी स्पष्ट हुआ है। पंजाब और हरियाणा के कानूनों को चंडीगढ़ में लागू करने के लिए कोई एक समान या साझा नीति बनाने की फिलहाल योजना नहीं है।केंद्र के अनुसार, पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87 के तहत केंद्र सरकार को किसी राज्य में लागू कानून को अधिसूचना के माध्यम से चंडीगढ़ में लागू करने का अधिकार है। किसी कानून को चंडीगढ़ में लागू करने का प्रस्ताव स्थानीय जरूरत और उसके संभावित कानूनी प्रभाव को ध्यान में रखकर प्रशासन की ओर से भेजा जाता है।

हरियाणा के लिए संख्या से ज्यादा अहमियत

चंडीगढ़ में हरियाणा के कानूनों की संख्या भले ही पंजाब के मुकाबले बेहद कम हो, लेकिन इसे केवल सात कानूनों तक सीमित आंकड़े के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। आरक्षण, अग्निशमन, आवश्यक सेवाएं, विवाह पंजीकरण और आवास जैसे विषय सीधे नागरिक जीवन से जुड़े हैं। इस लिहाज से चंडीगढ़ की कानून-किताब में हरियाणा की हिस्सेदारी छोटी जरूर है, लेकिन उसके कानूनों का प्रभाव महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बना हुआ है। वहीं पंजाब के 238 कानूनों की मौजूदगी चंडीगढ़ की मौजूदा कानूनी व्यवस्था में पंजाब की ऐतिहासिक और प्रशासनिक विरासत के मजबूत प्रभाव को दर्शाती है।

कानून दर कानून होगा फैसला

केंद्र ने स्पष्ट किया है कि चंडीगढ़ में लागू कानूनों के लिए फिलहाल कोई एक समान ढांचा तैयार नहीं किया जा रहा। प्रत्येक कानून को उसकी जरूरत, उद्देश्य और कानूनी प्रभाव के आधार पर अलग-अलग देखा जाएगा। यानी आने वाले समय में भी पंजाब या हरियाणा के किसी कानून को चंडीगढ़ में लागू करने, संशोधित करने या हटाने का फैसला कानून-दर-कानून ही होगा।चंडीगढ़ की यह व्यवस्था पंजाब-हरियाणा पुनर्गठन से जुड़ी ऐतिहासिक परिस्थितियों की विरासत है, लेकिन मौजूदा दौर में इसका संचालन स्थानीय जरूरतों और केंद्र के प्रशासनिक अधिकारों के आधार पर जारी है।

 


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Harman

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