Haryana : पूर्व और मौजूदा MP-MLA के पेंडिंग आपराधिक केसों पर हाई कोर्ट सख्त, जिला जजों से 15 दिन के अंदर मांगी रिपोर्ट

punjabkesari.in Wednesday, Feb 04, 2026 - 04:19 PM (IST)

चंडीगढ़ : पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को करनाल और मेवात के डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जजों को पूर्व और मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ पेंडिंग आपराधिक मामलों पर रिपोर्ट जमा करने के लिए 15 दिन का समय दिया। यह निर्देश चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने एक स्वतः संज्ञान (कोर्ट की अपनी पहल) मामले की सुनवाई करते हुए दिया। बेंच ने हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार-जनरल से कहा कि वे दिए गए समय के भीतर दोनों जजों से तुरंत रिपोर्ट मांगें। रिपोर्ट में मामलों की मौजूदा स्थिति का ज़िक्र होना चाहिए और अगर कोई देरी हुई है, तो उसके कारणों को साफ तौर पर बताया जाना चाहिए।

हाई कोर्ट के अनुसार, पूर्व और मौजूदा सांसदों और विधायकों से जुड़े 183 आपराधिक मामले फिलहाल उसके सामने पेंडिंग हैं। इसके अलावा, हाई कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध डेटा से पता चलता है कि मौजूदा और पूर्व विधायकों और सांसदों से जुड़े 159 सिविल मामले भी पेंडिंग हैं। दोबारा शुरू हुई सुनवाई के दौरान, कोर्ट को बताया गया कि दोनों डिस्ट्रिक्ट जजों से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है, जबकि निर्देश जारी किए हुए लगभग दो महीने बीत चुके हैं। बेंच ने गौर किया कि इसी तरह के आदेश पहले भी10 नवंबर, 2025 और 16 दिसंबर, 2025 को पारित किए गए थे।

SC के आदेश पर HC ने आपराधिक मामलों की कार्यवाही पर लगाई थी रोक  

"इन सांसदों/विधायकों के लिए विशेष अदालतें" शीर्षक वाला यह मामला चुने हुए प्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की प्रगति की निगरानी करने के उद्देश्य से है। हाई कोर्ट पहले ही पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के मौजूदा और पूर्व सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों में तेजी लाने का अपना इरादा बता चुका है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को निर्देश दिया था कि वे मौजूदा और पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ सभी पेंडिंग आपराधिक मामलों को, खासकर उन मामलों को जिनमें कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी, चीफ जस्टिस या नामित जजों की अध्यक्षता वाली बेंचों के सामने सूचीबद्ध करें। 

कोर्ट को मामले की सुनवाई को 2 महीने के अंदर निपटाना होगा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसी बेंचों को सबसे पहले यह तय करना चाहिए कि "एशियन रिसर्फेसिंग ऑफ रोड एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड बनाम सीबीआई" में तय किए गए सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए किसी भी रोक को जारी रखना चाहिए या नहीं। अगर स्टे ज़रूरी पाया जाता है, तो कोर्ट को मामले की सुनवाई रोज़ाना के आधार पर करनी होगी और बिना किसी बेवजह की रोक के, हो सके तो दो महीने के अंदर इसे निपटाना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, "यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि कोविड-19 की स्थिति इस निर्देश के पालन में कोई रुकावट नहीं बननी चाहिए, क्योंकि इन मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आसानी से की जा सकती है।"  

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Content Editor

Deepak Kumar

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