हरियाणा में कचरे से बनेगी बिजली, प्रपोजल को सरकार की हरी झंड़ी...यहां रहने वाले लोगों को मिलेगा लाभ

punjabkesari.in Sunday, Mar 01, 2026 - 04:29 PM (IST)

हिसार: हरियाणा में ठोस कचरा प्रबंधन को वैज्ञानिक और उचित दिशा देने की कवायद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। स्वच्छ शहरों की परिकल्पना को साकार करने के लिए शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं को प्राथमिकता में रखते हुए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है।

इसके तहत हिसार में पांच जिलों के कचरे से एनर्जी बनाई जाएगी। इसमें हिसार, जींद, फतेहाबाद, हांसी और भिवानी (सिवानी) क्षेत्र शामिल है। इन जिलों के कचरे को हिसार में एकजुट कर यहां लगने वाले प्लांट में उस कचरे को एनर्जी में बदला जाएगा।
 
निगमायुक्त नीरज ने बताया कि यह पहल केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के उद्देश्यों के अनुरूप होगी। इसका मकसद लैंडफिल पर निर्भरता कम करना और कचरे के वैज्ञानिक निपटान को बढ़ावा देना है। बता दें कि हिसार सहित गुरुग्राम और फरीदाबाद नगर निगमों में कचरे से ऊर्जा उत्पादन के लिए माडल (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) आरएफपी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से जारी मॉडल आरएफपी के आधार पर राज्य स्तर पर एक समिति का गठन किया है। इस समिति में हिसार, फरीबाद और गुरुग्राम नगर निगम के आयुक्त (हिसार से निगमायुक्त नीरज, गुरुग्राम से प्रदीप दहिया और फरीदाबाद से निगमायुक्त धीरेंद्र खड़गटा) सहित दो अतिरिक्त आयुक्त गुरुग्राम से अंकिता चौधरी और यश शामिल किए गए हैं। समिति को 20 दिनों के भीतर प्रारूप आरएफपी तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

बता दे कि आईएएस प्रदीप दहिया और आईएएस नीरज कचरा प्रबंधन पर लंबे समय से बेहतर कार्य कर रहे है। उन्होंने कचरे से एनर्जी बनाने के प्रपोजल पर सरकार की बैठकों में मुद्दा भी अपनी राय भी दी थी। ऐसे में सरकार ने इन दोनों आइएएस को इस प्रोजेक्ट में शामिल किया है।

 इन वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्रों को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर विकसित करने की योजना है। इससे निजी निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ तकनीकी दक्षता भी सुनिश्चित करने की मंशा झलकती है।

अधिकारियों का मानना है कि इससे नगर निगमों पर वित्तीय बोझ कम होगा और ऊर्जा उत्पादन का एक वैकल्पिक स्रोत भी तैयार होगा। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अनुसार, प्रारूप आरएफपी तैयार होने के बाद संबंधित नगर निगमों के साथ विस्तृत बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में परियोजना संरचना, शर्तों और व्यावहारिक पहलुओं पर गहन चर्चा होगी, ताकि अंतिम आरएफपी को लागू करने से पहले किसी भी प्रकार की कमी न रह जाए।

 
 
 


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Content Writer

Isha

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