हाईकोर्ट ने संगठित अपराध की जांच पर डी.एस.पी.स्तरीय अधिकारी की बाध्यता हटाई
punjabkesari.in Saturday, Jan 24, 2026 - 05:20 PM (IST)
चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संगठित अपराधों की जांच को लेकर मई 2025 में दिए गए अपने कड़े निर्देशों में अहम संशोधन कर दिया है। अब ऐसे मामलों की जांच अनिवार्य रूप से केवल डी.एस.पी. स्तर के अधिकारियों द्वारा ही कराए जाने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। इसके साथ ही पंजाब और हरियाणा के हर जिले में अलग-अलग विशेष टास्क फोर्स इकाई गठित (एस.टी.एफ.) करने की अनिवार्यता भी हटा दी गई है। यह आदेश जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने हरियाणा और पंजाब सरकार की ओर से दाखिल संशोधन अर्जियों को स्वीकार करते हुए पारित किया।
हाईकोर्ट ने 21 मई 2025 के अपने फैसले में निर्देश दिया था कि संगठित अपराध के सभी मामलों की जांच डिप्टी सुपरिटैंडैंट ऑफ पुलिस (डी.एस.पी.) स्तर के अधिकारी करेंगे, हरियाणा में हर जिले में स्पैशल टास्क फोर्स (एस.टी.एफ.) और पंजाब में हर जिले में एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (ए.जी.टी.एफ.) की इकाई गठित की जाएगी, जिनकी कमान वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ में होगी। इन निर्देशों का उद्देश्य संगठित अपराध और गैंगवार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना था। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने अदालत को बताया कि उसके अधिकतर निर्देशों का पालन किया जा चुका है, लेकिन हर एक संगठित अपराध के मामले में डी.एस.पी. स्तर के अधिकारी से जांच करवाना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि राज्य में वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या सीमित है। सरकार ने यह भी बताया कि वर्ष 2017 से एक समर्पित एस. टी. एफ. पहले से कार्यरत है और दिल्ली से सटे तथा संगठित अपराध से अधिक प्रभावित जिलों में इसकी फील्ड यूनिट्स पहले ही तैनात हैं।
पंजाब सरकार ने भी अदालत को अवगत करवाया कि राज्य में डी.एस.पी. रैंक के अधिकारियों की भारी कमी है। अप्रैल 2025 में गठित एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (ए.जी.टी.एफ.) पहले से ही एक वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में राज्य स्तर पर काम कर रही है। सरकार ने तर्क दिया कि हर जिले में अलग-अलग ए.जी.टी. एफ. इकाइयां बनाना मौजूदा संसाधनों पर अत्यधिक बोझ डालेगा। दोनों राज्यों की दलीलों को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने अपने पहले के निर्देशों में संशोधन कर दिया। अब अदालत ने स्पष्ट किया है कि संगठित अपराध के मामलों की जांच इंस्पैक्टर रैंक या उससे ऊपर के अधिकारी भी कर सकेंगे, लेकिन ऐसी जांच डी.एस.पी. या उससे वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में ही होगी।