स्टिल्ट+4 निर्माण नीति पर HC की सख्ती, गुरुग्राम में इंफ्रास्ट्रक्चर संकट को देखते हुए हरियाणा सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक
punjabkesari.in Friday, Apr 03, 2026 - 09:50 AM (IST)
चंडीगढ़ (धरणी) : गुरुग्राम में बढ़ते शहरी दबाव और बिगड़ती आधारभूत सुविधाओं को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा हस्तक्षेप करते हुए स्टिल्ट+4 फ्लोर निर्माण नीति पर अंतरिम रोक लगा दी। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने हरियाणा सरकार की 2 जुलाई 2024 की अधिसूचना के प्रभाव और क्रियान्वयन को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना पर्याप्त बुनियादी ढांचे के अतिरिक्त मंजिलों की अनुमति देना सार्वजनिक सुरक्षा और शहरी संतुलन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। कोर्ट ने कहा कि मामले में अंतिम सुनवाई अभी लंबित है, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए अंतरिम राहत देना आवश्यक हो गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते दबाव को लेकर कोर्ट चिंतित
सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में सामने आया कि गुरुग्राम के कई इलाकों में सड़कें कागजों में 10 से 12 मीटर चौड़ी हैं, लेकिन वास्तविक मोटरेबल क्षेत्र मात्र 3.9 से 4.8 मीटर रह गया है। यह स्थिति अवैध निर्माण, पार्किंग, सीवरेज ढांचे और अन्य अव्यवस्थाओं के कारण उत्पन्न हुई है। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि ऐसी स्थिति में स्टिल्ट+4 नीति लागू करने से जनसंख्या घनत्व और बढ़ेगा, जिससे जल आपूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, ट्रैफिक और अग्नि सुरक्षा जैसी सेवाएं पूरी तरह चरमरा सकती हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि राज्य सरकार ने विशेषज्ञ समिति की उन सिफारिशों को नजरअंदाज किया, जिनमें स्पष्ट कहा गया था कि किसी भी क्षेत्र में स्टिल्ट+4 निर्माण की अनुमति देने से पहले “इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेसिटी ऑडिट” अनिवार्य रूप से कराया जाए। कोर्ट ने भी माना कि बिना इस ऑडिट के नीति लागू करना गंभीर लापरवाही दर्शाता है। आदेश में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार ने राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से नागरिकों की सुरक्षा और स्वस्थ शहरी वातावरण के संवैधानिक दायित्व को नजरअंदाज किया है।
मामले में पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट में अंतरिम राहत की मांग रखने की अनुमति दी थी। उसी के आधार पर हाई कोर्ट ने अब लंबित अंतिम बहस के बीच यह अंतरिम आदेश पारित किया है। कोर्ट ने कहा कि मामले में अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई के बाद लिया जाएगा। फिलहाल, सरकार को स्टिल्ट+4 नीति के तहत नई मंजूरियां देने और संबंधित अधिसूचना के क्रियान्वयन से रोका गया है। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
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