हरियाणा के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, विदेश यात्रा पर लगा प्रतिबंध हाईकोर्ट ने किया रद्द

punjabkesari.in Monday, Aug 31, 2026 - 10:29 AM (IST)

हरियाणा डेस्क :  पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार के 10 जून के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर सितंबर 2026 तक प्रतिबंध लगाया गया था। अदालत ने कहा कि केवल सरकारी सेवा में होने के आधार पर नागरिकों के एक पूरे वर्ग की विदेश यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना स्पष्ट रूप से मनमाना है। 

अनुच्छेद 21 का दिया हवाला

उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को खारिज करते हुए कहा, ''वर्तमान मामले के तथ्य यह दिखाते हैं कि 'बेवजह राई का पहाड़ बनाया गया' जो हमारे संवैधानिक न्यायशास्त्र में अस्वीकार्य है।'' अदालत ने कहा कि ये प्रतिबंध सरकार के बताए गए उद्देश्य की तुलना में ''बेहद असंगत'' है। न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने 27 अगस्त को दिए अपने आदेश में राज्य के अधिकारियों को एक नर्सिंग अधिकारी को व्यावसायिक परीक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने की अनुमति देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों के अनुसार विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। याचिकाकर्ता को 10 जून के सरकारी निर्देश का हवाला देते हुए विदेश जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। 

राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि यह निर्देश अस्थायी था और रूस-यूक्रेन युद्ध तथा पश्चिम एशिया संकट के कारण मितव्ययिता उपाय के तौर पर जनहित में जारी किया गया था। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि वह 23 फरवरी 2021 को रोहतक स्थित पीजीआईएमएस में नर्सिंग अधिकारी के रूप में नियुक्त हुई थीं और इस साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया के वीजा के लिए आवेदन करने की अनुमति हासिल की थी। उन्होंने निर्धारित शुल्क जमा किया और 29 मई को उन्हें वैध वीजा जारी कर दिया गया। वकील ने अदालत के समक्ष कहा कि पेशेवर अनुभव हासिल करने और उच्च योग्यता प्राप्त करने के उद्देश्य से उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई स्वास्थ्य व्यवसायी विनियमन एजेंसी और राष्ट्रीय बोर्ड द्वारा आयोजित 'ऑब्जेक्टिव स्ट्रक्चर्ड क्लिनिकल एग्जामिनेशन' (ओएससीई) के लिए आवेदन किया था। बाद में, जब उन्होंने 18 अगस्त से अर्जित अवकाश के लिए आवेदन किया तो अधिकारियों ने 10 जून 2026 के सरकारी निर्देशों के कारण उस पर विचार नहीं किया। इन निर्देशों के तहत सरकारी कर्मचारियों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक प्राधिकरणों के कर्मचारियों को सितंबर 2026 तक आधिकारिक या निजी कारणों से विदेश यात्रा करने से रोक दिया गया था। हालांकि, चिकित्सा कारणों से आवश्यक यात्रा को इससे छूट दी गई थी। 

अदालत ने कहा कहा कि केवल सरकारी सेवा में होने के आधार पर नागरिकों के एक पूरे वर्ग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना स्पष्ट रूप से मनमाना है। इसने कहा कि राज्य विवादित निर्देशों के उद्देश्य और निजी विदेश यात्रा पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के बीच कोई तर्कसंगत संबंध स्थापित नहीं कर पाया। अदालत ने कहा, ''यह अदालत विवादित निर्देशों के माध्यम से लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के सरकार के दृष्टिकोण को सही नहीं ठहरा सकती, क्योंकि यह उसके बताए गए उद्देश्य की तुलना में बेहद असंगत है।'


 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Harman

Related News

static