हरियाणा में एग्रीकल्चर आधारित ''कल्चर''  विकसित करने की कवायद, CM खट्टर ने किए नए प्रयोग

punjabkesari.in Sunday, Aug 16, 2020 - 10:16 PM (IST)

संजय अरोड़ा: देश एवं प्रदेश की राजनीति के केंद्र बिंदु पर रहने वाले किसान का जिक्र हर मंच और भाषणों में छाया रहता है। सत्ता पक्ष जहां किसान हितैषी के सुर अलापता है तो विपक्षी दल भी इसी को लेकर अपनी राजनीतिक परिभाषा को गढ़ते दिखाई एवं सुनाई देते हैं मगर अब हरियाणा में कृषि और कृषक राजनीति में ही नहीं अपितु हकीकत में एक नए रूप दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जमीनी स्तर पर कृषि और कृषक की स्थिति को सुधारने के लिए कई ऐसे नए प्रयोगों को अंजाम दिया कि किसान भी सरकार की नीतियों से प्रभावित नजर आए। हालांकि इस अवधि दौरान किसानों के मुद्दों को लेकर कई संगठनों ने सरकार के विरुद्ध आवाज भी उठाई मगर सरकार ने किसानों की समस्याओं का त्वरित रूप से समाधान करके किसानों को साथ जोडऩे का काम किया। 

खट्टर सरकार द्वारा खेती को लेकर तैयार की जा रही पॉलिसियों से यही संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि संभवत: हरियाणा में अब वर्तमान शासन में एग्रीकल्चर आधारित 'कल्चर’ को विकसित करने की कवायद चल रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का भी कहना है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आॢथक स्थिति को सुधारने के लिए जो प्रयोगों के रूप में कदम बढ़ाए हैं उससे लगता यही है कि खट्टर सरकार प्रदेश के किसानों को अपने साथ जोड़े रखने व किसान हितैषी होने के दावे को पुख्ता करने की दिशा में प्रयास कर रही है। 

पर्यवेक्षकों के अनुसार हरियाणा की राजनीति में किसान वर्ग सत्ता की राह बनाने में निर्णायक भूमिका अदा करता है और अब तक कई बड़े राजनीतिक दलों ने किसानों के नाम पर संघर्ष के आसरे सत्ता हासिल की है और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी हरियाणा की राजनीति का मर्म समझ चुके हैं और यही वो वजह है कि अन्य वर्गों के साथ साथ सरकार का पूरा फोकस धरतीपुत्रों पर भी है।

ऐसे मिल रहे प्रमाण
गौरतलब है कि वर्ष 2014 में जब भाजपा को पहली बार बहुमत मिला तो करनाल विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए मनोहर लाल खट्टर को हाईकमान ने मुख्यमंत्री की कमान सौंपी। मुख्यमंत्री खट्टर ने कार्यभार संभालते हुए अपनी कौशलता का प्रमाण देना शुरू कर दिया। सरकार अभी प्रदेश के विकास और खेती का भविष्य बनाने का खाका खींच ही रही थी कि किसानों के अरमानों पर सफेद सुंडी ने पलीता लगा दिया। देखते ही देखते नरमा-कपास की फसल पूरी तरह से तबाह हो गई। 

मुख्यमंत्री खट्टर ने तुरंत सर्वे करवाकर किसानों के नुकसान की भरपाई की। हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में ऐसा पहली बार ही हुआ था कि नुकसान के तुरंत बाद ही किसानों को बड़ी राहत सरकार की ओर से मुआवजे के रूप में मिली। इसके साथ ही फसल बीमा योजना को नए रूप में लागू किया। मगर बड़े प्रयोगों के रूप में देखा जाए तो किसानों को अपनी फसल व भूमि बेचने के लिए बिचौलियों की बजाए सीधे एक पोर्टल से जोड़ दिया ताकि किसानों को किसी की मिन्नते न निकालनी पड़े और इस एवज में किसी को नजराने के तौर पर आॢथक नुकसान भी न उठाना पड़े। 

इस पोर्टल के अलावा मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल लागू करके किसानों को बड़ी सौगात दी। गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए सरकार ने किसानों के हितार्थ मेरा पानी मेरी विरासत योजना लागू कर न केवल किसानों को जागरूक किया बल्कि धान का रकबा कम करवाते हुए पूरे प्रदेश में हरियाणा को कहीं आगे लाकर खड़ा किया। किसानों को स्वेच्छा से धान की खेती छोडऩे पर सरकार की ओर से निर्धारित आॢथक सहायता भी मुहैया करवाई। सरकारी आंकड़े के अनुसार लक्ष्य 1 लाख हैक्टेयर में धान की रोपाई कम करवाने का था मगर किसान मुख्यमंत्री की सोच से इस कदर प्रभावित हुए कि स्वेच्छा से किसानों ने 1 लाख 18 हजार 128 हैक्टेयर भूमि में पहले की तुलना में कम धान लगाई।

कोरोना काल में यूं की उपज की खरीद
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा यूं तो खेती और खेती से जुड़े लोगों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने व खेती को रोजगार की दिशा में बढ़ाने के लिए काफी सार्थक प्रयोग किए हैं मगर कोरोना संकट के दौर में भी किसानों को गेहूं की कटाई और उपज बेचने में कोई दिक्कत न आए, ऐसे में रबी सीजन की सभी फसलों को खरीदने के लिए सरकार की ओर से गांव स्तर में खरीद केंद्र खुलवाए गए और क्रमानुसार किसानों को उपज बेचने के लिए कार्ड जारी किए ताकि सोशल डिस्टैंस कायम रहे और किसानों की उपज भी बिक सके। हालांकि कोरोना काल के दौरान लॉकडाऊन के चलते एकबारगी किसान चिंताओं के भंवर में उलझ गए थे मगर मुख्यमंत्री खट्टर ने यहां भी किसान हितैषी होने का प्रमाण देते हुए पोर्टल व गांव स्तर पर स्थापित किए गए खरीद केंद्रों में उपज खरीद शुरू करवाई और किसानों की उपज का भुगतान भी तत्काल रूप से करवाया गया।

ये नीतियां हुई लागू
प्रदेश सरकार ने प्रदूषण की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भी कई बड़े निर्णय लिए। इसी के तहत प्रदेश सरकार ने पराली प्रबंधन का खाका खींचा और हरियाणा सरकार ने किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित करते हुए 1 हजार 305 करोड़ रुपए की बड़ी योजना को स्वीकृति प्रदान की। किसानों एवं पशुपालकों के लिए केंद्र सरकार की किसान क्रेडिट कार्ड योजना की तरह ही प्रदेश सरकार ने पशु किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम शुरू की जिसके तहत गाय, भैंस, भेड़ और बकरी पालन के लिए 3 लाख रुपए तक का लोन सिर्फ 4 फीसदी बयाज दर पर देने की योजना तैयार की। इसके अलावा किसान मित्र योजना बनाकर भी किसानों को सरकार से जोडऩे का प्रयास किया गया। सरकारी सूत्रों का दावा है कि यूं तो सरकार ने हर वर्ग के लिए कल्याणकारी नीतियां बनाई मगर देश के अन्नदाता किसान पर सरकार का खास फोकस रहा और किसानों के लिए लागू नीतियों में से 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा सीमांत एवं लघु किसानों को 6 हजार रुपए की पैंशन भी दी जा रही है।

2022 तक किसानों की आय दोगुणी करना हमारा लक्ष्य: खट्टर
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के किसानों को दी जा रही सुविधाओं के संदर्भ में ट्वीट के जरिए कहा है कि हरियाणा कृषि प्रधान राज्य है और इसलिए कृषि क्षेत्र का विकास हमारी पहली प्राथमिकता है। देश के किसानों के कंधे पर देश को खिलाने और भूख मिटाने की बड़ी जिम्मेदारी है मगर आज तक किसी ने इस किसान की तकलीफों को दूर करने की जिम्मेदारी नहीं समझी। खट्टर ने कहा कि 2022 तक हमारी सरकार किसानों की आय को दोगुणी करने के लिए प्रतिबद्ध है। 

किसान अब कांट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए अपनी उपज को बेचने के लिए सक्षम है। कई पोर्टल बनाए गए हैं ताकि किसानों को सीधे रूप से अपनी उपज बेचने में सुविधा मिले। उन्होंने कहा कि किसानों के सम्मान के साथ साथ उन्हें खुशहाल बनाने के लिए हमारा संकल्प है और सरकार निरंतर उस दिशा में आगे बढ़ भी रही है।


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Edited By

vinod kumar

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