करोड़ों रुपए के बैंक घोटाले की जांच से अफसरशाही में हलचल, कई वरिष्ठ अधिकारियों पर बढ़ा दबाव
punjabkesari.in Sunday, Jun 28, 2026 - 12:44 PM (IST)
चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा के बहुचर्चित 657 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे प्रशासनिक गलियारों में बेचैनी भी बढ़ती जा रही है। दो आईएएस और एक आईएफएस अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद अब कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर जांच की आंच पहुंच चुकी है। सरकारी धन के निजी बैंकों में निवेश, खातों के संचालन और कथित वित्तीय अनियमितताओं की पड़ताल के बीच यह मामला अब केवल बैंकिंग प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके कई अन्य पहलुओं की भी गहन जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार यदि जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन में नए तथ्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत संपत्तियों, निवेश, बैंक खातों और अन्य वित्तीय स्रोतों तक भी बढ़ सकता है। हालांकि, इस संबंध में जांच एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
3 अधिकारी न्यायिक हिरासत में, 6 अन्य की भूमिका की जांच जारी
सीबीआई अब तक वर्ष 2000 बैच के आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल, वर्ष 2012 बैच के आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह तथा आईएफएस अधिकारी नवनीत श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर चुकी है। तीनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इसके अलावा आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार, साकेत कुमार, विनीत गर्ग, मोहम्मद शाईन, मणिराम शर्मा और डीके बेहरा की भूमिका भी जांच के दायरे में है। राज्य सरकार पहले ही इन अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत जांच की अनुमति दे चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
अग्रिम जमानत के लिए अदालत पहुंचे प्रदीप कुमार
संभावित गिरफ्तारी की आशंका के बीच प्रमोटी आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार ने पंचकूला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। अदालत ने इस मामले में दो जुलाई को सुनवाई निर्धारित करते हुए सीबीआई से संबंधित अन्य जमानत याचिकाओं का ब्यौरा भी मांगा है। जांच एजेंसी उनके उस कार्यकाल की पड़ताल कर रही है जब वे हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सदस्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि उसी दौरान सरकारी धन के निवेश और बैंक खातों के संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे।
डीके बेहरा के पत्र से भी बढ़ी चर्चा
जांच के घेरे में आए आईएएस अधिकारी डीके बेहरा द्वारा विकास एवं पंचायत विभाग को भेजे गए एक पत्र ने भी प्रशासनिक हलकों का ध्यान आकर्षित किया है। 27 मई को लिखे गए इस पत्र में उन्होंने सरकारी खाते खोलने, निजी बैंकों में धन हस्तांतरण, निवेश की स्वीकृतियों तथा वित्तीय प्रक्रियाओं से जुड़े दस महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। सूत्रों का मानना है कि जांच के दौरान यह पत्र भी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में देखा जा रहा है।
वित्तीय रिकॉर्ड की हो रही गहन जांच
जांच एजेंसियां सरकारी धन के निवेश, बैंकिंग प्रक्रिया और धन के प्रवाह से जुड़े सभी रिकॉर्ड का गहन विश्लेषण कर रही हैं। यदि जांच में किसी अधिकारी की घोषित आय और वास्तविक संपत्तियों के बीच असामान्य अंतर या अन्य संदिग्ध वित्तीय लेन-देन सामने आते हैं तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है। हालांकि फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
विभागों में पुराने रिकॉर्ड खंगालने का दौर
सूत्र बताते हैं कि जांच तेज होने के बाद कई विभागों में वर्षों पुराने वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों के संचालन, निवेश संबंधी फाइलों और अनुमोदनों का आंतरिक स्तर पर मिलान किया जा रहा है। विभिन्न नोटशीट और दस्तावेजों को भी व्यवस्थित किया जा रहा है ताकि आवश्यकता पड़ने पर जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराया जा सके। प्रशासनिक हलकों का मानना है कि आने वाले दिनों में जांच की दिशा और अधिक स्पष्ट होगी तथा उसके आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।
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