अंतर्कलह की शिकार भाजपा का ‘75 पार’ का सपना साकार होना मुश्किल

10/9/2019 1:46:13 PM

अम्बाला (बलराम सैनी): विधानसभा चुनाव में मतदान की तारीख नजदीक आने के चलते ज्यों-ज्यों प्रचार अभियान तेज हो रहा है त्यों-त्यों विभिन्न पाॢटयों की कमजोरियां भी सामने आ रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन पाॢटयों को विरोधियों से लड़ाई करने से ज्यादा अंदरूनी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है और इस मामले में कोई भी पार्टी अछूती नहीं है।  मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में ‘अब की बार 75 पार’ का सपना लेकर चुनावी दंगल में उतरी भाजपा टिकट आबंटन को लेकर अंतर्कलह की शिकार है।

टिकट न मिलने से नाराज भाजपा के कई नेता तो निर्दलीय अथवा अन्य पाॢटयों के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतर चुके हैं जबकि कई पार्टी के भीतर रहकर ही अंदरूनी तौर पर आधिकारिक प्रत्याशी के खिलाफ काम कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व के लिए खुलकर विरोध कर रहे नेताओं के खिलाफ तो रणनीति बनाना आसान है लेकिन अंदर रहकर पार्टी को खोखला कर रहे नेताओं की पहचान करना थोड़ा मुश्किल है। ऐसे में भाजपा के ‘75 पार’ के सपनेका साकार होना आसान नहीं होगा।

उधर भाजपा को चुनौती देने की मंशा रखने वाली कांग्रेस के लिए चुनौती इससे कहीं बड़ी है। पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, पूर्व मंत्री रणजीत सिंह, पूर्व मंत्री निर्मल सिंह, महिला कांग्रेस की सोशल मीडिया प्रभारी रही चित्रा सरवारा समेत कई वरिष्ठ नेताओं की बगावत और मुखर हुई गुटबाजी कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं पर निरंतर पानी फेर रही है। इसके चलते कांग्रेस नेताओं के बीच भाजपा अथवा अन्य पाॢटयों को घेरने की बजाय आपस में ही एक-दूसरे को नीचा दिखाने की जंग छिड़ी है जिससे निश्चित तौर पर पार्टी को भारी नुक्सान होगा।  इंडियन नैशनल लोकदल (इनैलो) अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला और जननायक जनता पार्टी (जजपा) अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला के बीच छिड़ी ‘अहं’ की जंग में पूर्व उप-प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के अनुयायी रहे नेता पिसकर रह गए हैं।

परिवार की फूट के चलते अस्तित्व में आई जजपा की स्थापना के समय कई बड़े नेता इनैलो छोड़कर जजपा में शामिल हो गए। फिर जींद उपचुनाव, लोकसभा चुनाव और अब विधानसभा चुनाव तक पहुंचा नेताओं की अदला-बदला का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इतना ही नहीं, आपसी लड़ाई से तंग आए इनैलो-जजपा के कई पुराने नेताओं ने भाजपा और कांग्रेस का दामन भी थाम लिया है। चौटाला परिवार पर आधारित यदि ये दोनों पाॢटयां एकजुट होकर भाजपा व कांग्रेस का मुकाबला करतीं तो विधानसभा में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करवा सकती थीं, लेकिन बदली परिस्थितियों में विपक्षी दलों को मजबूती से चुनौती देना आसान नहीं है। 


Isha

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