मनोहर के ‘सारथी’ संजय भाटिया की अब राज्यसभा में होगी एंट्री ! भाजपा से पहली बार किसी पंजाबी नेता को मिला अवसर

punjabkesari.in Tuesday, Mar 03, 2026 - 09:23 PM (IST)

चंडीगढ़ (संजय अरोड़ा): भारतीय जनता पार्टी से पहली बार किसी पंजाबी चेहरे को हरियाणा से राज्यसभा सीट के लिए उम्मीदवार बनाया है। करनाल के पूर्व सांसद संजय भाटिया को मंगलवार को पार्टी नेतृत्व की ओर से उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया गया। प्रदेश के वर्तमान सियासी परिदृश्य के अनुसार संख्या बल के हिसाब से संजय भाटिया का निर्विरोध चुना जाना तय है। वे 5 मार्च को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। 

संजय भाटिया को पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का विश्वासपात्र माना जाता है। साल 2014 में जब मनोहर लाल ने पहली बार करनाल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा तो संजय भाटिया ने उनके सारथी की भूमिका अदा करते हुए चुनावी प्रबंधन संभाला था। इसी प्रकार 2019 के विधानसभा चुनाव में वे तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ एक साये की तरह नजर आए थे। इसके बाद जब 2024 में मनोहर लाल ने करनाल से संसंदीय चुनाव लड़ा तो उस वक्त भी भाटिया एक रणनीतिकार के रूप में दिखे थे और संजय भाटिया मनोहर लाल को अपना सियासी गुरु मानते हैं। 

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2019 के विधानसभा चुनाव से पहले जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश में जन आशीर्वाद यात्रा शुरू की थी तो उस यात्रा की स्क्रिप्ट भी संजय भाटिया ने ही लिखी थी और प्रदेशभर में चली इस यात्रा के दौरान पूरा वक्त संजय भाटिया मनोहर लाल के साथ ही रहे थे। उल्लेखनीय है कि हरियाणा के अब तक के इतिहास पर नजर डालें तो भाजपा से 9 नेताओं को राज्यसभा का सदस्य बनने का अवसर मिला है। इससे पहले भाजपा से ब्राह्मण व जाट समुदाय से सबसे अधिक तीन-तीन नेता राज्यसभा के सदस्य बने हैं। इनमें ब्राह्मण समुदाय से सुरेश प्रभु, रेखा शर्मा व डी.पी. वत्स का नाम शामिल है। राज्यसभा सदस्य बनने वाले जाट समुदाय के नेताओं में चौ. बीरेंद्र सिंह, किरण चौधरी तथा सुभाष बराला का नाम शामिल है।

 अनुसूचित जाति वर्ग से कृष्ण पंवार तथा दुष्यंत गौतम राज्यसभा के सदस्य बने हैं। पिछड़ा वर्ग से रामचंद्र जांगड़ा राज्यसभा के सदस्य बने हैं। सुरेश प्रभु 29 नवंबर 2014 से लेकर 1 अगस्त 2016 तक, चौ. बीरेंद्र सिंह 21 अगस्त 216 से लेकर 20 जनवरी 2020 तक, दुष्यंत गौतम 19 मार्च 2020 से लेकर 1 अगस्त 2024 तक, कृष्ण लाल पंवार 2 अगस्त 2022 से लेकर 8 अक्तूबर 2024 तक व डी.पी. वत्स 3 अप्रैल 2018 से लेकर 2 अप्रैल 2024 तक राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। इसी तरह से सुभाष बराला को 3 अप्रैल 2024 को राज्यसभा का सदस्य बनाया गया था। उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक है।

रामचंद्र जांगड़ा को 10 अप्रैल 2020 को राज्यसभा का सदस्य बनाया गया था और उनका कार्यकाल इस साल 9 अप्रैल को पूरा हो रहा है। इसी प्रकार से किरण चौधरी को 27 अगस्त 2024 को राज्यसभा का सदस्य बनाया गया। उनका कार्यकाल भी इस साल 9 अप्रैल को पूरा हो रहा है। ऐसे ही रेखा शर्मा को 13 दिसंबर 2024 को राज्यसभा का सदस्य बनाया गया, उनका कार्यकाल 1 अगस्त 2028 तक है। सियासी विश£ेषक मानते हैं कि इस समय पिछड़ा वर्ग से संबंध रखने वाले नायब सैनी प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं जबकि ब्र्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखने वाले मोहन लाल बड़ौली भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष हैं। ऐसे में भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने जातीय संतुलन को साधने के मकसद से ही पंजाबी समुदाय से संबंध रखने वाले संजय भाटिया को राज्यसभा का सदस्य बनाया है।

मनोहर लाल बने थे पहले पंजाबी मुख्यमंत्री

खास पहलू यह है कि अक्तूबर 2014 में भाजपा पहली बार अपने बलबूते हरियाणा में स्पष्ट बहुमत हासिल करने में सफल रही थी और पार्टी के 47 विधायक चुने गए तथा भाजपा ने पहली बार हरियाणा में किसी पंजाबी चेहरे को मुख्यमंत्री बनाया। उस समय पार्टी ने मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। 2019 में एक बार फिर से मनोहर लाल को ही प्रदेश सरकार की कमान सौंपी गई। वे 26 अक्तूबर 2014 से लेकर 12 मार्च 2024 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। जून 2024 में वे करनाल से सांसद बने और वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री हैं। खास बात यह है कि 2019 और 2024 के संसदीय चुनाव व हरियाणा विधानसभा के चुनाव में उन्होंने मुख्य रणनीतिकार की भूमिका निभाई थी। 

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विशेष बात यह है कि वर्तमान में राज्यसभा के सदस्य बनने वाले संजय भाटिया को भी मनोहर लाल का ही भरोसेमंद माना जाता है। उनकी अनुशंसा पर ही 2019 के लोकसभा चुनाव में संजय भाटिया को करनाल संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाया गया और उस समय उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 6 लाख 56 हजार के बड़े अंतर से पराजित किया था। संजय भाटिया ने साल 2009 में भाजपा की टिकट पर पानीपत शहरी सीट से चुनाव लड़ा था और 24 हजार 135 वोटों के साथ वे दूसरे स्थान पर रहे थे। संगठन में भी भाटिया कई पदों पर काम कर चुके हैं। 2024 के संसदीय चुनाव में उन्होंने करनाल से चुनाव नहीं लड़ा था और उनके स्थान पर पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल उम्मीदवार बनाए गए थे।

डा. मंगल सेन थे प्रभावशाली पंजाबी नेता

खास बात यह है कि कभी मंगल सेन भारतीय जनता पार्टी में एक प्रभावशाली पंजाबी चेहरा थे। वे शुरू में जनसंघ में रहे और स्वतंत्रता आंदोलन में भी उनकी अहम भूमिका रही। सबसे पहले वे 1957 में भारतीय जनसंघ की टिकट पर रोहतक विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद वे 1962, 1967, 1968, 1977 में जनसंघ की टिकट पर रोहतक से विधायक निर्वाचित हुए। 1982 में मंगलसेन भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर रोहतक से विधायक चुने गए और फिर 1985 में उन्होंने राजीव-लौंगोवाला समझौते के विरोध में रोहतक सीट से अपना त्यागपत्र दे दिया। 

1987 में मंगलसेन सातवीं बार रोहतक से विधायक निर्वाचित हुए और चौ. देवीलाल की सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। सेन एक बार भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे। मंगल सेन के बाद अनिल विज ने भाजपा में एक पंजाबी नेता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। विद्यार्थी जीवनकाल से ही विज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए। वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से काफी प्रभावित रहे। साल 1990 में अंबाला कैंट में उपचुनाव हुआ।

इस उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अनिल विज को उम्मीदवार बनाया। विज ने पहले ही चुनाव में जीत हासिल की और विधायक निर्वाचित हुए। 1990 में ही अनिल विज को भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया। 1996 और साल 2000 में अनिल विज अंबाला से आजाद विधायक निर्वाचित हुए। इसी तरह से 2009, 2014 और 2019 और 2024 में वे लगातार चार बार भाजपा की टिकट पर अंबाला से विधायक निर्वाचित हुए। 

संगठन में कई पदों पर काम कर चुके हैं संजय भाटिया

पानीपत में 29 जुलाई 1967 को जन्मे संजय भाटिया ने छात्र जीवन से ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुडक़र संगठनात्मक कार्य शुरू किया। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1980 के दशक में हुई, जब वे 1987 में मंडल महासचिव बने और 1989 में मंडल अध्यक्ष का पद संभाला। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। जिला महासचिव, जिला अध्यक्ष और 1998 में राज्य महासचिव तक का सफर तय किया। 2001 में उन्हें नगर परिषद पानीपत का अध्यक्ष बनाया गया, जो उनकी लोकप्रियता और संगठन में सक्रियता का प्रमाण था। 

भाजपा में वे मंडल अध्यक्ष, जिला महासचिव, जिला अध्यक्ष, स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ के राज्य संयोजक और किसान मोर्चा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य जैसे पदों पर रहे। 2015 से 2021 तक वे भाजपा हरियाणा के राज्य महासचिव रहे और हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष के रूप में ग्रामीण विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में योगदान दिया। उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि 2019 लोकसभा चुनाव में सामने आई, जब वे पहली बार चुनाव लड़ते हुए करनाल लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर भारी मतों से विजयी हुए।

उन्होंने हरियाणा के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की, जो उनके कड़ी मेहनत, जनसंपर्क और पार्टी के प्रति समर्पण का परिणाम था। संसद में वे अपनी सक्रियता के लिए जाने जाते थे। उच्च उपस्थिति, जनहित के मुद्दों पर बोलना और क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से उठाना उनकी खासियत रही।

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Content Editor

Krishan Rana

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