PM मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में कृषि क्षेत्र और किसानों के समग्र विकास के लिए कई अभूतपूर्व योजनाएं शुरू की
punjabkesari.in Wednesday, Jun 17, 2026 - 03:27 PM (IST)
चंडीगढ़ (धरणी) : बीते 12 वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने समाज के सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर फैसले किए हैं। केंद्र सरकार के फैसलों से कतार में खड़ा अंतिम व्यक्ति भी लाभान्वित हुआ है। राजग द्वारा नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद सबसे पहली रैली 15 सितंबर 2013 को रेवाड़ी में हुई थी। पिछले 12 साल के दौरान प्रधानमंत्री 17 बार हरियाणा आ चुके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में कृषि क्षेत्र और किसानों के समग्र विकास के लिए कई अभूतपूर्व योजनाएं शुरू की गई हैं। इन योजनाओं का प्राथमिक उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, आधुनिक तकनीक का प्रसार करना और प्राकृतिक आपदाओं में सुरक्षा प्रदान करना रहा है। सरकार का मानना है कि किसान भाई-बहन देश की अन्न सुरक्षा, पोषण और समृद्धि के आधारस्तंभ हैं। उनके जीवन को अधिक से अधिक आसान बनाने के लिए सरकार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। पीएम-किसान सम्मान निधि और फसल बीमा योजना जैसी कई पहल उनकी आय की सुरक्षा के साथ-साथ खेती को अधिक सशक्त बना रही हैं।
नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले बारह वर्षों में किसानों के कल्याण और उनकी आय बढ़ाने के लिए कई पहल की हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण कदम प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना का शुभारंभ है, जो देश की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजनाओं में से एक है। इस योजना के तहत किसानों को प्रतिवर्ष छह हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में मिलते हैं। अब तक लगभग नौ करोड़ पचास लाख किसान परिवारों के खातों में चार लाख 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है।
किसानों की आय को कई स्रोतों से बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और राष्ट्रीय पशुधन मिशन जैसी योजनाएं भी शुरू की गईं। 2014-15 से लेकर इस साल मार्च तक लगभग 26 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं। फसल बीमा योजना के तहत लगभग 23 करोड़ किसानों को एक लाख 92 हजार करोड़ रुपये के फसल बीमा दावों में मदद मिली है। प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को 3000 रुपये की मासिक सुनिश्चित पेंशन दी जा रही है।
फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) किसानों के लिए जीवन रेखा बन गया है,क्योंकि सरकार ने इसे उत्पादन लागत के डेढ़ गुना पर निर्धारित किया है। सरकार के नीतिगत समर्थन के कारण, कुल खाद्यान्न उत्पादन 2013-14 में 26.5 करोड़ टन से बढक़र 2024-25 में लगभग 35.8 करोड़ टन हो गया है। भारत 15.4 करोड़ टन से अधिक के रिकॉर्ड उत्पादन के साथ चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बन गया है।
पीएम-कुसुम योजना से जहां खेती के लिए उन्हें सौर ऊर्जा सुलभ हुई है, वहीं इससे खेती पर होने वाला खर्च भी कम हुआ है। खेती सहित अन्य जरूरतों के लिए कम ब्याज पर आसानी से ऋण उपलब्ध कराने में किसान क्रेडिट कार्ड किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के बहुत काम आ रहा है। उनकी फसलों को उचित मूल्य दिलाने के लिए ‘बीज से बाजार तक’ की पहल भी बहुत कारगर साबित हो रही है। 2014-2025 के बीच जलवायु के अनुकूल फसलों की लगभग 3,000 किस्में जारी की गईं। कृषि अवसंरचना कोष के तहत 84,200 करोड़ रुपए से अधिक मंजूर किए गए, जिससे 1.33 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ।
हरियाणा ने शुरू से केंद्र सरकार की योजनाओं के कदमताल करते हुए देश के अन्य राज्यों के सामने एक नजीर पेश की है। केंद्र की किसी भी योजना को लागू करने में हरियाणा ने हमेशा ही अग्रणी भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू होने के बाद हरियाणा में अब तक 1.17 करोड़ किसानों ने इसका लाभ उठाया है। जिन्हें 9099 करोड़ करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी सहायता प्राप्त हुई है। खरीफ सीजन 2025 में एक लाख 67 हजार 460 किसानों को 711 करोड़ रुपये का फसल नुकसान मुआवजा दिया गया है।
मिट्टी की गुणवत्ता की जांच करने और उसके अनुसार सही उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना शुरू की गई है। इस पहल के तहत, राज्य में अब तक 70 लाख मिट्टी के नमूने एकत्र किए जा चुके हैं। 55 लाख नमूनों का विश्लेषण कर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। अब तक 86 लाख से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं। हरियाणा में 17 स्थायी मिट्टी और जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।
हरियाणा सरकार ने पीएम कुसुम योजना को भी प्रमुखता से लागू किया है। एक लाख 80 हजार 582 किसानों को इसका लाभ मिला है। इस योजना का लाभ देने में राष्ट्रीय स्तर हरियाणा चौथे नंबर पर है। देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश इस मामले में हरियाणा से पीछे है। फसल अवशेष प्रबंधन योजना पांच लाख 54 हजार 405 किसानों को 461.75 करोड़ की राशि जारी की गई है। 9885 किसानों को 85.10 करोड़ की मशीन खरीद पर सब्सिडी दी गई है।
मेरी फसल-मेरा ब्योरा' के तहत प्रदेश के 11.71 लाख किसान अपना पंजीकरण करवा चुके हैं, जो एमएसपी फसल खरीद, फसल बीमा योजना तथा अन्य कृषि योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। हरियाणा में अब तक केंद्र की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के दायरे में 16 लाख से अधिक किसान आ चुके हैं। प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना के तहत हरियाणा के करीब चार लाख किसानों का पंजीकरण हुआ है। यह योजना छोटे व सीमांत किसानों के लिए हैं। हरियाणा देश का ऐसा पहला राज्य है जहां किसानों को 24 फसलों पर एमएसपी मिलता है। हरियाणा सरकार ने मंडी भाव नहीं मिलने पर किसानों की चिंता को दूर करते हुए 14 सब्जियों, पांच फलों तथा दो मसालों समेत 21 उत्पादों को भावांतर भरपाई योजना में शामिल किया है। जिससे किसानों को जोखिम की पूर्ति की जाती है।
हरियाणा समेत समूचे देश में एक दौर वह भी था जब किसानों को मिलने वाले मुआवजा राशि के दो या तीन रुपये चेक भी वायरल हुए हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और डिजिटल सुविधाओं ने किसान को ग्रामीण उद्यमी के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है।