मजदूरों पर फिर आफत: नरेला व कुंडली से पलायन शुरू, 3 हजार उद्योग प्रभावित

12/5/2020 10:04:03 AM

सोनीपत: कोरोना हो या फिर किसानों का आंदोलन, आफत एक बार फिर मजदूरों पर ही आन पड़ी है। बार्डर पर किसानों के जमावड़े के चलते कुंडली, राई व नरेला के करीब 3 हजार उद्योगों पर ताला लटकने की नौबत आ गई है। इसका कारण हाईवे बंद होने से इन उद्योगों से तैयार व कच्चे माल का इधर से उधर न पहुंचा पाना है। इन उद्योगों से संबंधित माल से भरे हजारों ट्रक जहां-तहां जाम में भी फंसे हैं। साथ ही उद्योगों में पहुंचना भी बहुत से कामगारों के लिए मुश्किल हो गया है। ऐसे में गत 9 दिनों से उद्योगों में कामकाज ठप्प है जिस कारण मजदूर एक बार फिर घर बैठने के लिए मजबूर हो गया है। 3-4 दिन तक मजदूरों ने इंतजार किया कि शायद किसानों का जमावड़ा हट जाएगा लेकिन सप्ताहभर तक भी जब बात नहीं बनी तो अब मजदूरों ने अपने घरों की ओर रुख कर लिया है। 

3 कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर पंजाब के किसान गत 2 माह से संघर्षरत हैं। पहले ट्रेनों को रोका गया और अब गत 9 दिनों से किसान दिल्ली के चौतरफा हरियाणा व यू.पी. से लगती बार्डरों पर डेरा डालकर बैठे हैं। इसका सीधा असर एन.सी.आर. के उद्योगों पर पड़ा है। सोनीपत के राई व कुंडली के अलावा साथ लगते नरेला क्षेत्र के करीब 3 हजार उद्योग प्रभावित हैं और कुछ पर तो ताले लटक चुके हैं। यही कारण है कि अब एक बार फिर मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इन क्षेत्रों से रोजाना करीब 500 मजदूर घरों को रवाना हो रहे हैं। 

ट्रेनें बंद, बसों में सवार होकर बिहार व यू.पी. की ओर हो रहे रवाना 
फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार मजदूर पैदल नहीं बल्कि टूर एंड ट्रैवल्स की बसों में बिहार व यू.पी. की ओर रवाना हो रहे हैं। ट्रेनें बंद होने के कारण मजदूरों को बसों में कहीं अधिक किराया भरकर घरों को जाना पड़ रहा है। मजदूरों ने बताया कि उनसे निजी बस चालकों द्वारा मनमाना किराया वसूला जा रहा है। उनसे सामान का किराया अलग से लिया जा रहा है। वहीं खास बात यह है कि बसों में 80 सीट होने के बावजूद 100 से ज्यादा सवारियां बैठाई जा रही हैं। मजदूरों ने बस मालिकों के सामने विरोध दर्ज भी करवाया लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। 

नरेला से प्याऊ मनियारी तक पैदल सफर कर रहे मजदूर 
किसानों के जमावड़े के कारण मजदूरों को पैदल भी चलना पड़ रहा है। नरेला से के.एम.पी. तक करीब 10-12 किलोमीटर तक मजदूर अपने बच्चों व महिलाओं को लेकर सामान के साथ पैदल ही सफर कर रहे हैं। के.एम.पी. के पास से उन्हें बसों में बैठाया जाता है। इस काम में आधा दर्जन बसें लगी हुई हैं। आमतौर पर बसों में सामान्य किराया लिया जाता है लेकिन मजदूरों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है। एक बस चालक ने बताया कि वे आगरा, मेरठ, कानपुर, दरभंगा, मोतीपुर आदि जिलों में मजदूरों को लेकर जा रहे हैं। 
 


Isha

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